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मंगलवार, 6 नवंबर 2018

छटा के साथ सतरंगी पैराशूट से उतरेगी जानेमन

फतेहपुर, शमशाद खान । धनतेरस पर्व की खरीददारी के बाद छोटी दिवाली से ही पटाखों की दुकानों में बड़ी संख्या में भीड़ दिखने लगी है। यहां सुबह से ही पटाखा खरीदने वालों की बड़ी संख्या में लोगों की भीड़े देखी गयी। इस बार पटाखा व्यवसायी लोगों को आकर्षित करने के लिए एक से बढ़कर एक पटाखे दीवाली के लिए बाजारे रंग-विरंगी आतिशबाजी से सज गयी है। बच्चो से लेकर हर उम्र के लोगों के लिए अलग-अलग आइटम बिक रहे हैं। आतिशबाजों ने भी कुछ अलग तरह से सामग्री बिक्री के लिए लगायी है जिसमें विस्फोटक तो कम है। लेकिन आसमान व जमीन पर रंगों की आनेाखी छटा विखेरने वाली आतिशबाजी ज्यादा है। बच्चे व युवाओं में आज से ही रंग विरंगे आतिशबाजी की खरीददारी शुरू कर दी है। इस बार बाजार में महंगाई अपना असर दिखा रही है। लेकिन शौकिन लोग महंगे सामान भी खरीदने में नही हिचकीचा रहे हैं। दुकानदानों के अनुसार आतिशबाजी जो पिछले वर्ष चालीस का था वह इस वर्ष अस्सी का बिक रहा है। दीपावली पर जिले में लगभग पचास लाख रूपये के पटाखों पर आग लगेगी। करीब बीस लाख रूपये के पटाखे बाहर से आएगे। जबकि करीब तीस लाख रूपये की आतिशबाजी जिले मे ही तैयार हो रही है। इस आतिशबाजी में जिले के विभिन्न कस्बों में बन रहे देशी पटाखें और जमीन पर पटककर फोड़े जाने वाले पटाखें शामिल है। दीपावली का दिन हों और कोई गली-कुंचा अथवा मकान की छत पटाखें से विहीन रह जाए संभव नही है। दीपावली के लिये खास तौर पर पटाखों का बाजार तैयार हो रहा है। इसमें ऊपर की ओर तेजी से जाकर सीरियल ब्लास्ट करने वाले रंगीन रोशनी के पटाखें हो अथवा अनार या फिर चकरघिन्नी सभी की बड़ी संख्या में आमद हो गई है। शहर के थोक पटाखा व्यवसाइयों के पास से जिले में पटाखा बेंचने वाले आतिशबाजी का सामान खरीदकर ले जा रहे है। पटाखा व्यवसाय में इस बार पिछले साल की तुलना में बीस से तीस फीसदी तक मंहगाई आई है। इसके बावजूद करीब 50 लाख रूपये की आतिशबाजी बिक्री होने का अनुमान लगा रहे है। शहर के एक प्रमुख पटाखा व्यवसायी के अनुसार ब्रांडेड माल कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद एवं आगरा की मंडियों से आता है। ब्रांडेड पटाखों में रंगीन रोशनी वाले पटाखों की धूम रहती है। पटाखा व्यवसाइयों के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में देशी आतिशबाज आतिशबाजी बनाने और बंेचने का काम करते है। ब्राडेड माल करीब 20 लाख रूपये का आयेगा। जबकि देशी आतिशबाजी करीब 30 लाख रूपये तक की तैयारी होकर बिक जाएगी। सस्ती होने एवं तेज आवाज होने के कारण गांवो में देशी आतिशबाजी की अधिक मांग रहती है। जबकि शहर में कम आवाज और रंगीन रोशनी वाले पटाखे अधिक बिकते है। दीपावली पर तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी बनाए रखे। तेज धमाकेदार पटाखें आपकी सुनने की क्षमता को कम कर सकते है। दीपावली का पर्व खुशहाली से मनाने के लिये कुछ सावधांनियां बरतना जरूरी है। पटाखों की तेज रोशनी से आपकी आखों एवं धमाकों से आपकी त्वचा एवं कान के परदों पर बुरा असर पड़ सकता है। सावधानी के तौर पर जहां पटाखें छुड़ायें जा रहे हो। वहां पर एक बल्टी बालू एवं बाल्टी में पानी भरकर रखें। चमक-दमक वाले परिधान की अपेक्षा काटन के कपड़े पहने। पटाखों को दूर से ही जलाएं।  

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