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गुरुवार, 6 सितंबर 2018

विभागीय अधिकारियों की लापरवाही बन रही शहरियों के लिए काल

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता -  कानपुर नगर के नकारा अधिकारियो की सुस्ती के कारण सरकार का कानपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना देख रही सरकार को यह नही मालूम की उसके आदेशो और निर्देशों का कानपुर के सरकारी महकमो में जमे अधिकारियों द्वारा पालन नही किया जाता है। लापरवाह अधिकारी अपने ऐसी कमरो में बैठ कलम चलाने के आदि हो चुके है। सडकों पर जनता को क्या झेलना पड रहा है इससे इनका कोई लेना-देना नही है। सख्ती होने पर यह थोडा फडफडा लेते है लेकिन फिर सब कुछ पहने जैसा हो जाता है। स्थिति यह कि कानपुर में अधिकारी पूरी तहर फेल साबित हो रहे है। शहर की स्थिति चाहे बिजली हो, सडक हो, यातायात हो, पानी हो या अन्य व्यवस्था सब धराशायी हो चुकी है। पूर्व में निगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने दो माह में चटटे हटाने के लिए सख्त आदेश दिया था लेकिन कानपुर के लापरवाही अफसर उनके निर्देशों को अनसुना कर गये और आज शहर की सबसे अधिक बडी समस्या वैसे के वैसे जमंे है।
              बतातें चले कि जहां एक ओर गंगा सफाई के लिए करोडों रू0 पानी के जैसा बहाया जा रहा है, शहर को स्मार्ट सिटी के सपने दिखाए जा रहे है वहीं यहां की सडकों पर लाखों की संख्या में घूम रहे आवारा जानवरो के प्रति विभाग संजीदा नही है। हजारो चटटे शहर के भीतर नाली नालों को चांेक कर रहे है, गंदगी फैला रहे है। घनी आबादी के साथ ही रिहायशी इलाकों की सडकों और फुटपाथो को घेर कर बडे-बडे अवैध रूप से चटटे संचालित किये जा रहे है। इसमें सीधे तौर पर नगर निगम, कानपुर विकास प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन के अधिकारी जिम्मेदार है। शहर में चटटे ऐसे ही नही बने या कभी पुलिस ने उन्हे हटाने का प्रयास नही किया लेकिन जेबें गर्म होने के बात कार्यवाही ठण्डे बस्ते में चली गयी दूसरी ओर चटटे हटाने को लेकर कोई भी विभाग अपनी जिम्मेदारी नही निभा रहा है। एक ओर नगर निगम को जहां चटटे चिन्हित करने है तो वहीं केडीए को केटल काॅलोनी बसानी है ओर पुलिस प्रशासन को शिफ्टििंग करानी है। विभागों में आपस में ही तालमेल नही है लेकिन प्रयास भी नही किया जा रहा है। लगातार शहर में आवारा जानवरो की संख्या बढती जा रही है। चटटो के कारण गाय, सांड सडकों पर जमावडा लगाये रहते है वहीं सुअर पालको के कारण सडकों पर सुअर लोटते नजर आते है। स्थित यह कि पाॅश इलाको में सुअरो ने डेरा डाल रखा है। सूत्रो की माने तो विभाग के कुछ लोग के संरक्षण में शहर के बीचोबीच चटटे संचालित हो रहे है। खैर बात कुछ भी हो लेकिन सच यही है कि आवारा जानवरो के कारण शहरी परेशान है, शहर का यातायात भी प्रभावित हो रहा है लेकिन इस ओर अधिकारियों द्वारा बरती जा रही लापरवाही शहर के हालता को बिगाड रही है।

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