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बुधवार, 1 अगस्त 2018

पीएम से संत रामपाल के अनुयायियों ने मांगा अपना अधिकार

फतेहपुर, शमशाद खान । पिछड़ा व अतिपिछड़ा समाज के लोगों ने अपने अधिकार को वापस पाने के लिए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर कानून को पुनः लागू कराये जाने की मांग किया।
बुधवार को संत रामपाल महाराज के सैकड़ों अनुयाईयों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अध्यक्ष हरिश्चन्द्र मौर्या की अगुवाई मे जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रधानमंत्री को भेजा। इस दौरान संत रामपाल के मीडिया प्रभारी चन्दन सिंह राठी ने बताया कि आज के दिन देशभर के प्रत्येक जिले मे अनुयागियों द्वारा प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। प्रधानमंत्री को भेजा गया ज्ञापन मे मांग किया कि 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट के जज आदर्श कुमार गोयल की खण्डपीठ के द्वारा जो एससी/एसटी कानून को कमजोर करके पिछड़ा व अतिपिछड़ा समाज को सम्मान सें जीने का हक पर कुठाराघात किया गया है। उसे पूर्व की तरह लागू करें। यह कानून सन् 1989 में बनाया गया है। उसके बाद पिछड़ा व अति पिछड़े समाज के हकों की रक्षा तथा समाज मे सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार प्राप्त हुआ था। परंतु सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस कानून की हवा निकाल दी। अब पिछड़ा व अति पिछड़े समाज को फिर से 100 साल पुराने समय की तरह नरक का जीवन जीने के लिए बाध्य कर दिया गया है। यह सब मौजूदा सरकार का अपने परंपरागत वोटरों को खुश करने के लिए करवाया गया फैसला है। इस फैसले के बाद पूरे भारत मे पिछड़ा व अति पिछडा समाज अपने को ठगा-सा महसूस कर रहा है। इस समय मे संत रामपाल जी महाराज ने इनके हकों की रक्षा व पिछड़ा व अति पिछड़ंे समाज को सम्मानपूर्वक जीने से हक को दोबारा पूर्व वाले कानून को संसद मे बिल पास करवाकर बहाल करने के लिए पिछडा व अति पिछड़े समाज के हक मे आवाज उठाई है जिस कड़ी मे आज ये ज्ञापन पूरे भारतवर्ष मे दिए जा रहे हैं। संत रामपाल महाराज किसी जाति-पाति को नही मानते। उनका नारा है कि - जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, धर्म नही कोई न्यारा। फिर भी किसी भी मानव जाति, धर्म व समुदाय के खिलाफ सरकार द्वारा अन्याय करने पर संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य मे ''राष्ट्रीय समाज सेवी समिति तन-मन-धन से उस संगठन, समुदाय के साथ सहयोग करने मे तत्पर रहती है तथा आखरी समय तक उनका साथ देकर सरकार द्वारा हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहती है। आज भी हमारी प्रधानमंत्री से मांग है कि उक्त कानून को पूर्व की तरह लागू करने का काम करें अन्यथा भारतवर्ष में पिछड़ा व अति पिछड़े समाज के द्वारा किए गए किसी भी संवैधानिक व अहिंसापूर्वक आंदोलन को तन-मन-धन से आरिखी दम तक सहयोग देगें। इस मौके पर रामेन्द्र राज, विनोद राज, विनोद दास, अनूप दास, प्रीती दासी, प्रियंका दासी, उर्मिला, सन्तोष कुमारी, रामदेई, सुनीता, रचना, फूलकुमारी, रामकली आदि मौजूद रहे। 

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