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रविवार, 30 सितंबर 2018

शरीर की वास्तविक क्षमता को कम करती है एण्टीबायोटिक

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता - भारतीय बाल रोग अकादमी द्वारा एटीबायेाटिक जागरूकता सप्ताह के तहत एंटीबायोटिक पर एक गोष्ठी में चेयरपर्सन डा0 विवेक सक्सेना, डा0 अम्बरीश गुप्ता डा0 अनुराग भारती, डा0 प्रभात तिवारी ने व्याख्यान दिया तथा कार्यक्रम का संचालन अध्यक्ष डा0 ललित अरोरा व सचिव डा0 अमित चावला ने किया। डा0 अनुराग ने बताया कि एण्टीबायोटिक दवाओं का हर मरीजों में उपयोग घातक हो सकता है और निरर्थक इस्तेमाल से मरीजों में रेसिस्टेन्स हो सकता है। यह किस वजह से होता है यह भी बताया कि किस तरह से इससे बचा जा सकता है। कहा लोग सामान्यतः रोग में फायदा होने पर दवाई छोड देते है, जिससे एण्टीबायोटिक शरीर के नेचुरल फ्लोरा को डिस्टर्व कर देता है और शरीर की अवरोधक क्षमता प्रभावित होती है। डा0 प्रभात ने त्वचा के इन्फेक्शन से सम्बन्धित विभन्न जानकारिया दी और कौन सा एण्टीबायोटिक देना चाहिये बताया। इस अवसर पर डा0 एममए मैथानी, डा0 एके आहूजा, डा0 एल के निगम, डा0 आशीष विश्वास, डा0 जेके गुप्ता, डा0 विपिन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
              वहीं शर्मा नर्सिंग होम स्वरूप नगर में एक नर्सिंग ट्रेनिंग का कार्यक्रम भी आयेाजित किया गया जिसमें विभिन्न नर्सिंग होमो से लगभग 40 नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन आशीष विश्वास व डा0 केके शर्मा ने किया। डा0 आशीष ने नर्सिगं स्टाफ को जीवाणु जनति एंव विषाणु के जनति बुखारो के लक्षणों के आधार पर पहचानना बताया तथा कहा 70 प्रतिशत बुखार वाइरल के होते है जिनमें एण्टीबायोटिक की जरूरत नही होती और 30 प्रतिश बुखार वैक्टीरियल होते है। उन्होने नवजात शिशुओं व बच्चों में एण्टीबायेाटिक का स्मार्ट प्रयोग करना बताया वहीं डा0 केके शर्मा ने नर्सिंग स्टाफ को एण्टीबायोटिक के प्रति जागरूक किया।

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