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सोमवार, 11 मार्च 2019

क्षत्रिय बिरादरी से परेशान दलित परिवार ने दिया धरना

फतेहपुर, शमशाद खान । जहां एक ओर सरकारें देश को स्मार्ट बनाने के प्रयासों में जुटी हैं। वहीं आजादी के बाद से अब तक कई गांवों में आज भी जातिवाद का जहर लोगों की रगांे में दौड़ रहा है। इसकी एक बानगी बकेवर थाना क्षेत्र के कंधरपुर गांव में देखने को मिली। क्षत्रिय बिरादरी से परेशान एक दलित परिवार ने कलेक्ट्रेट आकर डेरा डाल दिया है। परिवार की महिलाएं, पुरूष एवं बच्चे कलेक्ट्रेट में बाकायदा खाना भी बना रहे हैं। पीड़ित परिवार ने बताया कि क्षत्रिय बिरादरी के लोगों ने उनके कुएं को पाटकर अवैध कब्जा कर लिया है और शौचालय का निर्माण भी नहीं करने दे रहे हैं। इसकी शिकायत कई बार जिला एवं पुलिस प्रशासन से की गयी। लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला। जिससे आजिज आकर उन्हें यहां आना पड़ा। पीड़ितों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर न्याय किये जाने की मांग की। 
बकेवर थाना क्षेत्र के कंधरपुर गांव निवासी जागन अपने पूरे परिवार की महिलाओं व बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट आ गया और यहीं पर डेरा जमा लिया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि गांव के ही बृजेश सिंह, विनोद सिंह पुत्रगण जगतपाल सिंह ने उनके बुजुर्ग राम प्रसाद पासी द्वारा बनाये गये कुंए को पाट दिया है और धीरे-धीरे जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। यह भी बताया कि सरकार द्वारा चलायी जा रही शौचालय योजना के तहत उन्हें पैसा आवंटित हुआ था। जिस जमीन पर वह शौचालय का निर्माण कराना चाह रहे थे वहां भी क्षत्रिय बिरादरी के लोग शौचालय निर्माण नहीं होने दे रहे हैं। पीड़ित परिवार ने बताया कि क्षत्रिय बिरादरी के लोग उन्हें हर तरह से प्रताड़ित कर रहे हैं। जिससे वह गांव छोड़कर चले जायें। बताया कि कई बार बिन्दकी तहसील में उपजिलाधिकारी सहित कोतवाली में शिकायती प्रार्थना पत्र दिये गये। लेकिन प्रशासन द्वारा आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी। जिससे आजिज आकर उन्होने यह कदम उठाया है। पीड़ितों ने बताया कि वह बेहद गरीब हैं और मजदूरी करके अपना व अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। लेकिन जातिवाद के जहर के आगे उन्हें पिसना पड़ रहा है। पीड़ितों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर न्याय दिलाये जाने की मांग की। जिस पर जिलाधिकारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके साथ अन्याय नहीं होगा। पीड़ित परिवार में जागन के साथ रूमी, सुदेवी, राम प्यारी, पूजा, पुष्पलता, आशा, जयपाल सिंह, राज किशोर आदि मौजूद रहीं। 

1 टिप्पणी:

  1. सबसे पहले तो शमशाद जी आपका ह्दय से आभार आपने इस महत्वपूर्ण खबर को जगह दी
    हमारे समाज से जातिवाद का जहर इतनी आसानी से जाने वाला नही है ये व्यक्तिगत उस परिवार की पराजय नही है राष्ट्र के रुप मे हम सब की पराजय है ,वैसे तो जिले मे बहुत अखबार हैं किन्तु किसी के लिये यह खबर प्रासंगिक नही इससे बुरी बात पत्र करिता के लिये क्या होगी क्या गणेश शंकर जी ने इसी का सपना देखा था आज उनकी आत्मा क्या सोचती होगी
    यह घटना आजाद भारत के 70साल बाद हमारी समाजिक असफलता को दर्शाती है, इक राष्ट्र के रुप मे हम कितने कमजोर हैं स्पष्ट करती है हमारे छ्दम राष्ट्रवाद को इंगित करती है
    हम बेहद शर्मिन्दा हैं

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