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गुरुवार, 7 मार्च 2019

कांग्रेस ने राकेश को प्रत्याशी बनाया तो सुखदेव का कट सकता है टिकट

फतेहपुर, शमशाद खान । लोकसभा चुनाव 2019 का समय अब बेहद नजदीक आ गया है। कुछ ही समय में चुनाव आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता लागू कर दी जायेगी। आचार संहिता लागू होने से पहले ही सभी राजनैतिक दल प्रत्याशियों की घोषणा करने में लगे हुए हैं। गठबंधन द्वारा फतेहपुर लोकसभा सीट पर कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है। जबकि हाल ही में समाजवादी पार्टी को बाय-बाय कहकर कांग्रेस का हाथ थामने वाले पूर्व सांसद राकेश सचान भी कांग्रेस से टिकट के प्रबल दावेदार हैं। यदि कांग्रेस ने कुर्मी बिरादरी के ही पूर्व सांसद को टिकट दे दिया तो गठबंधन प्रत्याशी का टिकट कट सकता है! क्योंकि पूर्व में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा था कि यदि जरूरत पड़ी तो प्रत्याशियों के टिकट में फेरबदल भी किया जा सकता है। उधर सूत्रों की माने तो गठबंधन से टिकट पाने की होड़ में क्षत्रिय बिरादरी के एक कद्दावर नेता लगे हुए हैं। 
बताते चलें कि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को शिकस्त देखने के लिए प्रदेश में समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी ने सभी सीटों पर गठबंधन कर लिया है। इस गठबंधन के तहत प्रदेश की 35 सीटों पर बसपा व 34 सीटों पर समाजवादी पार्टी अपने प्रत्याशी उतारेगी। इस गठबंधन के तहत यह भी निर्णय लिया गया था कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर बसपा प्रत्याशी दूसरे व जिन सीटों पर सपा प्रत्याशी दूसरे नम्बर पर थी। उन पर इस बार क्रमशः बसपा व सपा के ही प्रत्याशी लड़ाये जायेंगे। इस निर्णय के तहत फतेहपुर लोकसभा सीट बसपा के खाते में चली गयी थी। बसपा ने अपने पुराने कार्यकर्ता व दो बार बिन्दकी विधानसभा के विधायक रहे सुखदेव प्रसाद वर्मा को लोकसभा प्रत्याशी घोषित किया है। बताते चलें कि सुखदेव वर्मा काफी समय से बसपा की राजनीति करते चले आ रहे हैं और कुर्मी मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। दो बार उन्होने बसपा के टिकट पर विधायकी का ताज पहना है। इसी के चलते बसपा सुप्रीमो ने उन पर भरोसा जताते हुए लोकसभा प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह कुर्मी बिरादरी के ही पूर्व सांसद राकेश सचान की बात की जाये तो वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राकेश सचान पर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया था और इस भरोसे पर खरा उतारते हुए राकेश सचान ने विजयश्री हासिल कर पहली बार इस सीट पर सपा का परचम फहराया था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पुनः समाजवादी पार्टी ने राकेश सचान को प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन इस बार मोदी लहर में राकेश सचान तीसरे पायदान पर चले गये थे। हार के बावजूद वह इस क्षेत्र में लगातार भ्रमण करते रहे और जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते रहे। इतना ही नहीं लोगों के सुख व दुख में भी वह पहुंचते रहे। जिसके चलते उनकी लोकप्रियता बढ़ती चली गयी। लेकिन गठबंधन के चलते उन्हें इस बार सपा से टिकट नहीं मिल पाया और उन्होने समाजवादी पाटी्र को बाय-बाय करते हुए कांग्रेस का हाथ थाम लिया। जानकारों का मानना है कि राकेश सचान ने कांग्रेस से टिकट मिलने के आश्वासन पर ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। यदि ऐसा हुआ तो कुर्मी बिरादरी के ही दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में आ जायेंगे और दोनों का इस चुनाव में जीत पाना संभव नहीं होगा। ऐसी स्थिति में बसपा सुप्रीमो मायावती एक दांव और खेल सकती हैं। क्योंकि पूर्व में मायावती का कथन था कि चुनाव का समय नजदीक आते-आते यदि स्थिति के अनुसार प्रत्याशी फिट नही बैठा तो विचार-विमर्श कर परिवर्तन भी किया जा सकता है। यदि इस कथन पर गौर किया जाये तो राकेश सचान को कांग्रेस से टिकट मिलने पर गठबंधन प्रत्याशी सुखदेव वर्मा पर तलवार लटक सकती है और उनका टिकट कट सकता है! बसपा सुप्रीमो इस बार किसी भी तरह का रिस्क चुनाव में नहीं लेना चाहती हैं। उधर सूत्रों की मानें तो गठबंधन प्रत्याशी घोषित होने के बावजूद अभी भी लोग टिकट के लिए हाईकमान की दौड़ लगा रहे हैं। इस दौड़ में क्षत्रिय बिरादरी के एक कद्दावर नेता भी शामिल हैं। यदि समीकरण के हिसाब से टिकट परिवर्तन हुआ तो बसपा सुप्रीमो क्षत्रिय बिरादरी के इस नेता को प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतार सकती हैं। अब देखना यह होगा कि समय का ऊंट किस करवट बैठेगा।

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