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बुधवार, 10 मई 2017

किसकी है शरारत कहां करे इबादत

फतेहपुर, शमशाद खान । सूबे के मुखिया योगी आदितय नाथ ने जनहित मे अपना एक फरमान जारी करते हुए कहा है कि किसी भी जाति और धर्म के लोगों के साथ भेदभाव नही किया जायेगा तथा सभी की समस्याआंे का समाधान किया जायेगा। जनपद मे गाजीपुर थानाक्षेत्र के चुरियानी गांव समेत तीन ग्राम सभाओं मे मस्जिद नाम की कोई चीज नही है। चुरियानी गांव मे स्थित मदरसा और उसी आराजी पर बनी मस्जिद मे पिछले काफी समय से मुस्लिम समाज के लोग प्रत्येक दिन नमाज के अलावा ईद व बकरीद की नमाज अता करते चले आ रहे हैं लेकिन सत्ता परिवर्तन होते ही एक समुदाय के लोगों द्वारा मदरसे मे नमाज अता करने के नाम पर लाउडस्पीकर उतारने को लेकर हुए विवाद मे प्रशासन ने मामले को शांत करा दिया था कि मदरसा तालीम के लिए होता है नमाज अता करने के लिए नही किन्तु मदरसे के मुतवल्ली का कहना है कि उक्त आराजी पर मदरसा और मस्जिद दोनो हंै फिर नमाज अता करने पर किसी को एतराज नही होना चाहिए। लगभग तीन गांव के नब्बे घर के मुस्लिम समाज के लोगों को यह बात सता रही है कि आखिर कार पूर्व की भांति रमजान के पर्व पर अल्लाह की इबादत कहां करेगें।
जिले के गाजीपुर थाना क्षेत्र के चुरियानी गांव मे स्थित मदरसे एवं मस्जिद के मुतवल्ली महमूद हुसैन ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाते हुए बताया कि इस ग्रामसभा समेत तीन गांवों के मुस्लिम समाज के लोग पिछले कई वर्षों से मदरसे की आराजी पर बनी मस्जिद मे पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था मे नमाज अता करते हुए चले आ रहे हैं किन्तु सत्रह मार्च को गांव के कुछ लोगों के दबाव मे आकर जिला प्रशासन द्वारा लाउडस्पीकर उतरवा दिया गया तथा नमाज पढने पर रोंक लगा दी गयी है। मदरसे के मुतवल्ली ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि इस सम्बन्ध मे प्रशासनिक अधिकारियों से एक सुलहनामा तैयार कराया गया था जिसकी धारा (2) मे मस्जिद का नाम लिए बगैर यह कहा गया कि मदरसों मे केवल बच्चों को तालीम दी जायेगी इसके अलावा मदरसे मे कोई नमाज नही अता की जायेगी। मुतवल्ली ने अवगत कराते हुए कहा कि मस्जिद व मदरसा एक ही आराजी मे स्थित है एवं यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड मे मस्जिद वक्फ से पंजीकृत है एवं मस्जिद मे चलने वाला मदरसा सोसाइटी रजि0 एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत है। मुतवल्ली ने बताया कि मदरसे मे दीनी तालीम (शिक्षा) दिये जाने एवं नमाज पढ़ने से रोकने का अधिकार सरकारी तंत्र को प्राप्त नही है क्यों कि यह अधिकार भारत के संविधान के द्वारा दिया गया है जिसे राज्य सरकार या कोई सरकारी अधिकारी इसको बन्द नही करा सकता है। मुतवल्ली ने बताया कि किसी भी पांच लोगों द्वारा दिया गया कोई भी सुलहनामा संविधान के विरूद्ध है एवं कोई राज्यपत्रित अधिकारी न तो ऐसा करने पर किसी को विवश कर सकता है और न ही ऐसे सुलहनामें को मान्यता प्रदान कर सकता है। मुतवल्ली ने जिलाधिकारी से मांग करते हुए कहा है कि मुस्लिम समाज के लोगों को उपरोक्त स्थान पर पूर्व की भांति नमाज अता करने की अनुमति प्रदान की जाये। मुतवल्ली ने अपनी तथा अपने समाज की पीड़ा बताते हुए कहा कि यदि उनको न्याय नही मिला तो वह प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए न्याय की गुहार लगायेगे। 

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