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मंगलवार, 30 अक्तूबर 2018

कभी रसूखदारों की शान रहा असलहा अब रोजगार पाने का बना जरिया

फतेहपुर, शमशाद खान । प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक को हटा देने के आदेश के बाद जनपद में बड़े पैमाने पर लोगो ने असलहे का लाइसेंस पाने के लिये आवदेन करना शुरू कर दिया है। असलहा घर में रखना और उसे लेकर चलना कभी रसूखदारों की शान हुआ करती थी पर अब यह बेरोजगारों के लिये जीविका चलाने का साधन भी बनता जा रहां है। वैसे तो आवेदकों के पास शस्त्र पाने के लिये अपने अपने कारण है लेकिन असलहे का लाइसेंस पाने के लिये आवदेन करने वालो में एक बड़ा तबका बेरोजगारों का भी है जो लाइसेन्स मिलने से सुरक्षा गार्ड की नौकरी हासिल कर अपने व अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिये जुगत लगा रहा है। देश में तेजी से बढ़ रही युवाओं की संख्या और रोजगार के कम हो रहे अवसरों के कारण बेरोजगारी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ का शस्त्र लाइसेंस पर से रोक हटाने का आदेश  बेरोजगारों के लिये किसी वैकेंसी के आवेदन से कम नही है और शस्त्र का लाइसेंस मिल जाना बेरोजगारों के लिये किसी नियुक्ति पत्र से कम नही है। सीएम के इस फरमान को बेरोजगार अपने लिये रोजगार हासिल करने के जुगाड़ के रूप में देख रहे है। कहने को भले ही शस्त्र आवेदन के लिये लोग दुश्मनी,कारोबार या फिर स्वयं की सुरक्षा का बहाना बना रहे हो लेकिन असलहे की चाहत रसूख दिखाने की लालसा के साथ साथ अब रोजगार का भी साधन बनता जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक शस्त्र लाइसेंस के लिये कचहरी परिसर स्थित दुकानों एवं अन्य जगहों से प्रतिदिन लगभग 50 से 100 तक आवेदन फार्मो की बिक्री की जा रही है तो वही लाइसेन्स की प्रक्रिया के तहत कचेहरी के असलहा अनुभाग से लेकर पुलिस ऑफिस तक शस्त्र लाइसेन्स पाने वालों की खासी भीड़ उमड़ रही है। आवदेन के लिये पुलिस कार्यालय आये युवाओं ने बताया कि यदि शस्त्र का लाइसेंस उन्हें मिल जाता है तो किसी सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से उन्हें सुरक्षा गार्ड की नौकरी हासिल हो सकती है जिससे उनके व उनके परिवार की जीविका का चलने में मदद मिल जायेगी। ऐसे में अगर यह कहा जाए की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आदेश बेरोजगारों के लिये रोजगार पाने का सहारा बन रहा है तो यह कहना गलत नही होगा।

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