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बुधवार, 25 जुलाई 2018

सावन से पहले घाटो पर पहुंची गंगा

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता - महीनो से निचले स्तर पर पहुंचा गंगा का जल स्तर अब बढने लगा है और सावन माह शुरू होने से पहले गंगा घाटो तक जा पहुंची है। परमट स्थित आनन्देश्वर घाट पर आने वाले श्रृद्धालुओं को घाट पर गंगा देख प्रसन्नता हुई और उन्होने गंगा पूजन किया।
        पिछले कई दिनों से कई जिलों में मूसलाधार बारिश होने के कारण गंगा बैराज का जल स्तर बढ गया। जल की भारी मात्रा को देखते हुए बैराज के कई गेट खोल दिये गये जिससे गंगा का जल स्तर अचानक काफी बढ गया और गंगा घाटों तक जा पहुंची। अचानक गंगा का जल स्तर बढने से प्रशासन भी सतर्क हो गया है और गंगा कटरी में बसे गांवों में एलर्ट जारी कर दिया गया है। वैसे तो अगस्त महीने में जल स्तर बढता है और इस माह के अंत में व सितम्बर तक बाढ आती है लेकिन इस बार अभी से बढे जल स्तर को देख अधिकारी परेशान हो उठे है। समय रहते सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं को निर्देश दे दिये गये है। हलांकि मंगलवार को थोडा सा जल स्तर भी गिरा लेकिन लगातार प्रदेश में हो रही भीषण बारिश से गंगा का जल स्तर कभी भी बढ सकता है। बताते चले कि हर वर्ष बाढ का पानी गंगा कटरी के चैन पुरवा, गंगाराम पुरवा, देवनी पुरवा, धरमखेडा सहित अन्य कई गांवों में घुस जाता है जिससे गांव वालों को काफी नुकसान होता है जहां उनकी फसले नष्ट हो जाती है तो वहीं मवेशी भी बाढ के पानी में बह जाते है। गांव के निवासियों ने बताया कि हर वर्ष बाढ के कारण उनकी गृहस्थी का सामान बह जाता है। प्रशासन से तथा सामाजसेवी संस्थाओं द्वारा उन्हे मदद मिलती है लेकिन घर-गृहस्थी का पूरा सामान दूसरी जगह अचानक नही ले जाया जा सकता है। बाढ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन सर्तक हो गया है और  बाढ नियंत्रण विभाग द्वारा अभी से चैकियां बनाने के लिए प्रस्तावित सूची तैयार की जा रही है, ताकि बाढ के समय होने वाले सम्भावति नुकसान को कम किया जा सके। बैराज में गंगा का जल स्तर दो फिट बढकर 356 पर पहुंच गया। वहीं अधिकारियों का कहना है कि प्रति दिन जल स्तर पर ध्यान रखते हुए तैयारी की जाये मुख्य सचिव अनूप चंद्र पाण्डेय ने जिलाधिकारी से बाढ के समय में बचाव के उपाय की कार्य योजना मांगी है। इसके साथ ही विभाग के अधिकारियों द्वारा बाढ के दौरान तत्काल किसी प्रकार की सूचना देने के लिए ग्राम प्रधानों के मोबाईल नम्बर एकत्र. किये जा रहें है। अधिकारियो ने कहा कि बारिश के मौसम में नदियां उफान पर होती है ऐसे में बाढ का खतरा बना रहता है। प्रशासन द्वारा बाढ की सभी स्थितियों का ध्यान रखा जा रहा है और इससे निपटने की तैयारी की जा रही है ताकि किसी प्रकार का बाढ के दौरान जान-माल का नुकसान न हो।

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