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शनिवार, 30 दिसंबर 2017

"समर्पण से संघर्ष तक समाजवादी योद्धा शिवपाल सिंह यादव "

अरविन्द विद्रोही 

संयमित, धैर्यवान, रिश्तों का निर्वाहन करने वाले किसी व्यक्ति को छलना नही चाहिए । रिश्तों का निर्वाहन करने वाले व्यक्ति का जब ह्रदय चोटिल होता है ,उसके विश्वास को आघात लगता है तब उसका मौन साधना उसकी कमजोरी नही होती । संयमित ,धैर्यवान ,रिश्तों का  निर्वाहन करने वाला व्यक्ति  जब भी अपने  साथ हुए विश्वासघात ,अन्याय ,धोखे के विरुद्ध खड़ा हो तब उसका साथ पूर्ण मनोयोग और ताकत से देना चाहिए।  

दरअसल बीते 2015 दिसम्बर (अंतिम सप्ताह )से ही समाजवादी पार्टी की आंतरिक राजनीति में बेवफाई,षड्यंत्र,विश्वासघात , कब्जेदारी ,घात - प्रतिघात ,मान मनौवल्ल का अनूठा खेल शुरू हुआ था जिसकी परिणीति अब तलक नही हुई है । विगत वर्ष 2016 में दिसम्बर अंतिम सप्ताह से जनवरी द्वितीय पखवारे तक  में चले समाजवादी पार्टी का आंतरिक रंगमंचीय सरीखा द्वन्द कोई भी भुला नही है । कांग्रेस से दोस्ताना कायम करके सपा पर एकाधिकार कायम करने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को यह विश्वास था कि वे अपने विकास कार्यों और चेहरे के बलबूते उप्र की सत्ता में दुबारा वापसी करेंगे ।सच तो यह था कि उनका यह विश्वास सत्यता की धरातल से कोसों दूर था लेकिन उनके अधिकांश दरबारियों , भाट - चारण प्रवृत्ति के चापलूसों - चमचों ने उनको प्रशंसा के गीत गा सुनाकर सत्य सुनने की आदत से पृथक कर दिया था । चापलूसी की चासनी में डूबे हुए पुनः सरकार बनाने की पंक्तियों - लेखों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मंत्रमुग्ध - आत्ममुग्ध कर दिया था । संगठन के निर्माता मुलायम सिंह यादव और संगठन ही नही बल्कि मुलायम सिंह यादव की भी रीढ़ की हड्डी शिवपाल सिंह यादव को संगठन में अपदस्थ - उपेक्षित  करने का खामियाजा उप्र चुनाव 2017 में समाजवादी पार्टी को भोगना पड़ा और अखिलेश यादव सत्ता से विमुख हो गए । उप्र की आम जनता ने अखिलेश यादव को ही मुख्यमंत्री पद से अपदस्थ कर दिया और यह साबित कर दिया कि उप्र का आम जनमानस पारिवारिक -सांस्कारिक मूल्यों एवं भावनाओं को अंगीकार करने वाला है ।  

उन असहज विपरीत राजनैतिक परिवेश - परिस्थिति  में भी शिवपाल सिंह यादव पूरी निष्ठा, समर्पण भाव से अपने अग्रज मुलायम सिंह यादव के साथ दृढ़ता पूर्वक खड़े रहे  । बकौल शिवपाल सिंह यादव वे नेता जी के प्रत्येक आदेश को मानते रहे हैं , मानते हैं और मानेंगे । उनकी सिर्फ यह इच्छा रही  कि उनके अग्रज ,उनके नेता मुलायम सिंह यादव सहित पुराने सभी साथियों की राजनैतिक मान सम्मान ,पद प्रतिष्ठा की पुनः वापसी हो । राजनीति कोई एक दिन का खेल या मनोरंजन तो है नही यह एक सतत् प्रक्रिया है जो अनवरत् चलती रहती है । अग्रज मुलायम सिंह यादव के प्रत्येक दिशा निर्देश - आदेशों को बाल्य अवस्था से लेकर अब तलक बगैर कोई प्रश्न किये स्वीकारने और उसको पूरा करने में अपना सर्वस्व झोंक देने वाले शिवपाल सिंह यादव ने डॉ लोहिया के संकल्पों - सिद्धांतों की ध्वजपताका थामकर अपने राजनैतिक जीवन संघर्ष की राह पर चलना बदस्तूर जारी रखा है । यह सभी जानते हैं कि समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनैतिक मुकामों की जोखिम उठाकर अपने एवं अपने साथियों के संघर्ष के दम पर अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए हासिल किया था । मुलायम सिंह यादव के जीवन पर्यन्त की संघर्ष यात्राओं में उनके साये की तरह चलते रहने वाले ,हर मुश्किल घड़ी में उनका साथ निभाने वाले शिवपाल सिंह यादव ने एक आज्ञाकारी कार्यकर्ता ,एक निष्ठावान - समर्पित अनुज का दायित्व निर्वाहन करते हुए मुलायम सिंह यादव का सम्पूर्ण जीवन साथ दिया और आज की तारीख में भी जब मुलायम सिंह यादव खुद के बनाये राजनैतिक दल समाजवादी पार्टी में ही नेपथ्य में ढ़केल दिए गए हैं ,हाशिये पर कर दिए गए हैं ,गाहे - बगाहे पूछ लिए जाते हैं तब भी शिवपाल सिंह यादव उनके ही साथ उनके निर्देशों - आदेशों का पालन करते दिख रहे हैं ।लेकिन आखिर कब तलक शिवपाल सिंह यादव राजनैतिक संग़ठन में नेपथ्य में रहें ??  


मुलायम सिंह यादव के लिए सदैव एक ढाल की तरह ,एक कवच की तरह बने रहने वाले उनके अनुज शिवपाल सिंह यादव के व्यक्तित्व की एक असाधारण बात उनके चेहरे पर तैरती मुस्कान और उनका मिलनसारिता पूर्ण व्यवहार है । लोगों से प्रेमपूर्वक आत्मीय अंदाज में शिवपाल सिंह यादव के मिलने का परिणाम यह होता है कि मिलने वाला अपना दुःख भूल जाता है ,उसका दर्द कम होता है । शिवपाल सिंह यादव न सिर्फ लोगों से प्रेमपूर्वक मुलाकात करते हैं बल्कि उनके द्वारा दिए गए प्रार्थनापत्रों पर तत्काल यथायोग्य समुचित कार्यवाही भी करने में तनिक देर नही करते । शिवपाल सिंह यादव के इसी विशेष गुण के कारण उनके मंत्रीत्वकाल में पत्रकारिता जगत ने उन्हें कार्यवाही मंत्री की उपाधि से नवाज दिया था । 

सैफई के लाल शिवपाल सिंह यादव आज की तारीख में किसी परिचय के मोहताज़ नही हैं । उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के सैफई गाँव में माता श्रीमती मूर्ति देवी और पिता श्री सुघर सिंह के पुत्र के रूप में वर्ष 1955 में बसन्त पंचमी के दिन जन्में शिवपाल सिंह यादव ने अपना सम्पूर्ण जीवन अपने अग्रज समाजवादी दिग्गज मुलायम सिंह यादव के आदेशों के आज्ञापालन में होम कर दिया है । मेरा स्पष्ट मानना है कि शिवपाल सिंह यादव  धैर्य की प्रतिमूर्ति हैं । गज़ब की सहनशीलता वाले व्यक्तित्व के स्वामी सैफई के लाल शिवपाल सिंह यादव अपनी स्वभावगत खूबियों संयम ,संघर्ष ,समर्पण के ही कारण उप्र की राजनीति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचेंगे । इन स्थितियों में भी श्री शिवपाल जी के चेहरे पर व्याप्त सहज मुस्कान से हमें शिक्षा लेनी चाहिए । हमें सीखना चाहिए अपने अगुआ से कि कैसे विषम परिस्थितियों में भी सहज भाव से आगे बढ़ने का मार्ग तय किया जाये ? आत्मीयता और विश्वास पूर्ण शब्दों में जब श्री शिवपाल यादव अपने मिलने वालों से ,अपने शुभचिंतकों से कहते हैं कि बताओ ,,क्या कोई सलाह है । तो मैंने बारम्बार देखा है ,महसूस किया है कि शुभचिंतकों ,साथियों के हौसले बढ़ जाते हैं और उनका पूछना स्वयं में यह सिद्ध करता कि शिवपाल यादव एक सच्चे समाजवादी और लोकतान्त्रिक व्यवस्था के वाहक हैं । डॉ लोहिया-चौधरी चरण सिंह -,जेपी  के विचारों के असल ध्वजवाहक शिवपाल सिंह यादव ही साबित होंगे ऐसा मुझे विश्वास है ।

अधिकतर   लोगों का यह मानना है कि श्री शिवपाल सिंह यादव अब राजनैतिक संकट में फंस चुके हैं । राजनैतिक दुरभिसंधियों - षडयंत्रों के मध्य राजनैतिक तौर पर अधिकतर लोगों की दृष्टि में कमजोर हो चुके श्री शिवपाल सिंह यादव के पास आज सच पूछिए तो  खोने को कुछ भी नही है । उनके पास शेष है तो उनका आत्मबल ,उनकी अपनी सांगठनिक योग्यता ,उनके अपने लोग .... जिनको ताजिंदगी ,अपने अब तलक के राजनैतिक सफर में श्री शिवपाल यादव अपना समझते ,मानते थे उनका उनके प्रति किया हुआ कृत्य अब सभी के सम्मुख आ ही गया है ।श्री शिवपाल यादव के ,उनके शेष बचे संघर्ष के साथियों के सम्मुख चुनौती है अपने दम पर राजनैतिक निर्णय लेने और राजनैतिक पथ पर अग्रसर होने की । विधानसभा चुनाव 2017 चुनाव नतीजों आने के बाद सपा की करारी पराजय के बावजूद समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव ने जनता की समस्याओं के लिए संघर्ष करना रोका नही है । आम जनता,अपने समर्थकों के खिलाफ प्रशासनिक दमन-जुल्म के विरुद्ध शिवपाल सिंह यादव धरना-प्रदर्शन लगातार करते रहते हैं । सरकार को सदन में घेरने वाले - मंत्रियों को निरुत्तर करने वाले शिवपाल सिंह यादव पूरे उत्तर प्रदेश के जनपदों का भ्रमण भी अनवरत कर ही रहे हैं । 


अब नूतन चुनौतियाँ हैं सम्मुख तो प्रगति के पथ पर बढ़ने का अवसर और संभावना भी मौजूद है ।परखना है खुद की ताकत को भी उन्हें ,साबित करना पड़ेगा अपनी सांगठनिक योग्यता ,वैचारिक दृढ़ता और जनाधार को । राजनैतिक परिस्थितियां सदैव एक सी नही रहती हैं यह सर्वविदित है ।

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