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गुरुवार, 4 मई 2017

शबेबारात के माह मे रोजे रखकर अल्लाह की करें इबादत- शहरकाजी

फतेहपुर, शमशाद खान । शाबान हजरत मोहम्मद स,अ, का महीना है। इस माह-ए मुबारक में इबादत का महत्व अन्य महीनों से ज्यादा हैं इसी महीने में एक ही मुबारक रात भी आती है। जिसे शब-ए-रात कहते है। जो हजारो रातों से अफजल बतायी गयी है। शहरकाजी मौलाना कारी फरीदउदीन कादरी ने कहा कि हजरत अबू हुरैरा से रेवायत है कि हजरत मोहम्मद साहब ने फरमाया रजब अल्लाह ताला का महीना है। शाबान गुनाहों का ेदूर करने वाला और रमजान गुनाहों को पाक करने वाला महीना है। उन्होने कहा कि शबेबारात शाबान की 15वी रात है जिसे 3 नामों से याद किया जाता है। दोजख से बरी होने वाली रात, दस्तावेज वाली रात बरकतों वाली रात और शबेबारात जिसे इंसानी वजह की रात से भी याद किया जाता है। उन्होने कहा कि ईमान वाले और अल्लाह से डने वाले इस रात के इंतजार में ढेरों दुआएं करते है। जिससे साल भर के वो काम जो खुदा और नबी के हुक्म के मुताबिक नहीं हुए उनसे तौबा करके माफी तलब की जाये। शहरकाजी ने बताया कि शाबान के महीने में हजरत मोहम्मद साहब ज्यादा से ज्यादा रोंजा रखते थे इसलिये मुसलमानों को चाहिए कि नबी की सुन्नतों पर अमल करते हुए इबादत व व रोजा रखकर अल्लाह ताला को राजी करें और गुनाहों से तौबा करके एक अच्छा इंसान बने। उन्होंने कहा कि जो लोग शबेबारात में अल्लाह की इबादत करके दुआएं मांगते हैं अल्लाह ताला उनकी दुआओं को कुबूल करता है। उन्होंने लोगों से अपील किया कि शबेबारात में कोई ऐसा काम न करें जो शरियत के खिलाफ हो। बच्चों को पटाखे न दिलाकर उन्हे नमाज पढ़ने, रोजा रखने की ताकीद करें और अपने को गुनाहों से बचायें। इसके लिये सबसे बेहतर तरीका यह है कि बुजुर्गो की मजार पर हाजिरी दें और कब्रिस्तान जाकर कुरान की तेलावत करके मगफेरत की दुआ, करें, क्योकि यही नबी की सुन्नत है। शहरकाजी ने बताया कि शबेबारात 11 मई को होगी। 

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