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रविवार, 3 मार्च 2019

महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर निकली शिव संदेश रथ यात्रा

फतेहपुर, शमशाद खान । महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ज्वालागंज की ओर से भव्य शिव संदेश रथ यात्रा निकाली गयी। जिसमें नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाते हुए फूल मालाओं से स्वागत किया। यह शोभा यात्रा देव गार्डेन वर्मा चैराहे से प्रारम्भ हुयी। जहां तमाम श्रद्धालुओं ने शिव दर्शन कर प्रवचन का लाभ उठाया। 
ब्रम्हाकुमारी नीरा बहन ने बताया कि परमात्मा शिव के ज्योर्तिबिन्दु स्वरूप को सभी धर्म की आत्माएं नूरे खुदा, गाड इज लाइट, सबका मालिक एक कहकर पुकारती हैं। क्योंकि परमात्मा एक ज्योर्तिबिन्दु ळें। जिनका यादगार द्वादश ज्योर्तिलिंगम के रूप में प्रसिद्ध है। यदि हम किसी शरीरधारी के रूप में परमात्मा को याद करते हैं तो उस रूप को सभी विश्व की आत्माएं स्वीकार नहीं करतीं। ज्योतिबिन्दु स्वरूप को सभी मानते हैं। जब संसार में पापाचार, भ्रष्टाचार और विकारों का वर्चस्व बढ़ जाता है तब परमात्मा शिव इसी सृष्टि में प्रजापिता ब्रम्हा के मानवीय शरीर में प्रवेश करके सभी को मूल्यनिष्ठ एवं राजयोगी जीवन जीने की शिक्षा देकर मानव को देव पद की प्राप्ति कराते हैं। यह वही समय चल रहा है जब संसार में घोर पापों तथा विकारों की रात्रि छाई हुयी है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ने आज मानव को बंदी बना लिया है। इन भूतों से छूटने के लिए हमें स्वयं को ज्योतिस्वरूप आत्मा समझकर उसी रूप में उन्हें याद करके जन्म जन्मातंर के पापों का नाश करना है। शिव एक अक, धतूरा और बेल के बजाये अब जरूरी है इन बुराईयों का सच्चा-सच्चा हवन करें। शिव पर चढ़ायें और इन विकारों से दूर रहने का व्रत रखें। उन्होने बताया कि शिव और शंकर में भी महान अंतर है। शिव निराकार परमात्मा और शंकर आकारी देवता हैं वह कल्याणकारी और वह विनाशकारी हैं। शंकर जी भी शिव केे ध्यान में मग्न रहते हैं। दोनों में नाम और कर्तव्य अलग होने के कारण हम शिवरात्रि कहते हैं। शंकर रात्रि नहीं, शिव पुराण कहते शंकर पुराण नहीं, ओम नमः शिवाय करते ओम नमोंः शंकराय नहीं, शिववालय कहते शंकरालय नहीं, शिव चालीसा कहते शंकर चालीसा नहीं। दोनों में ही महान अंतर है। अब समय आ गया है सत्यम, शिवम्, सुन्दरम के वास्तविक स्वरूप को पहचान कर स्वयं को शरीर नहीं आत्मा समझकर उस शिव ज्योर्तिबिन्दु परमात्मा की याद से स्व परिवर्तन करके विश्व परिवर्तन करने का। अभी नही ंतो कभी नहीं। इस अवसर पर देव गार्डेन वर्मा चैराहे पर भारत के सुप्रसिद्ध 12 ज्योर्तिलिंगम की भव्य झांकी शिवरात्रि के दिन प्रातः सात बजे से सांय सात बजे तक सजी रहेंगी। इसके अलावा सांयकाल पांच बजे से शिव अवतरण समारोह एक शाम शिव पिता के नाम से कार्यक्रम में मथुरा के कलाकारों द्वारा तांडव एवं बरसाने की होली भी होगी। 

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