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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

गर्मी के दस्तक देते ही पेयजल संकट से जूझने लगे लोग

फतेहपुर, शमशाद खान । मार्च माह की शुरूआत के साथ ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। तेज धूप के साथ-साथ अब तो दिन भर गर्म हवाओं के थपेड़े भी चलने शुरू हो गये हैं। गर्मी के दस्तक देते ही शहर सहित ग्रामीणांचलों में पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है। इस समस्या से कई इलाके जूझ रहे हैं। शहर के अलावा ग्रामीणांचलों में पानी के साधन नाकाफी साबित हो रहे हैं। जलस्तर घटने से कई हैण्डपम्पों ने जवाब दे दिया है। लोगों का कहना रहा कि गर्मी की शुरूआत से पहले ही जिला प्रशासन को पेयजल समस्या को दृष्टिगत रखते हुए कदम उठाने चाहिए। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया जाता। जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 
बताते चलें कि प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम में जिले में पेयजल का घोर संकट उत्पन्न हो जाता है। इस समस्या से निजात दिलाये जाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाये जाते। जिससे लोगों को इस गम्भीर समस्या से जूझना पड़ता है। शहर क्षेत्र की बात की जाये तो वैसे ही यहां इण्डिया मार्का हैण्डपम्पों की बेहद कमी है। जो हैण्डपम्प इलाकों में लगे हैं वह भी धीरे-धीरे अब जवाब दे रहे हैं। शहर के प्रमुख मार्गों जीटी रोड, बिन्दकी बस स्टाप रोड, कचेहरी रोड, पटेलनगर चैराहे से आईटीआई रोड, वर्मा तिराहा से राधानगर रोड पर जो हैण्डपम्प विभाग द्वारा लगाये गये हैं उनमें अधिकतर हैण्डपम्प ठूंठ बने खड़े हैं। इतना ही नहीं सार्वजनिक स्थानों पर लगे नल की टोंटियां भी सूखी पड़ी हुयी है। जिससे राहगीरों को इस भीषण गर्मी में पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। इसके अलावा बस स्टाप व रेलवे स्टेशन के बाहर भी लोगों को पानी की समस्या से जूझते हुए देखा जा सकता है। यहां यात्रियों को जब शिद्दत की प्यास लगती है तो वह मिनरल वाटर की बोतल खरीदने के लिए विवश हो जाते हैं। क्योंकि जिला प्रशासन द्वारा इन सार्वजनिक स्थलों पर भी पेयजल संकट का समाधान कभी नहीं किया जाता। जबकि सरकार द्वारा समय-समय पर निर्देश दिये जाते हैं कि गर्मी की शुरूआत से पहले ही पानी उगलने वाले साधनों को दुरूस्त कर लिया जाये। जवाब में विभाग द्वारा कागजों पर साधनों को दुरूस्त करने की कार्रवाई की जाती है। जमीनी स्तर पर काम कभी नही किया जाता। जिससे लोगों को पेयजल की गम्भीर समस्या से जूझना पड़ता है। शहर क्षेत्र में लगे जलकल विभाग के नलकूप भी पानी उगलने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। सुबह के समय लोगों को पानी मिल जाता है तो पूरा दिन पानी के दर्शन नहीं होते। अगर सभी वार्डों में दो-दो या तीन-तीन इण्डिया मार्का हैण्डपम्प लगा दिये जायें तो इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है। लेकिन नगर पालिका परिषद द्वारा इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया जाता। इसी तरह ग्रामीण इलाकों की बात की जाये तो यहां की स्थिति शहर क्षेत्र से कहीं अधिक बदतर है। तालाब व पोखर सूखे पड़े हुए हैं। इनमें धूल उड़ रही है। गांव के गलियारों में लगे हैण्डपम्प भी ठूंठ बने हुए हैं। कई वर्षों पहले यह हैण्डपम्प जवाब दे चुके हैं। बेचारे ग्रामीण बार-बार इन हैण्डपम्पों को दुरूस्त कराने की आवाज उठाते हैं। लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला शायद कोई नहीं है। जिसके चलते ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी भरकर लाना पड़ता है। महिलाएं व बच्चे सुबह से ही इस काम को अंजाम देने में जुट जाते हैं। कई-कई किलोमीटर दूर लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। यदि जिला प्रशासन गर्मी शुरू होने से पहले ही इस दिशा में काम शुरू कर दे तो काफी हद तक पेयजल संकट से लोगों को निजात दिलायी जा सकती है। अभी तो गर्मी की शुरूआत है तब हालात बद से बदतर हो रहे हैं और जब गर्मी अपने पूरे शबाब पर पहुंचेगी तो यह समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर लेगी। 

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