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शनिवार, 9 सितंबर 2017

झण्डा गीत रचयिता का धूम-धाम से मनाया गया जन्मदिवस

फतेहपुर, शमशाद खान । झण्डा गीत के रचयिता पद्म श्याम लाल गुप्त पार्षद जी का 129वा जन्मदिवस श्री दोसर वैश्य कल्याण समिति द्वारा धूमधाम से पार्षद चैके में मनाया गया। जिसमे समाज के लोगो ने बढ-चढ कर सहभागिता निभायी लोगो ने पार्षद जी के कर्तव्य व व्यक्तित्व पद प्रकाश डालते हुये उनके आदर्शो पर चलने का संकल्प दोहराया। 
शनिवार को कार्यक्रम का शुभारम्भ पार्षद जी की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ हुआ लोगो ने बारी-बारी से मूर्ति पर टीका व माला पहनाकर उनको नमन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये समिति के अध्यक्ष डा0 निवास गुप्त ने कहा कि पार्षद जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र के लिये समर्पित करते हुये देश सेवा की उनका देश प्रेम भुलाया नही जा सकता है। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के प्रदेश महासचिव विनोद कुमार गुप्त ने कहा कि पार्षद जी ने अपनी रचनाओ के माध्यम से क्रान्तकारियों में जोश बढाया स्वतंत्रता का विगुल फूका देश को फिरगियों से आजादी दिलाने में उनकी बहुत बडी भूमिका रही। उनका झण्डागीत विजयी विश्व तिरंगा प्यार देश की धरोहर है। ऐसे महापुरूष की कर्म भूमि फतेहपुर होने पर जनपद वासी गौरान्वित है। गुप्त ने कहा कि पार्षद जी का चिन्तन सदैव सामाजिक एवं राष्ट्रीयता का रहा जिस कारण देश के राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा द्वारा 8 मार्च 1996 को उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया। समिति के संरक्षक रामविशाल गुप्त ने कहा कि दोसर वैश्य समाज के रत्न महान समाजसेवी एवं स्वतत्रता सग्राम सेनानी पार्षद जी का जन्म 9 सितम्बर 1896 को कानपुर जनपद के नरवल ग्राम में हुआ था। इस महापुरूष ने 4 मार्च 1924 को स्व0 गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रेरणा से काग्रेस के बम्बई अधिवेशन में झण्डा गीत का प्रथम गायन किया था। वे राष्ट्र भाषा हिन्दी के अमर सपूत एवं ओजस्वी कवि थे। उन्होने 1916 से 1946 तक स्वधीनता आन्दोलन, विशेषकर नमक आन्दोलन, अग्रेज भारत छोडो आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभायी। कार्यक्रम में ध्वनिमत से एक प्रस्ताव पारित किया गया कि जिला कारागार में वैरक न0 9 को पार्षद जी की स्मृति में पार्षद वैरक किया जाये। तथा मुख्य द्वार मे शिला पट् उनके नाम का लगाया जाये। इस मौके पर जयगोपाल गुप्त, सुनील गुप्त, अमित शरन बाबी, राकेश गुप्त, ओमप्रकाश गुप्त, श्याम निवास गुप्त, रामस्वरूप गुप्त, गिरधारी लाल, रामप्रकाश गुप्त, ब्रज मोहन गुप्त आदि मौजूद रहे। 

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