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सोमवार, 23 जुलाई 2018

आंखों मे आंसू भरे लोग अपने आशियाने को ढहाते हुए देखते रहे

फतेहपुर, शमशाद खान । जिला प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान पाँच दिनों की अवधि के बाद सोमवार से फिर से चालू हो गया अधिवक्ताओं द्वारा जिला प्रशासन से की गई रहम की गुहार और व्यपारियों द्वारा केंद्रीय राज्यमन्त्री साध्वी निरंजन ज्योति और प्रदेश सरकार के राज्यमन्त्री राणवेन्द्र प्रताप धुन्नी सिंह से की गई वार्ता ही न तो कोई काम आयी और न ही व्यापारियों द्वारा की गई बन्दी का ही प्रशासन पर कोई असर पड़ा। सोमवार को बाकरगंज पुलिस चैकी से लेकर लखनऊ बाई पास चैराहे तक चलाये जाने वाला अतिक्रमण अभियान बदस्तूर जारी रहा। प्रशासन की जेसीबी लोगो के अरमानों पर चलना शुरू हुई और देखते ही देखते कभी रंगबिरंगी रोशनियों से जगमगाने वाली मार्केट धुल और मलवों के ढेर में तब्दील कर दी गई। उप जिलाधिकारी प्रेम प्रकाश तिवारी और क्षेत्राधिकारी कपिलदेव मिश्रा के नेतृत्व में नगर पालिका और राजस्व विभाग की टीमें आगे आगे चलकर अवैध कब्जेदारों से मकानों और दुकानों के भीतर निकाल रही थी लोग रहम की भीख मांगते रहे लेकिन प्रशासन का बुलडोजर उनके कब्जों को ध्वस्त करने में जुटा रहा। भारी पुलिस बल की मौजूदगी और प्रशासन की दहशत से जगह जगह आँखों में आंसू लिये अपने हाथों से छेनी हथौड़ा लेकर अपना आशियाना तोड़ने में जुटे रहे। कई इमारतों को तोड़ने में व्यपारियो से प्रशासन की मामूली कहासुनी भी हुई जबकि बड़े व्यापारी नेता जिला प्रशासन के आगे असहाय बन केवल मूकदर्शक बने रहे। अतिक्रमण अभियान के विरुद्ध व्यापार मण्डल द्वारा की गई अनिश्चितकालीन बन्दी का भी प्रशासन पर कोई असर नही हुआ। जबकि मुश्किल समय में सन्गठन द्वारा कोई साथ न दिए जाने पर लोगो में व्यापार मण्डल के प्रति नाराजगी देखी गई। अतिक्रमण की जद में जो भी आया दूकान मकान प्रशासन के बुलडोजर से बच नही सका। बरसो से रहने वाले आशियानों को टूटने से बचाने के लिए बुजुर्गों महिलाओं एवं बच्चों द्वारा की जा रही मिन्नतों और रहम की भीख मांगने का भी अफसरो पर कोई असर नही पड़ा। और देखते ही देखते उन्हें आशियानों से निकालते हुए जब्जो और दुकानों को ढहा दिया गया। बाकरगंज चैराहे स्थित एक इमारत पर बुलडोजर चलने ही वाला था तभी  आवश्यक कागजात लेकर आये व्यापारियों द्वारा एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्यवाही को रुकवाया गया। देरशाम तक ध्वस्तीकरण की कार्यवाही जारी रही। प्रशासन के रुख को देखकर अवैध कब्जेदारों में हड़कम्प मचा हुआ है। तो वहीं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जद मे आये हुए लोगो के पास रोजी रोटी के लाले पड़ गए है। तमाम लोगो के परिवार मामूली सी दुकान से चल रहे थे दुकानें टूट जाने की वजह से व्यपारियो के सामने परिवार पालने और बच्चों के स्कूल की फीस तक भरने में संकट हो गया है।

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