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सोमवार, 26 नवंबर 2018

गीता ज्ञान की गंगा है - मरियम सिद्दीकी

फतेहपुर, शमशाद खान । मात्र बारह वर्ष की उम्र में इस्कान द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित प्रतियोगिता भागवत चैंपियन लीग-2015 में चैंपियन बनकर सम्प्रदाय, मत,वाद या गुट को लेकर लड़ने वालों के लिए मिसाल बनी गीता गर्ल मरियम सिद्दीकी ने कहा है कि हर धर्म को समझना जरूरी है।गीता ज्ञान की गंगा है।प्रधानमंत्री सहित देश के तमाम बड़ी शख्सियत से सम्मानित मरियम अपने जनपद में आने के बाद प्रेस से बात कर रही थीं।
      हाल ही में उनपर लिखी भगवत गीता गर्ल मरियम का लोकार्पण लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने किया है। इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्होंने सभी धर्मों की पुस्तकें भेंट कर चुके हैं।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस,राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,स्टार मिलेनियम आमिताभ बच्चन से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री पाकिस्तान नवाज शरीफ सहित तमाम बड़ी हस्तियों से सम्मानित मरियम सिद्दीकी का मानना है कि सभी धर्मों का अध्ययन की प्रेरणा उनके माता-पिता से मिली है।भागवत गीता के बाद रामचरित मानस का अध्ययन कर रही मरियम को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकारी खर्चे से अयोध्या का भ्रमण करा चुके हैं।मरियम ने बताया कि जब योगी जी ने कहा क्या सेवा कर सकता हूं तो उन्होंने अयोध्या भ्रमण की इच्छा जताई थी।उनके अनुसार वह सारे ग्रंथों का अध्ययन कर मर्म का अनुभूति करना चाहती हैं।
       मरियम ने कहा कि गीता ज्ञान की गंगा है।वह दुनिया को नहीं बदल सकती हैं लेकिन खुद को और परिवार को बदल चुकी हैं।लोग उनसे प्रेरणा ले रहे हैं,बड़े मंचों पर विचार रखने का अवसर दे रहे हैं इतनी छोटी उम्र में बड़ों का आशीर्वाद मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वह कानून की पढ़ाई कर राजनीति में जाना चाहेंगी।मरियम फिलहाल हाईस्कूल की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।उन्होंने मनीष पंचकम से एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि अद्वैतवाद के प्रणेता आदि शंकराचार्य स्नान करके वापस हो रहे थे तभी रास्ते में एक स्वीपर अपने कुत्ते के साथ खड़ा था।शंकराचार्य ने हट जाने को कहा तो स्वीपर ने प्रश्न किया कि वह शरीर हटाये या आत्मा।शंकराचार्य स्वीपर के पैरों में गिर गए।शरीर चाहे किसी का हो पर आत्मा,रूह या प्राण एक परमात्मा का है।गीता कहती है कि परमात्मा को किसी नाम से पुकारा जा सकता है।फिर ये नफरत कैसी? उन्होंने जो भी राशि अब तक मिली उसे जरूरतमंदों में तकसीम करके बहुत खुशी का अनुभव किया।सब लोग अपने धर्म एवं कर्तव्यों का निर्वहन करें तो दुनिया खूबसूरत हो सकती है।

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