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शुक्रवार, 29 जून 2018

मूर्ति मिट्टी में समाहित हो कर उस पौधे को ताकत भी देंगी - ज्योतिषाचार्य विवेक तिवारी

कानपुर,  संवाददाता समीर अस्थाना  - हमारे देश में में सभी धार्मिक त्यौहार पूजा पाठ के साथ ही मनाये जाते है, जिसमे मूर्ति पूजन भी सम्मलित होती है ।  पूजा के बाद उन मूर्तियों को बहते हुए जल में विसर्जित करना होता है, पहले के समय में मुर्तिया मिट्टी की बनी होने के कारण पुनः जल में समाहित हो जाती थी ।  धीरे धीरे  समय बदला बदला उसमे उपयोग होने वाली मिट्टी की जगह प्लास्टर ऑफ़ पेरिस ने ले ली, मुर्तिया और दिखने में बेहतर लगने लगी और असली समस्या की शुरुआत हुई, ये मुर्तिया प्रवाहित होने के बाद भी पानी में न घुलने के कारण किनारे आने पर प्रदूषण बढ़ाने और भगवान का अपमान की स्थित होने लगी ।  कुछ संस्थाओ एवं समाज सेवको ने इसके लिए अभियान भी चलाये है, प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की जगह फिर से मिट्टी के उपयोग पर चर्चा शुरू हुई जिससे इन समस्याओ से बचा जा सके ।  आल मीडिया एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने स्वच्छ भागीरथी अभियान की शुरुआत कानपुर के सरसैया घाट से की जिसमे घाटो को प्लास्टिक और मूर्तियों को एकत्र कर घाटो को स्वच्छ रखने की शुरुआत की गयी थी ।  उन वालेंटियर में एक का नाम था ज्योतिषाचार्य विवेक तिवारी जिन्होंने मन ही मन इसके लिए कुछ करने की ठानी । 
लगभग एक साल के अथक प्रयासों के बाद उन्होंने मिट्टी, गाय का गोबर और गंगा की बालू से मूर्ति का निर्माण करने में सफलता पायी जो पर्यावरण हितैषी होने के साथ प्लास्टर ऑफ़ पेरिस जैसी ही शानदार और आकर्षक भी है ।  जिनको पूजा के बाद अपने घर के गमले में रख सकते है जो कि कुछ ही दिनों में मूर्ति मिट्टी में समाहित हो कर उस पौधे को ताकत भी देंगी ।  अभी उनका प्रयास कानपुर को इसका विकल्प "नो प्रॉफिट, नो लॉस" पर पर देने का है जिससे हम अपने कानपुर को स्वच्छ रख सके ।  आमजा भारत ने जब उनसे इस सम्बन्ध में बात की तो उन्होंने बताया कि इसको वृहद स्तर पर बढ़ाना चाहते है, जल्द वो हर पूजा में इस्तेमाल होने वाले गौरी गणेश का विकल्प देने का प्रयास कर रहे है ।  वो चाहते है  और भी लोग इसकी तकनीक को सीखे और नेक काम के साथ कमाई का साधन भी बनाए, आल मीडिया एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन उनकी भावनाओ और दूर  द्रष्टि की  भूरि भूरि प्रशंशा करता है। 

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