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शनिवार, 13 मई 2017

माया बनाम नसीम उद्दीन के घमासान से समर्थक मायूस

फतेहपुर, शमशाद खान । बहन मायावती के सबसे करीब रहे नसीम उद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से निकाले जाने से बसपा समर्थक मायूस है लेकिन मुस्लिम बसपाइयों में खास प्रतिक्रिया नही है। तमाम खुश भी है। लोगों ने पार्टी छोड़ने के प्रेस को आमंत्रित किया फिर स्थागित कर दिया। लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की जो दुर्दशा हुई है उससे कार्यकर्ता पहले ही मायूस थे लेकिन नसीम उद्दीन सिद्दीकी के हटाये जाने से एक खेमा नाराज है जब कि आज ने जो राय ली है उससे बसपाई मुस्लिम अधिकतर खुश नजर आये। लेकिन ये जो रिकार्डिग सामने आई है उससे बसपाई आहत हैं हार के जख्म में एक तरह से नमक हैं बसपा के मुस्लिम भाईचारा के जिला अध्यक्ष एवं सदस्य जिला पंचायत बैगांव के प्रतिनिधि मजहर सलमान पट्टी ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। कहा बहन जी से कोई फर्क नही पड़ता। जो बाहर किया जाता वह तमाम अनर्गल आरोप लगता ही हैं। पार्टी मजबूत होकर आगे सत्ता में आएगी। बसपा के वरिष्ठ नेता फरीद अहमद हथगाम ने नसीमुद्दीन  पर तल्ख होते हुए कहा कि चुनाव के पहले ही उन्हें हटा देना चाहिए था। सद्दिकी ने जिस मीटिंग का जिक्र किया है, उसमें वे खुद मौजूद थे। बहन जी मुस्लिम समाज के खिलाफ एक लफ्ज नहीं कहा था। बल्कि उन्होंने 1993 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा था कि जब मान्यवर ने उन्हे बिजनौर से लड़ने को कहा तो बहन जी पैसा और पहचान नहीं होने का हवाला देखरेख मना कर दिया। लेकिन बाद में मुस्लिमों पैसा और पार्टी का खर्च उठाकर जिताया। इसका हवाला दिया था और मुस्लिम समाज के प्रति एहसान जताया था। उन्होंने कहा कि नसीम उद्दीन ने आम मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने का कभी काम नहीं किया। कुछ चाटुकार ही साथ रहे। इतना ही नही मुसमानों को कई अवसरों पर नीचा भी दिखाया  गलत बयानी कर मुस्लिम समाज का अपमान किया है। पूरे तहसील में अभी तक किसी ने पार्टी छोड़ने का ऐलान नही किया। गुरूवार को कुछ मुस्लिमों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान तो किया लेकिन ऐन मौके पर प्रेस वार्ता स्थागित कर दी गई। इन सबके बीच कुद लोग पार्टी छोड़ने का मन बनाये हुए हैं एक मुस्लिम नेता का कहना था कि बसपा का दलित जिस तरह भाजपा में शिफ्ट हो रहा है उससे अकेले मुस्लिम कितना जोर लगाएंगे ये भी कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में इस घटनाक्रम का बुरा असर पड़ सकता है। अधिकतर मुस्लिम सपा और बसपा में गठबंधन की पैरवी करते नजर आये। बसपा से विधायक रहे मोहम्मद आसिफ ने किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। जिलाध्यक्ष सीताराम गौतम ने कहा कि बहन जी का निर्णय सर्वमान्य है। इस पर कोई प्रतिक्रिया नही हैं इतना सत्य कि पार्टी के सभी मुस्लिम नेता और कार्यकर्ता पार्टी के साथ है। किसी का अभीतक कोई विरोध उनके सामने नहीं आया है। सभी बहन जी के साथ है। 

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