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रविवार, 31 दिसंबर 2017

कुटीर उद्योग को खा रही आधुनिकता

फतेहपुर, शमशाद खान । आधुनिकता हर क्षेत्र में हावी होती जा रही है। जिसके चलते बेरोजगारी में और बढ़ोत्तरी हो रही है। हर औजार रेडीमेड बाजार में उपलब्ध है। यही वजह है कि कुटीर उद्योग के रूप में औजार तैयार कर बाजार में बेंचने वाले हाथों के कारीगर बेकार होते जा रहे हैं। इस बेकारी में वह लोग शामिल हैं जो कड़ी मेहनत कर लोहे को आकार देकर अपना पेट पालते थे। बताते चलें कि इस पेशे से जुड़े लोग बड़ी ही तल्लीनता के साथ लोहे को गर्म कर फिर उसको पीट-पीट कर आकार देकर छेनी, खुरपी, हसियां, पकड़ आदि औजार तैयार कर अपने परिवार का पेट पालते थे। लेकिन इस क्षेत्र में भी आधुनिकता हावी हो गयी। उक्त औजार कम्पनी मेड़ बाजार में आ गये हैं। जिसके चलते लोहे को आकार देने वाले बेकार होते जा रहे हैं। पहले विभिन्न स्थानों पर रोड के किनारे इन्हें औजार बनाते देखा जाता था। लेकिन लोहा लेकर औजार बनवाने वाले लोगों की कमी के चलते इनके इस पेशे पर सीधा असर पड़ा। जिसके चलते लोहे को आकार देने वाले दूसरे व्यवसायों से जुड़ गये। अब न के बराबर ही इस पेशे से जुड़े लोग रह गये हैं। पटेलनगर-शादीपुर रोड किनारे लाल अंगारों में लोहे को गर्म कर छेनी बना रहे कारीगरों ने बताया कि रेडीमेड औजार बाजार में उपलब्ध होने के कारण उनके इस व्यवसाय पर फर्क पड़ा है। लेकिन कुछ लोग अभी भी हांथों से बनाये गये औजारों को पसंद करते हैं। जिससे उनकी रोजी-रोटी चल रही है।

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