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शनिवार, 16 मार्च 2019

मान्यवर कांशीराम का जन्म दिवस मनाया गया.....

गोरखपुर, सुनील चतुर्वेदी। मान्यवर कांशीराम महज एक विद् ही नहीं थे वरन् सामाजिक संरचना को सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने में भी उनका बहुत बड़ा था। समाज में हर वर्ग को विकास के लिए समान अवसर प्राप्त हो इसकी चिन्ता उन्हें थी और वे लगातार प्रयासरत भी रहे क्योंकि उनका सम्पूर्ण जीवन ही संघर्ष में गुजरा था। यह उद्गार मान्यवर कांशीराम स्मृति कल्याण परिषद के तत्वावधान में  कांशीराम जी के 85 ,वे जन्म दिवस(15:03:1934)  पर  स्थानीय अम्बेडकर भवन,विकासनगर में  आयोजित स्मृति कार्यक्रम  में मुख्य अतिथि प्रमुख समाजसेवी एवं बसपा के वरिष्ठ नेता डॉ0 अशोक कुमार श्रीवास्तव ने व्यक्त किये।
डॉ0 अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मान्यवर कांशीराम की प्रासंगिकता अभी भी बरकरार है और जब तक उनके समग्र्र्र्र विचारों का गहन अध्ययन कर राष्ट्रव्यापी चर्चा नहीं करायी जाती तब तक कांशीराम जी के बारे में कुछ भी निष्कर्ष निकाल लेना हमारी भूल होगी। वास्तविकता भी यही है कि उनके विचार अभी भी जनमानस तक गहरी पैठ नहीं बना सके हैं। सम्भवतः यही कारण है कि वे एक वर्ग विशेष में ही लोकप्रिय हो सके हैं। डॉ0 अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि  कांशीराम ही वह शख्स हैं जिन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में बहुजन हिताय एक ठोस कदम उठाया और आज बहुजन ही क्यों सर्वजन की सहभागिता हर क्षेत्र में होने लगी है  बसपा का अस्तित्व आज जो बरकरार है उसकी नींव मान्यवर कांशीराम ने ही रखी। उन्होंने समाज के दबे-कुचले लोगों को ऊपर उठाने का रास्ता साफ किया और समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिले इसके लिए मजबूत आधार प्रदान किया।  
अध्यक्षता करते हुए डॉ0 चन्द्र भान ने कहा कि  कांशीराम सामाजिक कुरीतियों से पीड़ित होने के बावजूद सर्व समाज के कल्याण में आजीवन लगे रहे और भारतीय संविधान को धर्म निरपेक्ष स्वरूप प्रदान करने में अपनी महती भूमिका निभायी। तत्कालीन सामाजिक परिवेश में दलित एवं पिछड़े वर्गों पर हो रहे अत्याचार से वे बहुत ही व्यथित थे और अपनी योग्यता और अनुभवों के द्वारा भरसक एक ऐसा माहौल तैयार करना चाहा जिससे समाज में समानता, एकरूपता लायी जा सके। इसके लिए उन्होंने समाज के निम्नतम स्तर के लोगों के लिए भी व्यवस्था दी। लेकिन सत्ता की राजनीति के इस दौर में उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। आवश्यकता है कि उनके विचारों का गहन अनुशीलन किया जाय।
चन्द्र मोहन व् मनोज कुमार ने कहा कि मान्यवर  साहब का विचार था कि देश का हर नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और उसे पाने के लिए संघर्ष करे। साथ ही यह भी कि सभी शिक्षित होकर समाज व देश की प्रगति के लिए एक होकर काम करने को तत्पर हों।
विजय कुमार व रमेश चन्द्र ने कहा कि आज एक ओर जहॉं हिंसा, आतंकवाद का दौर जारी है वहीं मान्यवर कांशीराम के विचारों की प्रासंगिकता से कतई इंकार नहीं किया जा सकता। आखिर आतंकवाद और हिंसा की जड़ कहॉं है इसकी खोज कर उसे समूल नष्ट करने की जरूरत है। हमें अपने में उपजे ऊॅंच-नीच और छोटे-बड़े का भेद भाव समाप्त करना चाहिए। 
कार्यक्रम  के प्रारम्भ में डॉ0 अशोक श्रीवास्तव ने मान्यवर के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम  का सफल संचालन एडवोकेट भरत लाल ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रमोद सिहं ,शिव प्रकाश पाण्डे राजेश सिंह,एडवोकेट अजित'गोपाल जी', राजेश श्रीवास्तव, सिध्दार्थ, ओम प्रकास गुप्ता, अनिल मिश्रा, शिव प्रकाश ,प्रवीन सिहं,मानवेन्द्र सिंह,अनुपम, पुनित ,सर्वेश्वर सिह, राम श्रीवास्तव,पवन कुमार,चन्द्र प्रकाश, अरुण सोनकर, विजय कुमार, श्रवण जायसवाल, अनिल गुप्ता, अमित , रमेश  गौतम, चन्द्र शेखर भारती, दिनेश भारती, विनोद गौतम, कपिल देव यादव, हरिश्चन्द्र शर्मा,हरि प्रसाद, रामकेवल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।                                                 
                                                                                  
                                                                (प्रकाश चन्द्र गौतम)

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