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शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

गुरूनानक देव का प्रकाश उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया

फतेहपुर, शमशाद खान । रेलबाजार स्थित गुरूद्वारा श्री गुरू सिंह सभा में गुरूनानक देव जी की 549वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी। गुरूद्वारा में शबद, कीर्तन के साथ-साथ लंगर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शबद, कीर्तन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। बाद में सभी ने एक पंक्ति में बैठकर लंगर छका। लंगर में सभी समुदाय के लोगो की भागीदारी रही। 
गुरूद्वारा के ज्ञानी जी ने बताया कि श्री गुरूनानक देव जी का जन्म कर्मकांड, कुरीतियों, अधंविश्वास तथा अज्ञानता को दूर तथा सच का प्रकाश करने के लिए 15 अप्रैल सन् 1469 को रायभोए की तलवंडी जिला शेखपुरा पाकिस्तान में हुआ। जिसे आज कल ननकाणा साहिब के नाम से भी जाना जाता है। उन्होने बताया कि पिता मेहता कल्याण दास बेदी, माता तृपता जी के पावन उदर से इनका प्रकाश हुआ। हिन्दू मत के अनुयायी इन्हें अपना गुरू मानते थे तथा मुस्लिम समुदाय इन्हें अपना पीर मानता था। सच का प्रकाश करने के लिए लगातार बारह वर्ष प्रचार किया और नारा लगाया न कोई हिन्दू न कोई मुसलमान, अल्लाह सबके पिण्ड परान। मानस की जाति सभै एकै पहचानवों, अव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे, एक नूर से ते जब जग उपजया कौण भले को मंदे। लोगो को गुरू जी ने परमात्मा का सिमरन करने की प्रेरणा दी। नाम जपना कितर करनी, वंड खकना यानी बांटकर खाना गुरू जी के सुंदर उपदेश है। उन्होने बताया कि गुरू जी ने मक्के, मदीने में काबा का दरवाजा फेरकर लोगो को यह ज्ञान कराया कि खुदा सब जगह मौजूद है। गुरू जी के साथ उनके दो मित्र बाला और मर्दाना एक हिन्दू एक मुसलमान थे। सतगुरू नानक परगटया मिटी धुंध जग चावण होया। उन्होने बताया कि गुरू जी से पूछा गया कि हिन्दू बड़ा है या मुसलमान गुरू जी ने जवाब दिया कि हिन्दू हो या मुसलमान इंसान अपने कर्मो से बड़ा होता है। शारीरिक तौर पर गुरू जी की 70 साल 5 माह 7 दिन की अवस्था हुई है। अपने प्रिय मित्र गुरू अंगद देव जी को अपनी ज्योति शक्ति को देकर सन् 1532 में करतारपुर में ज्योति-ज्योति समायें। लंगर का कार्यक्रम देर शाम तक चलता रहा। इस मौके पर संतोष सिंह बग्गा, दर्शन सिंह बग्गा, रजिन्दर सिंह, चानन सिंह, पपिंदर सिंह, ग्रेटी जी, दर्शन सिंह, जितेन्दर पाल सिंह, कमलजीत कौर, जगजीत कौर, गुरूचरन कौर, मंजीत कौर, हरजीत कौर, जसपाल कौर, ईसर कौर, मंजीत कौर खुशी, गुरचरन कौर के अलावा अन्य समुदाय के लोग बडी संख्या में मौजूद रहे।  

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