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शनिवार, 14 जुलाई 2018

कानवेन्टों मे शिक्षा के नाम पर जा रही अंधेरगर्दी

फतेहपुर, शमशाद खान । कानवेन्ट स्कूलों में शिक्षा के नाम पर अन्धेरगर्दी है। अभिभावकों को खुलेआम उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के नाम पर लूटा जा रहा है। अधिकतर कानवेन्टों को हाल यह है कि कक्षा केजी में प्रति बच्चा लगभग 1000 से 150 रूपये के हिसाब से प्रति माह फीस वसूल की जाती है। जबकि इण्टर के विद्याार्थियों से करीब 3500 से 4500 रूपये प्रति माह शिक्षा शुल्क लिया जाता है। शहर में कई कानवेन्ट ऐसे भी हैं। जहां चेक के माध्यम से तीन-तीन माह की फीस ली जाती है। इस तरह से शिक्षा के नाम पर अभिभावकों को लूटकर क्षिक्षण संस्थान हर साल नयी शाखाएं खोल रहे। इस खुली लूट से अभिभावकों की कमर टूट रही है। जिसको लेकर अभिभावको ने डीएम के सामने विरोध भी दर्ज कराया और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी और अभिभावकों को फीस के नाम पर किया जा रहा शोषण पर लगाम कसने के लिए कडे निर्देश दिये हैं जिसके बावजूद भी प्रशासन की उदासीनता के चलते कानवेंट स्कूलों मे मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। 
उल्लेखनीय है कि आज शिक्षा का तेजी से बाजारीकरण हुआ है। इससे कतई इन्कार नहीं किया जा सकता। हर तरफ कानवेन्ट खुल रहे हैं। इन कानवेन्ट स्कूलों के नियम कानून का कोई मानक नहीं हैं। एक तरह से खुलेआम अच्छी शिक्षा के नाम पर अभिभावकों की जेब में डाका डाला जा रहा है। सबसे बडी बात यह है कि कानवेन्ट स्कूलों में हर वर्ष अगली कक्षा में बच्चे का रजिस्टेªशन कराने का जो नियम है। उससे जुलाई माह मंे अभिभावक की जेब ही नही उसकी तिजोरी भी खाली करा ली जाती है। कक्षा के हिसाब से ही रजिस्टेªशन के नाम पर दो हजार रूपये से तीन हजार रूपये तक वसूल किये जाते हैं। फिर सुविधा के नाम पर स्कूल से ही किताबों व डेªस का सेट लेने पर मजबूर किया जाता है। यदि नहीं लेते हैं, तो बाहर कुछ मिलेगा भी नहीं। क्योंकि यह ऐसी ही पालिसी बनाकर रखते हैं। अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शहर में जितने भी कानवेन्ट स्कूल चल रहे हैं। उनमें मनमानी तरीके से अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जाता है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के रजिस्टेªशन के नाम पर खुलेआम पैसा लिया जाता है। जो एक तरह से अवैध उगाही है। न देने पर बच्चे के नाम काटकर भगा दिया जाता है। हर साल फीस बढ़ा दी जाती है। जबकि प्रारम्भ में किसी बच्चे का दाखिला कराने पर ऐसा कुछ भी नहीं बताया जाता है। मध्यम वर्गीय लोग कानवेन्ट स्कूलों में अपने बच्चों का प्रवेश दिलाकर एक तरह से फंस जाते है। केजी से पांच-छः तक पढ़ाने के बाद अभिभावक फीस देने में असमर्थ होने लगते है। अन्त में मजबूर होकर नाम कटवाने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं होता। इस तरह से बच्चों की पढ़ाई अधर में लटकती है और उनका भविष्य दो राहे पर खड़ा हो जाता है। कानवेन्ट स्कूलों में जिस तरह से अभिभावकों को फीस के नाम पर लूट कर तिजोरियों भरी जाती हैं। उसका उदाहरण यह है कि हर साल एक नयी शाखा खोल दी जाती है। नये सत्र में तमाम अभिभावकों के सामने कानवेन्ट स्कूलों की मांग पूरी कर पाना चुनौती बन जाता है। जिससे अब अभिभावकों में गुस्सा बढ़ रहा है। जिसके चलते जिले में अभिभावक संघ का भी गठन किया गया जिसके बैनर तले कान्वेन्ट स्कूल की मनमानी के विरोध में जिलाधिकारी से मिलकर अभिभावको ने विरोध भी जताया। इसके बावजूद भी कान्वेन्ट स्कूलो की मनमानी थमने का नाम नही ले रही है। 

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