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शनिवार, 13 अक्तूबर 2018

स्कंदमाता (माता का पञ्चम रूप )

माता का पाँचवाँ रूप स्कंदमाता का है। छान्दोग्यश्रुति के अनुसार 'स्कंद' शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का दूसरा नाम  स्कंद है, तो, स्कंद की माता होने के कारण ही इस रूप को स्कंदमाता  कहा गया है । प्रतीक के रूप में इसे यहाँ  शिव और पार्वती का मिलन समझना चाहिए , तभी तो ममतामयी रूप में माता को स्कंद को गोद में दिखाया गया है जिसे एक हाथ से माता संभाली हुई हैं ।

पुराण में यह वर्णन आता है कि माँ  स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं । अपने दो हाथों में माँ कमल पुष्प धारण किए रहती हैं।  इसलिए इनका ध्यान करते हुए इन मंत्रों को पढ़ना चाहिए : "ॐ स्कन्दमात्रै नमः !"

मोक्ष का द्वार खोलने वाली माता सिंह पर आरूढ रहती हैं और परम् सुखदायी मानी गई हैं ।

साधक के दृष्टिकोण से  अभी उसकी साधना विशुद्धि चक्र पर अवस्थित है जिसका मूल स्थान कंठ है। 

आराधना के प्रयोजन से इस रूप को संतान प्राप्ति हेतु अतिफलदाई माना गया है।
जिसके लिए स्कंदमाता का ध्यान मंत्र है :
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंद माता यशस्विनी॥

इस रूप में माँ  की आराधना का मंत्र :
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया  
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी 

 आपका ही,
 कमल

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