AMJA BHARAT एक वेब न्‍यूज चैनल है जिसे कम्‍प्‍यूटर, लैपटाप, इन्‍टरनेट टीवी, मोबाइल फोन, टैबलेट इत्‍यादी पर देखा जा सकता है। पर्यावरण सुरक्षा के लिये कागज़ बचायें, समाचार वेब मीडिया पर पढें

शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

ई-रिक्शा चालको पर प्रशासन के चाबुक से जीविका चलाने पर छाया संकट

फतेहपुर, शमशाद खान । प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी द्वारा बेरोजगारों को रोजगार हासिल करने के लिये किसी भी कार्य को बढ़ा या छोटा न समझ कर उसे अपनाकर ईमानदारी से करने के लिये कहा गया है। देश में बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी से निपटने के लिये कई मंचों से प्रधानमन्त्री व उनके कैबिनेट के अनेको मंत्रियों द्वारा बेरोजगारी दूर करने के लिये लघु उद्योगों को लगाये जाने के साथ ही चाय व पकौड़ा बेचने को भी रोजगार के रूप में अपनाये जाने का आह्वान किया गया जा चुका है। प्रधामनंत्री की दी गयी सीख से प्रेरणा लेते हुए शिक्षितो के साथ ही सैकड़ो कम पढ़े लिखे एवं अनपढों द्वारा छोटे-मोटे धंधे व अन्य कार्य शुरू किये गये जिसमे से कुछ लोगो द्वारा ई-रिक्शा चलाकर अपने व अपने परिवारवालों का पेट पालने का कार्य किया जा रहा है धुँआ रहित व पूरी तरह के प्रदूषण से मुक्त होने के साथ ही पर्यावरण के प्रति अनुकूल यात्रियों के ढोने वाले इस बैटरी चलित वाहनो पर बीते कुछ दिनों से जनपद के परिवहन व यातायात विभाग द्वारा लाइसेन्स व अन्य कागजातों के नाम पर उत्पीड़न किया जा रहा है। जिससे ई रिक्शा चालकों में असंतोष व्याप्त है। ई-रिक्शा चलाने वालों में अधिकाँश गांव में रहकर मेहनत मजदूरी करने वाले खेतिहर किसान या मजदूर है जो साहूकारों और दंबगो की नौकरी छोड़कर अपने बच्चों के बेहतर मुस्तकबिल बनाने का सपना लिये  शहर आये थे और यहाँ मैंन पुलिंग या पैडिल रिक्शा चलाकर परिवार का गुजर बसर करने लगे और समय बदलने पर पुराने परम्परागत रिक्शे के जगह किराए पर ई रिक्शा लेकर या फिर कर्ज से रिक्शा खरीद कर चलाते है। इन रिक्शा चालकों में एक बड़ी संख्या बेहद कम पढ़े लिखे या फिर कहे की लगभग अनपढ जैसो की है  जो हिसाब किताब तक यात्रियो से ही करवा लेते है और उनकी ईमानदारी को ही अपनी कमाई समझ कर रख लेते है। पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा लाइसेन्स बनवाये जाने को लेकर जताई जा रही सख्ती से ई-रिक्शा चालक असमंजस की स्थिति में है ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत आवेदन कर परिवहन विभाग के चक्कर काटने पर मजबूर है। लाइसेन्स न बन पाने के असली वजह उनका कम पढ़ा लिखा होना ही है कम्प्यूटर की जानकारी न होने के कारण वह ऑनलाइन परीक्षा देने में असमर्थ है जिस कारण उनका लाइसेन्स नही बन पाता। ऐसे में ई रिक्शा चालकों के सामने सीमित विकल्प बचते है  या तो वह दलालो की शरण में जाकर मोटा धन खर्च कर अपना कार्य कराये या बिना लाइसेंस के रिक्शा चलाकर पुलिस कार्यवाही में आकर शोषण सहने को मजबूर हो अथवा रिक्शा चलाने का काम छोड़कर बेरोजगार हो जाए। प्रशासन की सख्ती के कारण उनको अपने परिवार का भरण पोषण करने के लाले पड़ गए है पापी पेट के सवाल पर कुछ लोगो द्वारा दलालो की मदद से ड्राइविंग लाइसेन्स हासिल भी कर लिया गया  लेकिन किराए पर रिक्शा चलाने वाला हर रिक्शा चालक दलालो को पैसे देने की ताकत नही रखता। रिक्शा चालकों से बात करने पर उनका दर्द छलक उठता है एक रिक्शा चालक ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराए जाने के लिये ई रिक्शो का वितरण किया गया था परन्तु वर्तमान योगी सरकार द्वारा सबका साथ सबका विकास की बात भले ही की जा रही हो लेकिन यातायात विभाग द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर उनका शोषण कर रोजगार छीनने का कार्य किया जा रहा है। परिवहन विभाग में ऑनलाइन लाइसेन्स प्रक्रिया होने का कारण कम पढ़े लिखे लोग कम्प्यूटर चलाने व पढ़ने लिखने में अपने आपको असमर्थ पाते है और परीक्षा पास नही कर पाते ई रिक्शा चलाने में निपुण होने के बाद भी कम पढ़े लिखे होना इनके लिये किसी अभिशाप से कम नही है लाइसेन्स न बन पाने के कारण मजबूरन या तो उन्हें दलालो का सहारा लेना पड़ता है या फिर प्रशासन द्वारा उत्पीड़ित होकर ई रिक्शा चलाने का अपना रोजगार छोड़ना पड़ रहा है। लेकिन चालको के सामने सबसे बड़ी मजबूरी यह है कि अब वह दूसरा काम करे कौन सा? पुराना रिक्शा बेचकर और जमा पूंजी या फिर कर्जा लेकर बैटरी रिक्शा खरीदकर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे थे लेकिन जिला प्रशासान की सख्ती के कारण अब वह भी नही रहा। एक ओर चिंता का कारण परिवार पालना है तो वही दूसरी ओर कर्जा चुंकाने की भी चिंता है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा एकतरफा कार्यवाही जारी रहती है तो ई रिक्शा चालकों के सामने उनके परिवार पालने का संकट खड़ा हो सकता है चालको का कहना है प्रशासन द्वारा कैम्प लगाकर उनको यातायात नियमो की जानकारी दिलाने के साथ ही ड्राइविंग का प्रशिक्षण देकर उनका लाइसेन्स बनवाया जाए। साथ ही रिक्शा चालको की गरीबी देखते हुए उन्हें रजिस्ट्रेशन व अन्य सभी तरह के कागजातों को तैयार कराने में सरकार की ओर से मदद उपलब्ध कराने के साथ शुल्क में भी राहत बरती जाये।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Advertisement

Advertisement

लोकप्रिय पोस्ट