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मंगलवार, 13 जून 2017

रोटी व मकान मांगने वाले गरीब को भेजा गया जेल

छः माह पूर्व अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे पीडितो की फाइल फोटो।
फतेहपुर, शमशाद खान । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता हासिल करने से पहले ही गरीब एवं दलितो को रोटी कपडा और मकान हर किसी को मुहैया कराने का वादा किया था लेकिन जनपद में एक गरीब व्यक्ति को अपनी व गांव वालों को सरकार की योजनाओ का लाभ दिलाने और अधिकारियो द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग उसे महगा पड गया। प्रधानमंत्री आवास व राशनकार्ड का लाभ पात्रो को दिलाये जाने यानि रोटी और मकान की मांग बीते कई महीनो से धरना प्रदर्शन एवं अनिश्चित कालीन धरना देकर शासन प्रशासन से मांग कर रहा था लेकिन गरीब पीडितो की आवाज भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियो के कानो तक नही पहुची बल्कि रोटी और मकान मांगने वाले गरीब व्यक्ति को संगीन धाराओं में जेल की सलाखो के पीछे भेज दिया गया। बताते चले की खखरेरू थाना क्षेत्र के जयराम नगर निवासी विनोद कुमार सोनकर के नेतृत्व में गरीब किसान मजदूर कल्याण समिति के बैनर तले खागा तहसील के कई गांव के पात्र व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना व राशनकार्ड जैसी मूल भूत समस्याओ को लेकर 2016 नवम्बर माह में नहर कालोनी परिसर में अनिश्चित कालीन धरना दिया था यह धरना दो माह तक अनवरत कडाके की ठण्ड में खुले आसमान के नीचे चला था। लेकिन इस दौरान भी पीडित ग्रामीणो ने सरकार की योजनाओ का लाभ लेने के लिये कई बार कलेक्ट्रेट पहुचकर जिलाधिकारी समेत सम्बन्धित विभागा अधिकारियो से मिलकर न्याय की गुहार लगायी थी। इसके बावजूद भी प्रशासन के अधिकारियो ने आश्वासन देकर कई बार वापस कर दिया। लेकिन अब तक उनकी एक भी मागे पूरी नही हो सकी। जिसको लेकर एक बार फिर 12 जून को एक दर्जन से अधिक पीडित लोगो के साथ विनोद कुमार सोनकर ने जिलाधिकारी के समक्ष पहुचकर प्रधानमंत्री आवास योजना व राशनकार्ड समेत ग्रामसभा में विकास के नाम पर अधिकारियो की मिली भगत से हो रहे भ्रष्टाचार की जांच कराकर पात्र व्यक्तियो को सरकार की योजनाओ का लाभ दिलाये जाने की मांग किया था। जिलाधिकारी से मिलने के बाद विनोद कुमार विकास भवन स्थित कार्यालय में योजनाओ सम्बन्धित जानकारी लेने के लिये परियोजना निदेशक अशोक कुमार निगम के पास पहुचे जहा पर पीडी व पीडित के बीच तू-तू मै-मै शुरू हो गयी जिस पर आरोप है कि विनोद कुमार सोनकर ने परियोजना निदेशक को थप्पड जड दिया। जिसके बाद विकास भवन के कर्मचारियों ने पीडित श्री सोनकर पर हल्ला बोलते हुये जमकर उसकी लात घूसो से पिटाई कर दी थी। जिसके बाद कचेहरी चैकी इन्चार्ज मौके पर पहुचे और आरोपी विनोद कुमार को गिरफ्तार कर थाने ले गये। अधिकारी के तहरीर पर आरोपी के खिलाफ संगीन धाराओ पर मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेज दिया। सवाल यह उठता है कि सरकार के बैठे नुमाइदे अगर इन गरीबो की उस वक्त समस्याये सुनकर उसका समय रहते निस्तारण कर देते तो शायद आज प्रशासन से उपेक्षित होकर विनोद कुमार अधिकारी पर इस तरह से हाथ न उठाता और न ही उसे जेल की सलाखो के पीछे जाना पडता यह घटना कही न कही प्रशासन की बहुत बडी चूक को उजागर करती है। इसके बावजूद भी आज आरोपी द्वारा परियोजना निदेशक को थप्पड मारे जाने को लेकर विकास भवन के सारे अधिकारी व कर्मचारी लामबंद होकर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तथा गैगेस्टर की कार्यवाही की मांग को लेकर धरने पर बैठ गये है जिससे मोटा वेतन पाने वाले अधिकारी कलम बन्द कर धरने पर बैठ गये है जिससे जहा सरकार के खजाने पर प्रतिदिन लाखो रूपयो का बोझ पड रहा है। तो वही दूर दराज से अपने कार्यो से आने वाली आम जनता भी परेशान हो रही है। अधिकारी तो एक थप्पड को लेकर सरकार को घाटे में ले जाने के लिये धरने पर बैठ गये है लेकिन अधिकारियों ने उस वक्त अपनी आंख नही खोली थी जब आधा सैकडा से अधिक गरीब परिवार के पीडित लोग सरकार की योजनाओ के लाभ के लिये दो माह तक खुले आसमान के नीचे कडाके की ठण्ड मे अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे थे। जब अधिकारी को मारने की बात आयी तो सभी अधिकारी लामबंद हो गये और गरीब पीडित को एक थप्पड मारने की सजा ने उसे जेल तक पहुचा दिया। लेकिन पुलिस ने भी अधिकारियो को खुश करने के लिये अपना रंग दिखाया एक थप्पड की वजह से उसे संगीन धराओ में उसे जेल भेज दिया गया। लेकिन पुलिस की मौजूदगी में आरोपी विनोद कुमार की पिटाई करने वाले सैकडो कर्मचारियो पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नही कि गयी। पुलिस को शायद यह नही दिखा इसी के चलते एक भी कर्मचारी के खिलाफ आरोपी को मारने पीटने की कार्रवाई नही की गयी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता हासिल करने से पहले ही गरीब जनता से वादा किया था की बिना भ्रष्टाचार के गरीब, किसान, मजदूरों को सरकार की योजनाओ का लाभ पात्रता के आधार पर दिये जाने का वादा किया था। लेकिन इनका यह वादा हवा-हवाई ही साबित हो रहा है। पीडित ग्रामीणो ने सिर्फ रोटी के लिये राशनकार्ड व सर छुपाने के लिये छत पात्रता के आधार पर मागने का काम किया था। जिसके बदले मे उन्हे मकान व रोटी तो नही मिली बल्कि सरकार के नुमाइदो ने उन्हे जेल के सलाखो के पीछे भेजने का काम जरूर कर दिया। जिससे गरीब की आवाज हमेशा-हमेशा के लिये दबाई जा सके। 

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