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मंगलवार, 26 जून 2018

मरीजों को मिल रहा पौष्टिक विहीन भोजन

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता - देश में मजबूरो, गरीबो, असहायो के साथ हर वर्ग के उत्थान तथा उनकी भलाई के लिए योजनाये तो बनती है लेकिन सरकारों की अनदेखी और सम्बन्धित योजनाओं को क्रियान्वयन कराने वाले अधिकारियों की लापरवाही से योजनाओ का लाभ लोगो तक नही पहुंच पाता। विभागीय अधिकारियो और कर्मचारियों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता इतनी चरम पर है कि यह लोग लोगो के निवाले तक पर डांका डालने से नही हिचकिचाते है और यही हाल शहर के सरकारी अस्पतालों में देखा जा सकता है। जेएसवीएम मेडिकल काॅलेज के हैलट तथा अन्य सम्बद्ध अस्पतालों में मरीजों के साथ भोजन के नाम पर सिर्फ मजाक ही किया जा रहा है। इन अस्पतालो में बेडो की संख्या डेढ हजार से अधिक है। सूत्रो की माने तो इन अस्पातलो में 90 प्रतिशत बेड हमेशा भरे रहते है, लेकिन यहां जो मरीज भर्ती होते है खाने को लेकर उनके साथ अस्पताल प्रबंधन द्वारा भद्दा मजाक किया जाता है। मरीजो को मिलने वाले हाईप्रोटीन डाइट के स्थान पर उन्हे पानी जैसी दाल, सब्जी और रोटी दी जाती है, जवाबदेह बजट का रोना रोकर अपना बचाव करते नजर आते है, अधिकारी ध्यान नही देते और सरकार को सब ठीक-ठाक दिखायी देता है लेकिन इसबीच सजा भुगत रहे ऐसे अस्पतालों में मरीजो की हालत बदतर हो चली है, कई खाना नही लेते और कई मजबूरी और पेट के कारण चुपचाप खाना खा लेते है। 
          जीएसवीएम मेडडिकल कालेज के एलएलआर एवं संबद्ध अस्पतालों में आंकडे के अनुसार बेडों की संख्या 1643 है और इन अस्पातलो के 90 प्रतिशत बेड हमेशा फुल रहते है लेकिन यहां सरकार द्वारा भर्ती मरीजों को खाना देने का प्रावधान है वह महज मरीजों के साथ मजाक बन कर रह गया है। मरीजों के लिए जो मैन्यू होना चाहिये उसमें हाई प्रोटीन डाइट में राजमा, पनीर, अंडे के साथ नानवेज तथा नाश्ते में मक्खन, ब्रेड के साथ आधा लीटर दूध होना चाहिये लेकिन अस्पताल प्रबन्धन द्वारा मरीजो को दोनो टाइम दह रोटी, दाल, सब्जी तथा सप्ताह में एक ही दिन राजमा दिया जाता है। पानी जैसी दाल और सब्जी के नाम पर तरी देख अधिकांश मरीज खाना नही लेते लेकिन वह गरीब मरीज जो दूर-दराज से आये है वह खाना लेने को मजबूर रहते है। अस्पाल में भर्ती लावाहरस, कैदी, बीपीएल कार्डधारक मरीजों को तो खाना भी नसीब नही होता। जब डाक्टर लिखते है तब उन्हे खाना दिया जाता है। हालात बदतर है और अधिकारी कभी चेक भी नही करते कि उनकी नाक के नीचे क्या चल रहा है ऐसे में कर्मचारी भी मनमानी पर उतारू है, पैसे के खेल में मरीजों को घटिया खाना परोसा जा रहा है जिसे खाने के लिए मरीज मजबूर है।

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