AMJA BHARAT एक वेब न्‍यूज चैनल है जिसे कम्‍प्‍यूटर, लैपटाप, इन्‍टरनेट टीवी, मोबाइल फोन, टैबलेट इत्‍यादी पर देखा जा सकता है। पर्यावरण सुरक्षा के लिये कागज़ बचायें, समाचार वेब मीडिया पर पढें

सोमवार, 15 मई 2017

यमुना तटवर्ती क्षेत्र का जल स्तर घटने से कई गांव पानी के संकट मे

फतेहपुर, शमशाद खान । पड़ रही भीषण गर्मी के चलते इन दिनों जनपद के सभी तहसील क्षेत्रों मे पेयजल का संकट गहरा गया है वहीं बिन्दकी तहसील के जाफरगंज विकास खंड खजुहा के यमुनातटवर्ती क्षेत्रों में आने वाले सभी गांवों मे ंपेयजल का भारी संकट गहराता जा रहा है। बताते चले कि यमुना जी का जलस्तर एकदम कम हो जाने के कारण गांव में लगे पचास फीसदी इंडिया मार्का हैंडपंपों से पानी नही निकल रहा हैं यमुना तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि यमुना का जलस्तर कम हो जाने के कारण पानी की विकराल समस्या से लोग जूझने लगे हैं जिसकी समस्या को लेकर लोग चिंतित हैं इतना ही नही जानवरों को पानी पिलाने के लिए यमुना में ले जाना पड़ता हैं वहीं बिजली की कटौती के चलते पेयजल की समस्या और विकराल रूप धारण करती जा रही हैं जो गांव में चालू हैंडपंप हैं उनमें सुबह से ही पानी भरने वालों की लम्बी कतारें लग जाती है। कभी कभार पहले नम्बर लगाने को लेकर आपस में मारपीट तक की नौबत आ जाती है। कई गांव में तो तालाबों मंे पानी सूख जाने से बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई हैं यमुना का जलस्तर बांदा जनपद की तरफईछावर-चंदवारा की ओर बढ़ गया हैं कुकेड़ी से लेकर दरियाबाद तक एक किमी का रेत निकल आया हैं ग्रामीण बताते है कि जिस समय जानवरों को पानी पिलाने के लिए ले जाना पड़ता है। तब उस समय इस प्रचंड गर्मी में यमुना की बालू आग का काम करती है। जब कुदरत साथ नही देता हैं तो बनावटी सुविधाएं भी साथ नही दे पाती हैं अभी बिजली को समस्या में कुछ सुधार हुआ था। लेकिन इधर आंधी तुफान के चलते बिजली की व्यवस्था चरमारा गई है। उधर ग्राम प्रधानों की लापरवाही के चलते अभी तक तालाबों मे ंपानी भरवाया गया। तालाबों की सफाई व खुदाई तीन-तीन बार कागजी कार्रवाई होकर ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारियों की मिलीभगत से तालाबों की दिखावटी खुदाई व सफाई हो गई है। जीता जागता उदाहरण है कोरवल गांव में व धौरहरा के गा्रम प्रधानों द्वारा यह खेल रचाया गया हैं तीन ग्राम प्रधानों की अभी तक न कोई जांच हुई है और न ही उनको सरकार के नियम कानूनों का पालन करने का कोई संदेश मिला है। कोरवल गांव के तालाब की खुदाई दो बार हो चुकी हैं तालाब के सुदंरीकरण के नाम का लाखों रूपया उठाया जा चुका है। इन तालाबों में सुंदरीकरण तो दूर रहा। इनमें एक बूंद पानी नहीं दिखाई दे रहा हैं जबकि गार्मियों के महीने में केंद्र व प्रदेश सरकार का तालाबों के प्रति एक विशेष आस्था रही है। लेकिन सरकार के सारे नियम कायदे ग्राम प्रधान ताक में रखे हुए है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Advertisement

Advertisement

लोकप्रिय पोस्ट