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सोमवार, 11 जून 2018

कुदरत का कहर बनकर सोमवार को आसमान से बरसी आग

फतेहपुर, शमशाद खान । सोमवार की सुबह से ही कुदरत का कहर बनकर आसमान से आग बरसी। जिससे हर केाई बेचैन हो उठा। सुबह से सूरज के दर्शन के साथ ही जलती-चुभती गर्मी का एहसास होता है तो बच्चों से लेकर बूढों तक के मुंह से बस यही निकलता है कि उफ यह गर्मी कब जाएगी। दिन चढ़ने के साथ ही धूप मे तेजी के साथ लू के थपेड़े चलते हैं तो सभी कराह उठते हैं। दोपहर के समय का आलम यह होता है कि इंसान के साथ-साथ पशु-पक्षी भी अंडरग्राउण्ड सा हो जाते हैं। मार्गों पर चहलकदमी न के बराबर रहती है। सिर्फ तपते हुए मार्ग ही गर्मी की भयावह को दर्शाते हैं। जंगल में गर्म हवा के झोंकों से पेड़ हिलते हैं और सिर्फ सरसराहट की आवाज सुनाई देती है। गर्मी की प्रचण्डता से हर कोई आजिज सा दिखाई देता है। गर्मी अपना प्रचण्ड रूप दिखा रही है। सुबह सूरज निकलने के साथ ही धूप की तेजी लोगों को बेचैन करने लगती है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है वैसे-वैसे धूप की तेजी के साथ ही गर्म हवा भी चलने लगती है। जो थपेड़ों की तरह लगती है। वहीं घर से बाहर निकलने पर धूप की तेजी इस तरह से शरीर पर असर करती है जैसे कि शरीर पर जलन हो रही हो और चुभन हो रही हो। धूप से बचने के लिए ही लोग दोपहर मे न के बराबर बाहर निकलते हैं। जिसके चलते दोपहर को मार्गों में सन्नाटा पसरा रहा। 

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