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रविवार, 6 जनवरी 2019

जनसुनवाई पोर्टल का मकसद कुछ और हकीकत कुछ अलग ...

सहायक विकास अधिकारी मनमाने तरीके से जनसुनवाई पोर्टल की शिकायतों का कर रहें फर्जी निस्तारण

फतेहपुर,  शमशाद खान। विकास कार्यों से लेकर बुनियादी समस्याओं के समयबद्ध और समुचित समाधान के लिए शासन द्वारा बनाए गए जनसुनवाई पोर्टल अफसरों की आंकड़ेबाजी के कारण मजाक बनती नजर आ रही है। सरकार की मंशा थी कि पोर्टल के जरिए लोगों की भागदौड़ बचेगी साथ ही उन्हें अपने घर और क्षेत्र में ही अपनी शिकायतों का निदान मिल जाएगा पर कमोवेश हर विभाग जनसरोकार से जुड़ी शिकायतों को लेकर उदासीन है। 
सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण का मामला हो या छात्रवृत्ति और खाद्यान्न वितरण में अनियमितताओं की बात या फिर टूटी सड़कों और गंदगी की शिकायत साथ ही ऐसे के हर विभाग से शिकायत पर अफसर और उनके अधीनस्थ ज्यादातर के निस्तारित होने का दावा कर वाहवाही लूट रहे हैं। दरअसल, मातहत दफ्तर में बैठ कर ही समस्याओं का निस्तारण दिखा कर फाइल बन्द कर देते हैं और आला अफसर स्थलीय सत्यापन में रुचि नहीं दिखाते हैं। नतीजतन, शिकायतकर्ता या पीड़ित आदमी निस्तारण के फर्जीवाड़े की फाइल लेकर फिर से दफ्तरों के चक्कर लगाने लगता है। इसी कड़ी में ऐरायां विकास खंड क्षेत्र के सुल्तानपुर घोष ग्राम पंचायत के ग्राम पंचायत सदस्य एन. ए. सिद्दीकी ने बताया कि बीते दिनों 14 अगस्त को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आई.जी.आर.एस.) पोर्टल अर्थात जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से पंचायती राज विभाग को शिकायत किया था कि ऐरायां ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी रामबाबू मौर्या को दिसम्बर 2017 में मुख्य विकास अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) की जियो टैगिंग एवं शौचालय निर्माण  में सुस्ती के चलते निलम्बित किया गया था इसके बावजूद भी न जाने किस सेटिंग - गेटिंग से बहाली हुई और तो और ऐरायां ब्लॉक के साथ ही साथ वही ग्राम पंचायतों में पुनः नियुक्ति भी कर दी गयी जिस पर शिकायत में पूंछा गया था कि नियम व आधार पर पुनः वहीँ नियुक्ति दी गयी ? इसके आगे दूसरा बिंदु लिखा था कि ग्राम पंचायत अधिकारी रामबाबू मौर्या पर फिर से आवास में नाम शामिल करने व शौचालय निर्माण में पैसा मांगने की भी शिकायत हो रही है लेकिन स्थानीय पंचायत प्रशासन मौन है। जिसके बाद शिकायत पंचायती राज विभाग में निदेशक को दर्ज हुई जिसका शिकायत सन्दर्भ संख्या - 40017218021290 जोकि दिनांक 14 अगस्त को दर्ज हुआ था। जिस पर कार्यवाही के क्रम में निदेशक ने 24 सितम्बर को जिला पंचायती राज अधिकारी फतेहपुर को अंतरित करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश दिया जोकि उक्त प्रकरण को डीपीआरओ द्वारा 01 अक्टूबर को प्रेषित करते हुए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) - ऐरायां से आवश्यक कार्यवाही करते हुए आख्या देने को कहा जिस पर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) द्वारा कार्यालय में ही बैठकर बिना शिकायतकर्ता से कोई भी जानकारी लिए या साझा किए हुए मनमाने तरीके से आख्या रिपोर्ट लगाकर मामला निस्तारित कर दिया। आख्या रिपोर्ट में दर्शाया ग्गया कि ग्राम प्रधान एवं अन्य ग्राम वासियों द्वारा जानकारी किया गया जिसमें शौचालय आदि में पैसा मांगने की जो शिकायत की गयी है वह निराधार है । ग्राम प्रधान द्वारा अवगत कराया गया कि सभी शौचालयों की चेक मेरे द्वारा लाभार्थियों को दिया गया है एवं शौचालय भी ग्राम पंचायत द्वारा बनवाये जा रहे हैं जिसमे रामबाबू ग्राम पंचायत अधिकारी की कोई भूमिका नहीं है। इतनी आख्या लिखने के सिवाय किसी प्रमाण / अभिलेख को भी पोर्टल पे नहीं अपलोड किया गया जोकि गलत है। इसके बावजूद भी सबसे बड़ी बात ये है कि शिकायतकर्ता ने दो बिंदुओं पर शिकायत की थी जिसमे सिर्फ आखिरी बिंदु का अधूरा ही जवाब देकर मामला निस्तारित कर दिया । दूसरे बिंदु में शिकायतकर्ता ने आवास में नाम शामिल करने व शौचालय निर्माण के नाम पर पैसा मांगे जाने के जवाब में सिर्फ शौचालय आदि का ही जवाब लिखा गया जबकि आवास में नाम शामिल किये जाने का कोई ज़िक्र नहीं किया गया एवं सबसे पहले तो पहला शिकायती सवाल था कि रामबाबू मौर्या के निलंबन के बाद पुनः नियुक्ति किस आधार पर दी गयी एवं किस नियमानुसार दोषी रहे ग्राम पंचायत अधिकारी को पुनः उसी ब्लॉक ही नहीं बल्कि वही ग्राम पंचायतों में भी तैनाती दी गयी जिस पर कोई जवाब या कागजी कार्यवाही नहीं दिखाई गयी। जिसके बावजूद भी आधी - अधूरी एवं भ्रामक जानकारी देते हुए तथ्यों को छिपाकर मामला निस्तारित किया जाना न्याय संगत नहीं था एवं शासन के निर्देशों के अलावा  जिलाधिकारी द्वारा लगातार सख्त निर्देश भी दिए जा रहे हैं कि कोई भी जनसुनवाई के माध्यम से आयी शिकायत बिना शिकायतकर्ता से मिले या अन्य संसाधनों से संपर्क करके संतुष्टि होने पर ही निस्तारित करावें, कार्यालय बैठकर य मनमाने तरीके से निस्तारण कतई न करें। इसके बावजूद भी उक्त एडीओ पंचायत - ऐरायां बिना किसी आदेशों - निर्देशों का पालन करते हुए एवं सख्त मिजाज जिलाधिकारी के आदेशों को ताक पर रखते हुए मनचाहे तरीके से ऐसी शिकायतों का निस्तारण करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में पीड़ित को ऐसे अधिकारी से काफी नाराजगी है व जिलाधिकारी से कार्यवाही करते हुए न्याय की उम्मीद भी है। हांलाकि इस सन्दर्भ में शिकायतकर्ता ने पुनः एडीओ पंचायत के खिलाफ पंचायती राज विभाग में शिकायत रविवार को दर्ज की है।

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