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मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

स्वच्छता अभियान का सच, कूड़े के ढेर से उठने वाली बदबू से लोगों का जीना दूभर

फतेहपुर, शमशाद खान । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशभर मे स्वच्छ भारत अभियान छेड़ रखा है और सरकार स्वच्छता अभियान के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है लेकिन शहर मे इसकी हकीकत कुछ और ही देखने को मिलती है जहां नगर पालिका की उदासीनता के चलते शहर के कई स्थानों पर इस तरह से कूड़े के ढेर लगे हैं जिसकी तस्वीर सोंचने को मजबूर कर देती है जबकि स्वच्छता को लेकर जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने पालिका प्रशासन को सख्त निर्देश दे रखे हैं जिसके तहत पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि हाजी रजा व सभासदांे द्वारा स्वच्छता अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अनेकों कार्यक्रम कर रैली निकाल कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं लेकिन नगर पालिका जिम्मेदार अधिकारियों एवं सफाई कर्मियों के मनमानी के चलते शहर के कई स्थानों पर कूड़े के ढेर इस तरह से लगे हैं जिसकी बदबू से आसपास के लोग परेशान हैं। बात करें तो इन दिनों जीटी रोड़ पुरानी तहसील के बगल से शिक्षक भवन को जाने वाले मार्ग पर इस तरह से गंदगी का अंबार लगा है जहां कूड़े करकट के साथ-साथ मरे हुए जानवर कई-कई दिनों तक पड़े रहते हैं जिसे कुत्ते उसे नोंचकर खाते हैं जिससे बदबू के कारण आसपास के लोगों का जीवन नर्क बना दिया है जो खुले आम स्वच्छता अभियान की हकीकत बयां कर रही है। बताते चले कि जनपन का एकलौता कूड़ा निस्तारण प्लांट जो पिछले दो साल से बंद पड़ा है और नगर पालिका ने कूडा डाल-डालकर इस पूरे प्लांट को कूडे के ढेर मे तब्दील कर दिया है। बता दें कि करीब 2.50 लाख की आबादी वाले शहर से हर रोज लगभग 50 से 60 टन कूड़ा निकलता है लेकिन प्लांट के बंद होने की वजह से कूड़े का निस्तारण नही हो पाता और तो और नगर पालिका शहर भर मे मरने वाले जानवरों को यूं ही खुले मे छोड़कर चले जाते हैं जिसमे कुत्ते, गाय और भैस सामिल होती हैं जिसे कुत्ते नोंच-नोंच कर खाते हैं और इसकी दुर्गंध की वजह से आसपास हजारों की संख्या मे रहने वाले लोग पूरी तरह से प्रभावित रहते हैं। जबकि सड़क पर मरने वाले जानवरों का बाकायदा जमीन पर गढ्ढा करके गाड़ना होता है लेकिन नगर पालिका खुले मे फेंककर अपना पलरा झाड़ लेती है। वहीं कर्मचारी इस कचरे पर आग भी लगा देते हंै जो लगातार सुलगता रहता है जिसकी वजह से आसपास के इलाके का आबोहवा भी दूषित हो जाता है।

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