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शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

बेटियों पर होती है ज्यादा बंदिशे, लेकिन वह रच नही नित्य नये आयाम

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता -  देश के  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को कानपुर शहर पहुंचे, यहां उन्होने भाजपा सरकार के कार्यक्रमो की सराहना की। राष्ट्रपति ने नर्वल, जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज तथा चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविधालय(सीएसए) में होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कानपुर मेडिकल काॅलेज में फाॅगसी की अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उन्होने कहा कि बेटियों पर बेटों की अपेक्षा बंदिशें ज्यादा होती है, बावजूद इसके बेटियां समाज में रो नए आयाम रच रही है। राष्ट्रपति ने चिकित्सा विशेषज्ञों से आवाहन किया कि महिलायें स्वास्थ रहेंगी तभी परिवार, समाज और राष्ट्र का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इसलिए महिलाओं और वंचित वर्ग को स्वास्थ्य शिक्षा और सहूलियतें पहुंचाना अपके कंधो पर है।
                राम नाथ कोविंद ने कहा कि दुर्भाग्यवश हमारे देश के कुछ लोग अभी भी बेटियों के महत्व को नही समझ पा रहे है। कहा मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार की बेटी बचाओं, बेटी पढाओं, सुकन्या समृद्धि तथा किशेरी योजना जैसे कार्यक्रमों से देश वासियों की सोच में परिवर्तन आ रहा है और सेक्स रेशियों में भी सुधार हुुआ है। कहा कि स्वास्थ्य कल्याण के लिए बदलती हुई आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर 2017 में एक नई स्वास्थ्य नीति लागू की गयी, जिसमें स्वास्थ्य सेवा को प्रभावित करने वाले सामाजिक और आर्थिक कारणों पर विशेष ध्यान दिया गया है। केंद्र सरकार के सुरक्षित मातृत्व अभियान कार्यक्रम का उददेश्य निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं को गर्भवती महिलाओं तक पहुंचाने और उन्हे सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करना है। इस अभियान के तहत किए गए प्रसूति-पूर्व जांच की संख्या डेढ करोड से भी अधिक है। कहा इस अभियान से महिलाओं में काफी जागरूकता आई है।
               जीएसवीएम मेडिकल कालेज में कार्यक्रम के उपरान्त राष्ट्रपति चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौधोगिकी विश्व विधालय पहुंचे तथा उन्होने युवाओं की प्रतिभा तराशने पर जोर दिया। उन्होने का कि टैलेंट डवेलपमेंट काउंसिल विधार्थियों की प्रतिभा को पहचानने और निखारने में जुटी हुई है। कहा हमारे समाज और देश की प्रगति के लिए अनिवार्य सामूहिक नैतिकता के तत्वो का, हमारे संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट उल्लेख किया गया है। यहां पर उन्होने संस्कार युक्त शिक्षा पर आयोजित गोष्ठी में कहा कि प्रतिभा विकास के साथ साथ संस्कारों पर बल देना, समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए अहुत ही आवश्यक है। नैतिकता, संसकार की शिक्षा से ही मनुष्य को बेहतर इंसान बनाना संभव हो पाता है। उन्होने गांधी जी का एक कथन बताया कि गांधी जी ने कहा था कि सच्ची शिक्षा वही है जो मुनष्य को सचचा और अच्छा मनुष्य बनाये। विधा प्राप्ति मानवता और नैतिकता की रक्षा से जुडी होनी चाहिये। कहा मैं भी मानता हूं कि जो अच्छा मनुष्य है वह समाज के हर क्षेत्र में अच्छा योगदान ही देगा। संस्कारों पर आधारित चरित्र का निर्माण करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। यही ंसंस्कार युक्त शिक्षा का उददेश्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे समाज  और देश की प्रगति के लिए अनिवार्य सामूहिम नैतिकता के तत्वों का हमारे संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट उल्लेख किया गया है। सशक्त भारत का निर्माण करने के लिए हमें सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय तथा स्वतत्रंतार, समता और बंधुता को बढाने के लिए दृढ संकल पके साथ कार्य करना है। इस अवसर पर राज्यपाल राम नाईक, कंेद्रीय विज्ञान एवं प्रौधोगिक मंत्री डा0 हर्ष वर्धन औधोगिक विकास मंत्री सतीश महाना उपस्थित रहे। सीएसए में राष्ट्रपति ने लोगों से भी मुलाकात की।

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