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गुरुवार, 11 मई 2017

हीमोसेफीलिया पर जागरूकता संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता - हीमोफीलिया के बारे में जागरूकता और जानकारी फैलाने के लिए हीमोफीलिया फेडरेशन ऑफ इंडिया, कानपुर चैप्टन ने रोगियों और उनके परिवारजनों के लिए एक संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें डा0 यशवंत राव ने भाग लिया।
              कार्यक्रम की शुरूआत डा0 राजेश भसीस एचएफआई सचिव के स्वागत भाषण से हुई और इसमें हीमोफीलिया रोगियों के अनुभव, सर्जरी मामलो, प्रोफाइलेक्सिस उपचारो व फायदों पर चर्चा की गयी। बताया गया कि प्रत्येक लगभग 125000 भारतियों में एक फीमोफीलिया से पीडित है और इस जेनेटिक समस्या की रोकथाम या नियंत्रण के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान की कमी है। डा0 सुनील तनेजा ने कहा हीमोफीलिया एबसे पुरानी ज्ञात जेनेटिक रक्तस्त्राव समस्या है और प्रदेश में इस रोग की पहचान के लिए सुविधाओं की कमी है, इसलिए वर्तमान में यही गहरी चिंता का विष्य है साथ ही राज्य में अवरोधकों का भी अधिक प्रावधान नही है। कहा हम सरकार से इन बातों पर ध्यान देने का आग्रह करते है, जिससे रोगियों को इलाज मिलना आसान हो सके। शिविर में रोगियो, उनके परिवारो और मित्रों ने भाग लिया जो फीमोफीलिया देखभाल पर केंद्रित था और उन्हे रक्तस्त्राव समस्याओं के सभी चिकित्सीय ओर मनोवैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी गयी। बताया गया  िकइस रोग से पीडित लोगों को रक्त आधान वाले रोग जैसे एचआईवी, एचबीवी, एचसीवी होने की अधिक संभावना रहती है। दो प्रकार के हीमोफीलिया होते है जो क्रोमोसोम्स पर किसी एक जीन्स जो शरीर को खून के थक्के बनाने के लिए क्लाटिंक फैक्टर बनाने का नर्देश देते है।  यहद यह नही होता है तो रोगी को जीवनभर जेनेटिक रूप से बनाये गये रिकम्बिनेंट फैक्टर कंसंट्रेट इंजेक्शन के माध्यम से दिए जाते है। इससे संक्रमण को काफी हद तक नियंत्रित किए जाने में मदद मिलती है।

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