AMJA BHARAT एक वेब न्‍यूज चैनल है जिसे कम्‍प्‍यूटर, लैपटाप, इन्‍टरनेट टीवी, मोबाइल फोन, टैबलेट इत्‍यादी पर देखा जा सकता है। पर्यावरण सुरक्षा के लिये कागज़ बचायें, समाचार वेब मीडिया पर पढें

बुधवार, 21 जून 2017

योग विद्या के साथ हो रहा है घोर अन्याय- पीयूष पंडित

दिल्ली  - विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य पर स्वर्ण भारत परिवार ने भी सभी लोगों को योगाभ्यास करवाया। जिसके तहत शहर, गांव के स्कूलों में स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत के लिए योग शिविर लगाये गये। स्वर्ण भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीयूष पंड़ित ने बताया कि ऋग्वेद में सबसे पहले योग का उल्लेख पाया जाता है।

योग का अर्थ होता है जोड़ना। जब योग को आध्यात्मिक घटना के तौर पर देखा जाता है तो योग का अर्थ है आत्मा का परमात्मा से जोड़। सरल शब्दों में कहा जाये तो, मनुष्य का ईश्वर से मेल। मानव मन को ईश्वर से जुडने के लिए मानसिक, आत्मिक और शारीरिक रूप से निरोगी होना होगा। उसमें कोई विकार न हो तो यह जोड़ जल्दी होगा, सरलता से होगा, अवश्यंभावी होगा। विकार युक्त मन से यह संभावना क्षीण हो जाएगी। ध्यान से पहले के सभी आसन और प्राणायाम आदि उसी विकार मुक्त मन को पाने की चेष्टा मात्र होते हैं। 

कभी-कभी लगता है कि योग विद्या के साथ घोर अन्याय हो रहा है क्योंकि योग के आठ अंगों मे से एक है आसन। जो पेट कम करने, वज़न कम करने, जोड़ो के दर्द से मुक्ति पाने का व्यायाम बनकर ही रह गया है। अथवा लोग इतना ही जानते हैं या फिर लोगों की रुचि और सुविधा के अनुसार इसे सीमित कर दिया गया है। जो भी हो, यह दोनों ही तरह से योग विद्या के साथ घोर अन्याय है।
हमें कोशिश करनी चाहिये कि योग को पूरी तरह से अपनायें जिससे योग का मूल रुप न खोये।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Advertisement

Advertisement

लोकप्रिय पोस्ट