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मंगलवार, 12 जून 2018

मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता को हर कीमत पर चाहते हैं - अखिलेश यादव

अरविन्द विद्रोही 


 
लखनऊ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ( पूर्व मुख्यमंत्री - उप्र ) के हालिया राजनैतिक बयानों और कृत्यों ने उनके राजनैतिक सोच और संकल्प को स्पष्ट कर दिया है । जब राजनैतिक दल और नेतृत्व की सोच , सिद्धांत और संकल्प स्पष्ट होता है तब उस सोच, सिद्धांत और संकल्प के क्रियान्वयन - अनुपालन के लिए कार्यकर्ता को कोई दुविधा नही रहती है । 


केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के 4 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं और उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की ही योगी आदित्यनाथ की सरकार को 1 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं । आम लोकसभा चुनाव 2019 की राजनैतिक युद्ध की रणभूमि की तैयारियाँ प्रारम्भ हो चुकी हैं । बयानों, भाषण देने की अद्भुत कला कौशल, स्व महिमा मंडन के लिए नरेंद्र मोदी - प्रधानमंत्री भारत सरकार का कोई मुकाबला ही नही है । 2014 के लोकसभा आम चुनावों में आम जनता से नरेंद्र मोदी द्वारा किये गए चुनावी वायदे आज उनके ही सम्मुख चुनौती साबित हो सकते हैं । 2019 के चुनाव में एक बड़ा मुकाबला मोदी बनाम मोदी भी हो सकता है । 2019 के चुनाव रणभूमि में मोदी के लिए सबसे बड़ी दो चुनौती सामने विकराल रूप में खड़ी है - पहला खुद 2014 के पहले के नरेंद्र मोदी और खुद उनके वायदे, इरादे जिनकी पूर्ति के बगैर उनका ही समर्थक उनके खिलाफ मुखरित हो चुका है और बदलती राजनैतिक परिस्थितियों में उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ......... 

यहाँ यह सवाल पूर्णतः वाजिब है कि आखिर मैंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती अखिलेश यादव को क्यों माना और लिखा । जैसा कि मैंने शुरुआत की पंक्तियों में ही वर्णित किया कि " समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ( पूर्व मुख्यमंत्री - उप्र ) के हालिया राजनैतिक बयानों और कृत्यों ने उनके राजनैतिक सोच और संकल्प को स्पष्ट कर दिया है ।" अब तनिक अखिलेश यादव की स्पष्ट राजनैतिक सोच और संकल्प को भी समझिए और समझ मे आये तो खुले हृदय से यह स्वीकारने में तनिक भी संकोच एवं लेश मात्र की देर मत करियेगा कि वास्तविकता - व्यवहार में सपा मुखिया अखिलेश यादव ही नरेंद्र मोदी के सम्मुख सबसे बड़ी राजनैतिक चुनौती हैं । अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंच से बड़ी हिम्मत और बेबाकी से बोला है कि वे मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता को हर कीमत पर चाहते हैं।  यहाँ तक कि लोकसभा सीटों के बँटवारे पर भी बड़े लक्ष्य पूर्ति हेतु अखिलेश यादव बहुजन समाज पार्टी को खुले मंच से यह आश्वस्त करते दिखे कि आपसी गठबंधन में वे खुद की पार्टी के लिए कम सीट लेकर भी मोदी विपक्ष की एकता - गठबंधन को व्यवहारिक मूर्त स्वरूप देना चाहते हैं । आखिर सीटों सम्बंधित अखिलेश यादव के इस वर्तमान बयान के क्या निहितार्थ हो सकते हैं ? दरअसल अखिलेश यादव ने पक्का मन बना लिया है कि वे विपक्षी एकता को हर सम्भव प्रयास करके कायम करेंगे । अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं - समर्थकों समेत आम जन को यह स्पष्ट सन्देश दिया है कि वे निर्णायक और असरदार भूमिका का निर्वाहन करने के दुष्कर पथ पर चल पड़े हैं ।  उप्र के उपचुनावों में अखिलेश यादव की ही स्वार्जित उपलब्धि रही कि उन्होंने बसपा सुप्रीमों मायावती का समर्थन हासिल किया और जीत हासिल की । #मंगलनामा 

अखिलेश यादव की मंशा स्पष्ट है ,सोच उन्होंने सार्वजनिक कर दी है । मोदी विरोध के स्वर की गूँज को गम्भीर बनाने और उसको आमजन का विरोधी स्वर बनाकर लोकसभा 2019 के आम चुनाव में मोदी नेतृत्व वाली भाजपा नीत गठबंधन को परास्त करने के लिए एक विशाल हृदय वाले नेतृत्व की आवश्यकता विपक्ष को है और इस कसौटी पर  सपा मुखिया अखिलेश यादव ही खरे उतरते हैं । वर्तमान विपक्ष में पूर्व मुख्यमंत्री उप्र अखिलेश यादव से योग्य - सरल नेता कोई भी नही है । वर्तमान समय में उनके राजनैतिक बयान, प्रयास और गठबंधन को लेकर कार्य बेहतरीन हैं । #मंगलनामा 

भाजपा नीत गठबंधन के विपक्ष में ईमानदार कोशिश कर रहे हैं सपा मुखिया अखिलेश यादव । अन्य प्रदेशों की बात और राजनीति -रणनीति की चर्चा अगले विमर्श में करेंगे अभी उप्र के परिप्रेक्ष्य में दृष्टि दौड़ाइये तो बिखरे विपक्ष के तमाम पुष्पों को भाजपा मोदी-योगी सरकार विरोध की एक माला में पिरोने का महत्वपूर्ण कार्य अखिलेश यादव ही कर रहे हैं । उप्र की वर्तमान राजनीति में विपक्ष का सौम्य, सरल,मिलनसार छवि वाला एकमात्र चेहरा अखिलेश यादव हैं इससे कौन इंकार कर सकता है ? विगत विधानसभा आम चुनाव 2017 में अखिलेश यादव ने तत्कालीन काँग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ( वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष काँग्रेस )  के साथ को स्वीकारा था और परिवार-पार्टी में भारी विरोध के बावजूद काँग्रेस के लिए 105 सीट छोड़ दी थी । राजनैतिक मित्रता और वायदा निभाने में सपा मुखिया अखिलेश यादव अव्वल हैं । वही दूसरी तरफ  राहुल गाँधी ( राष्ट्रीय अध्यक्ष - कांग्रेस )  अपने अहम और वहम के शिकार हैं । न सिर्फ राहुल गाँधी ही वरन भाजपा - मोदी विरोध के तमाम नेता अपने अपने स्वार्थ ,अहम और वहम में आकंठ तक डूबे हुए हैं । अखिलेश यादव की एक और खासियत है कि  जोखिम लेकर भी वे अपने तयशुदा लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहने की कोशिश करने में कोई संकोच नही करते । आज दृढ़ता पूर्वक विपक्षी एकता -गठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए लोकसभा चुनाव सीटों के बंटवारे में जो सहयोगियों को संतुष्ट करने की एक सार्थक सोचयुक्त बयान अखिलेश यादव ने दिया है उसको उनकी कमजोरी या व्यक्तिगत समर्पण कदापि नही समझना चाहिए । बल्कि भाजपा - मोदी विरोधी गठबंधन में शामिल होने वाले सभी नेताओं को सीटों के मुद्दे पर हृदय को संकुचित न करके विशाल करना ही पड़ेगा क्योंकि भाजपा नीत गठबंधन से मुकाबला कोई आसान नही । और जैसा कि अगुआई करने वाला शख्स पहले उदाहरण प्रस्तुत करता है, खुद पहला कदम बढ़ाता है ठीक उसी प्रकार लोकसभा सीट बंटवारे में एक ईमानदार, संकल्पित, दृढ़ सोच युक्त बयान रूपी कदम सपा अध्यक्ष उठा ही चुके हैं । अब शेष विपक्षी दलों को भी गठबंधन के मूर्त स्वरूप के निर्माण हेतु अपना अपना हठी रुख त्यागकर एक संयुक्त निर्णायक राजनैतिक युद्ध भूमि की तरफ कूच करना चाहिए । #मंगलनामा 

और अंततः आज के पहले इस #मंगलनामा मे अंतिम बात .... अपने बगिया को सँवारने -संभालने ,उसको पुष्प पल्लवित करने का कार्य जिस प्रकार कोई व्यक्ति खुद  मेहनत करके ,,उपाय लगाकर करता है ठीक उसी प्रकार राजनीति के बगिया को हरा भरा ,पुष्प पल्लवित करने के प्रयास में अखिलेश यादव जुटे हुए हैं । जिस प्रकार बगिया से खर पतवार को निकालना, हटाना, गुड़ाई करना, नए नए पौधों को रोपना, पुराने पौधों को खाद पानी देकर उनकी जीवंतता बरकरार रखना बगिया के स्वामी - माली का कार्य होता है ठीक उसी प्रकार राजनीतिक बगिया की भी देखभाल और रखरखाव करना पड़ता है । अक्सर किसी आँधी तूफान या विपरीत मौसम - परिस्थिति के चलते बगिया उजड़ जाती ,खूबसूरती बिगड़ जाती लेकिन उस बगिया को सँवारने, पुनः सुगन्धित - मनमोहक पुष्पों से गुलजार करने के प्रयास में बगिया स्वामी - माली जुट ही जाता है । आज यह लिखना पड़ रहा है कि अखिलेश यादव आँधी तूफान गुजरने के बाद से निरंतर अपनी बगिया को सँवारने - सँजोने में ईमानदारी से लगे हुए हैं। 

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