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शुक्रवार, 18 मई 2018

दलित की भूमि पर फर्जी वसीयत कराने का मामला सीएम के दरबार में पहुंचा

फतेहपुर, शमशाद खान । यह कैसी बेखुदी की खुल के न रो सके हम, चुभते ही रहें कांटे आंसू न निकल पाये। यह शेर उस नेत्रहीन  दलित व्यक्ति की लाचारी पर इशारा कर रहा है। जिसके सजातीय द्वारा वरासतन दी गयी भूमि पर ग्राम पंचायत के दबंग पूर्व प्रधान राजेन्द्र प्रसाद यादव द्वारा फर्जी तौर पर सादे कागज में वसीयत लिखकर चकबंदी अधिकारियों से सांठगांठ कर न सिर्फ अपने नाम इंद्राज करा लिया। बल्कि दलित की काबिज दाखिल भूमि पर कब्जा करने के उद्देश्य से न सिर्फ उसे जान माल की धमकी देकर भयभीत कर रहा है। बल्कि तरह तरह के हथकंडे अपना कर मानसिक उत्पीड़न भी कर रहा है। जिसकी शिकायत जिलाधिकारी से लेकर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार तक मामला पहुंच चुका है। जिसकी बिंदुवार न सिर्फ जांच के आदेश हुये हैं। बल्कि दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश दिये गये हैं। ज्ञातव्य हो कि सदर तहसील के हुसैनगंज थाना क्षेत्र के गांव सेमरहटा मजरे हाजीपुर गंग निवासी दुलारे उर्फ रामदुलारे पुत्र दुर्जा जो बेऔलाद होने के चलते अपने ही गांव के सजातीय रामविशाल पुत्र सुखदेव को बचपन में ही दिल्ली ले जाकर न सिर्फ  शिक्षा ग्रहण कराया। बल्कि पिता का नाम भी सरकारी अभिलेखों में दर्जा कराया। जिसके उपरांत जिंदगी के आखरी पड़ाव में पहुंचने की दशा पर दुलारे उर्फ राम दुलारे ने गांव में ही अपने लोगों के बीच रामविशाल को अपनी चल अचल संपत्ति का वारिस घोषित करते हुये एक लिखित वरासत भी किया। जिसके बाद रामविशाल उक्त भूमि पर काबिज, दाखिल हुआ और दुलारे उर्फ रामदुलारे की मौत के बाद पिता की तरह ही रामविशाल ने उसका अंतिम संस्कार भी किया। वहीं ग्राम पंचायत सेमरहटा के झलहा निवासी पूर्व प्रधान पति राजेन्द्र प्रसाद पुत्र सुंदरलाल यादव कुछ गांव के फरेबी और जालसाज लोगों को अपने धनबल के चलते एक सादे कागज में फर्जी तौर पर वसीयत बनवाई। जिसके लेखक सत्यनारायण पुत्र महावीर साहू व गवाह के रूप में बोधीलाल पुत्र माधव तथा रामविशाल पुत्र शंकर सभी निवासीगण सेमरहटा को शामिल कर राजस्व कर्मियों से बड़ी सांठगांठ कर रामविशाल की भूमि को वरासत कराकर अपने नाम सरकारी कागजातों में दर्ज करा लिया। बड़ी विडम्बना है कि न तो दलित की भूमि का कोई अन्य जाति के लोग बैनामा करा सकते हैं और न ही वरासत इसके लिये पहले जिलाधिकारी से अनुमति ली जाती है। जबकि पूर्व प्रधान राजेन्द्र यादव द्वारा न तो अनुमति ली गयी और न ही रजिस्टर्ड वसीयत करायी गयी।  बल्कि धन के बल पर अधिकारियों से सांठगांठ कर सरकारी अभिलेखों में फर्जी वसीयत को जायज बनाकर दर्ज करा लिया। पीड़ित नेत्रहीन रामविशाल अपनी पत्नी के संग जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के साथ साथ एक जनप्रतिनिधि के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह को भी शिकायती पत्र भेजकर न सिर्फ दोषियों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है। बल्कि अपनी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने की नियत रखने वाले पूर्व प्रधान राजेन्द्र प्रसाद यादव को रोके जाने की भी मांग की है। बताया जाता है कि जनपद के जनप्रतिनिधि की पहल पर मुख्यमंत्री को भेजी गयी शिकायत में बड़ी कार्यवाही के संकेत दिये गये हैं। जिससे जहां दबंग पूर्व प्रधान पर कार्यवाही होना तय है। वहीं फर्जी  वसीयत के लेखक और गवाहानों की गर्दनों में कानूनी चाबुक चलना तय है।

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