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रविवार, 30 सितंबर 2018

एशिया की सबसे बड़ी पेयजल योजना- ‘‘ पाठा जल-कल‘‘ पर मंडराते संकट के बादल

चित्रकूट, ललित त्रिपाठी ।  जनपद- सतना के चित्रकूट व कर्वी की जनता की प्यास मंदाकिनी से बुझाई जाती है ऐशिया कि सबसे बडी पेय जल योजना पाठा जलकल भी इसी मंदाकिनी से संचालित है इसकें बाद भी किसी राजनेता या अधिकारी को मंदाकिनी की सुध नही आ रही है ें मंदाकिनी के सुन्दरी करण करने के नाम पर घाटों का निर्माण कार्य जो हुआ वह भी घटिया है। निर्माण के दौरान जो मलवा निकला है वह नदी में ही पडा है जिससे नदी के जल श्रोत्र बन्द हो गये श्रोत्र बन्द होने से नदी ने एक नाले का स्वरूप धारण कर लिया है। वही नगर पंचायत नया गांव की नाक के नीचे शहर का सारा गंन्दा पानी एक झरने की शकल में नदी में गिर रहा है वहां के नगर पंचायत अध्यक्ष प्राची चर्तुेवेदी एक राज परिवार से है क्या उन्हें यह गंन्दगी दिखाई नदी देती उधर उ0प्र0 व म0 प्रे0 प्रशासन सीवर ट्रीटमेंटप्लान्ट आज कई साल से बनावा रहा है। काम कच्छय गति से चल रहा है। शायद मंदाकिनी के सूखने का इंतजार कर रहे है सीतापुर पुलिस चैकी के नीचे वाले रास्ते से शहर की गंन्दगी नदी में गिर रही है। सुअर लोट रहे है कही से भी नदी यह नही लगती कि यही पाप मोचनी मंदाकिनी है। 
मंत्री मिनिस्टर कमिश्नर डी0ए0म आ0ई0जी डी0आई0जी नेता बडे-बडे शर्कराचार्य साधु संत दुनिया को दिखाने के लिये साम को गगा आरती करने पंहुचते है लेकिन उपयुक्त लोगो को मंदाकिनी की पीडा  समझ नही आती करोणों रूपया मंदाकिनी के नाम पर बर्वाद किया जा रहा है। लेकिन नदी दिन प्रति दिन सूखती जा रही है। नदी को बचाने के लिये दोनो जनपदों के प्रशासनिक अधिकारी समनवय बनाकर काम करेगे तभी कुछ साथीक परिणाम आ सकते है। अन्यथा वह दिन दूर नही जब मंदाकिनी एक इतिहास बनकर रह जायेगी।  सीवर लाइन को बालाजी घाट से सीधे मंदाकिनी नदी में गिरा दिया है। जहां सीवर लाइन के माध्यम से सारा कचरा गिरने से भयंकर बदबू लोगो को नहाना तो दुलर्भ आचमन करना मुश्किल है। मंदाकिनी का जल यहा पर मांत्र एक फुट गहरा है। कचरा युक्त पानी जल संस्थान के इन्टेकवेल के माध्यम से पानी निकाल कर समूचे नगर कर्वी सीतापुर सहित 250 गांवों में पीने का पानी मुहैया कराया जाता है। जिसके पानी से सैकडो लोग बुखार पेट दर्द जैसी संक्रामक बीमारी के शिकार होकर जीवन और मौत से संघर्ष कर मौत के शिकार हो जाते है। मंदाकिनी नदी के उदगम स्थल से लेकर विशालकाय लम्बे-लम्बे विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष लगे थे जिनके जडों से पानी रूक कर बरांकर पानी बढता जाता था। लेकिन इतनी गति से तमाम संस्थाओं द्वारा हरे भरे वृक्षों को काटकर रेतीला बना दिया है। प्रमुख द्वार के महत मदन दास उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सरकारों सहित केन्द्र सरकार को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग की हैै।   
सैकडो गांवो की प्यास बुझाती है मंदाकिनी- मंदाकिनी नदी के उदगम स्थल सती अनुसुईया से लेकर राजापुर के कनकोटा घाट में जहां मंदाकिनी यमुना नदी में मिलती है ताथ सैकडों ग्राम पडते है जो नदी किनारे बसते है। हजारो वीघे जमीने सीची जाती है जिससे किसानों को वर्ष भर गल्ला खाने केा पैदा करने है अगर नदी सूख गई तो क्या होगा क्या चित्रकूट भी काला हाडी बन जायेगा। बुन्देलखण्ड की  इस प्यासी भूमि की जनता एक-एक बूद पानी के लिये तरसेगी चित्रकूट रामघाट में आज नही के हालत खतरे की घंटी बजा रहे है। मुश्किल से 4 फुट ही पानी की गहराई बची होगी पूरी नदी मिटटी बालू से पट चुकी है पहले जहा रामघाट में हाथी डूब जाता था अब कुत्ता भी इस पार से उस पार निकल जाता है प्रशासन विलकुल कुम्भकरणी नीद में सो रहा है। चाहे यू पी  का हो य एम पी का प्रशासन इन लोगो ने तो सारी हदे पार कर दी घांटों का निर्माण करने के बाद सारा कचडा़ मिटटी वही पर छोड दिया है नया गांव का सारा गंदा पानी नदी में आज भी गिर रहा है। प्रशासन सब देखता है जानता है लेकिन कुछ नही करता। जनपद का प्रशासन तथा नगर पालिका भी सब कुछ देख रहे है लेकिन कोई कार्यवाही न होने से लोग सारी गंदगी नदी में डाल रहे है पानी का दोहन भी बडी बेरहमी से किया जा रहा है। नदी मे कीचड मिटटी जमने से प्राकृति जल श्रोत्र बन्द हो चुके है तथा नदी का जल स्तर दिन प्रति दिन गिरता जा रहा है। उ0प्र0 शासन ने सीवर लाईन के नाम पर खाना पूर्तीकर दी वह भी अभी तक नही कम्पलीट नही हो पाया उसका काम। रामघाट में रहने वाले लोगो ने बताया कि नदी का जल स्तर विलकुन खतम होने की कगार पर है अगर जल्दी ही कुछ नही किया गया तो आने वाले समय में यहां पानी के लिये लोग परेशान हो जायेगो। मंदाकिनी के उदगम स्थल अनुसुईया आश्रम से लेकर कर्वी के मधुसूदन घाट तक अतिक्रमण तथा गंदगी का अम्बार लगा हुआ है।  

क्या कहते हैं धर्माचार्य 
दिगम्बर अखाडे के महंत दिब्यजीवन दास कहते है कि मंदाकिनी को प्रदूषण से बचाना तथा उसके प्राकृतिक जल श्रोतो को बचाना हम सभी का पुनीत कार्य होना चाहिये वे दोनो जनपदों के निवासियों से अपील की है नदी को बचायें। चित्रकूट के तमाम साधुसंत, सन्यासी, वैरागी व आम जनमानस काफी हद तक जिला प्रशासन को दोषी बता रहे है। मधुसूदन आश्रम चित्रकूट के महंत जी ने भी मंदाकिनी पर चिन्ता ब्यक्त करते हुये प्रशासन से अति शीघ्र इस पर कार्यवाही की मांग की है।

 उ0प्र0 जिला प्रशासन नही कर रहा कार्यवाही
एक ओर म0प्र0 जिला प्रशासन मंदाकिनी को लेकर कार्यवाही का मन बना चुका है वही उ0प्र0 का जिला प्रशासन चुपी साधकर बैठा है मंदाकिनी में अैवध कब्जे तथा भारी मात्रा में गंदगी फैलाई तथा डाली जा रही है लेकिन जिला प्रशासन कुछ नही कर रहा है । 

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