AMJA BHARAT एक वेब न्‍यूज चैनल है जिसे कम्‍प्‍यूटर, लैपटाप, इन्‍टरनेट टीवी, मोबाइल फोन, टैबलेट इत्‍यादी पर देखा जा सकता है। पर्यावरण सुरक्षा के लिये कागज़ बचायें, समाचार वेब मीडिया पर पढें

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

लोकसभा चुनाव में दरक सकती है दलों की जमीन

फतेहपुर, शमशाद खान । लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद से मुख्य राजनैतिक दलों द्वारा अपने अपने प्रत्याशियों की घोषणा की जा चुकी है 49 लोकसभा क्षेत्र फतेहपुर से सपा-बसपा गठबन्धन द्वारा बसपा कोटे से पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद वर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है जबकि कांग्रेस पार्टी से सपा छोड़कर आये पूर्व सांसद राकेश सचान मैदान में है। जबकि भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक बार फिर से निवर्तमान सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति पर दांव लगाना कही न कहीं इस बात को दर्शाता है कि स्थानीय विरोध के बाद भी जनपद में मोदी के चेहरे के नाम पर ही वोट माँगा जायेगा। एक ओर कांग्रेस पार्टी समेत समूचा विपक्ष सरकार की नाकामियां गिना रहा है तो वही दूसरी ओर सरकार अपनी योजनाओं की उपलब्धियां। बतौर सांसद यदि जिले के विकास की योजनाओं की बात की जाय तो मेडिकल कालेज का शिलान्यास और रेल पार्क की परियोजना का शुरू होने का भरम मात्र है। केंद्र एवं प्रदेश में भाजपा सरकार होने के बाद भी आज भी जनपद के कई गाँव बेहद पिछड़े हैं। जहाँ बुनियादी सुविधाये सड़क, पानी व बिजली तक उपलब्ध नही हो सकी। सरकार द्वारा गरीबो के नाम पर पात्र गृहस्थी, आयुष्मान भारत उज्ज्वला गैस योजना, दीन दयाल विद्युतीकरण, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास योजना, शौचालय योजना समेत अनेको योजनाओं का संचालन किया जा रहा लेकिन लगभग 30 लाख की आबादी वाले जनपद में जमीनी हकीकत कुछ और ही है और आज भी विकास व रोजगार परक योजनाओं की दरकार है। सांसद द्वारा गोद लिए गाँव की हालत तक नही सुधर सकी। बहरहाल इस लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी स्थानीय विकास के मुद्दों की जगह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के नाम पर चुनाव मैदान में है तो वही कांग्रेस व सपा-बसपा गठबन्धन सरकार की नाकामियों को गिना रहा है। कांग्रेस गरीबों के लिये 72 हजार रुपये देने वाली न्याय निधि और मार्च 2020 तक 22 लाख सरकारी पदों पर नियुक्तियों का वादा कर रही है। सपा बसपा गठबन्धन मोदी सरकार की आलोचनाओं के साथ सरकार की जनता से किये गए वादाखिलाफी को मुद्दा बना रही है। लोकसभा चुनाव में सभी दलों का अपने अपने बोट बैंक का दावा है भाजपा जहाँ स्वर्ण आरक्षण का श्रेय लेना चाहेगी जबकि व्यपारी वर्ग साहू, बनिया एवं वैश्य बिरादरी के आलावा केंद्रीय मंत्री के स्वजातीय, बैकवर्ड दलितों के भी साथ होने का दावा कर रही है। जबकि सपा अपनी पार्टी के बेस वोट मुस्लिम-यादव समेत सवर्ण बैकवर्ड एव दलित वोट के आधार पर अपने को मजबूत बता रही है। वही बसपा दलित वोटो एव प्रत्याशी दो बार के विधायक रहे सुखदेव प्रसाद वर्मा की लोकप्रियता उनके स्वजातीय वोट बैंक, मुस्लिम मतदाताओ व समाजवादी पार्टी के वोट बैंक के भरोसे चुनाव जीतने का दावा कर रही है। जिले में नाम मात्र का संगठन रखना वाली कांग्रेस पार्टी भी इस बार के लोकसभा चुनाव में दमदार स्थिति में टक्कर में दिखाई दे रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जहाँ सीधे प्रधानमंत्री से टक्कर लेते हुए दिखाई दे रहे है और उन पर जवाबी हमले करते हुए सरकार को कटघरे में घेरने में लगे हुए है। वही प्रियंका गांधी के राजनैतिक मैदान में आकर पार्टी ज्वाइन करना और प्रदेश में पार्टी को मजबूती देने के लिये प्रचार की कमान संभालने से कांग्रेसियों में जबरजस्त उत्साह है। कांग्रेस ने  सपा के पूर्व सांसद राकेश सचान को चुनाव मैदान में उतारा है। दो बार विधायक रहे व 2009 में जनपद से सांसद रहे राकेश सचान को समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओ में गिना जाता था। इन्हें नेताजी मुलायम सिंह यादव व शिवपाल यादव का बेहद करीबी नेताओ में शामिल किया जाता था। मोदी लहर के कारण राकेश सचान 2014 का चुनाव में केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और बसपा प्रत्याशी अफजल सिद्दीकी से पराजित होकर तीसरे नम्बर पर रहे थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में जनपद में 58.55 फीसदी मतदान हुआ था जिसमे भारतीय जनता पार्टी की साध्वी निरंजन ज्योति ने बसपा के अफजल सिद्दीकी को एक लाख 87 हजार 206 मतो के भारी अंतर से हराकर सीट हासिल की थी। साध्वी निरंजन ज्योति को 4,85,994 जबकि बसपा के अफजल सिद्दीकी को 2,98,788 वोट मिले थे। समाजवादी पार्टी के राकेश सचान 1,79,724 मत हासिल करते हुए तीसरे स्थान पर रहे जबकि कांग्रेस प्रत्याशी रही ऊषा मौर्य मात्र 46,588 वोटो पर सिमट गयी। हलाकि इस बार परिस्थिति बदली है। जनता मोदी सरकार के पांच साल का शासन देख चुकी है। सरकार गुड गवर्नेस, अपनी योजनाओं, पाकिस्तान में की गयी सर्जिकल स्ट्राईक, आतंकवादियों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई को मुद्दा बनाकर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के नाम पर दूसरा कार्यकाल मांग रहा है जबकि विपक्ष सेना के पराक्रम का श्रेय सरकार की जगह सेना को देते हुए देश का पैसा लेकर विदेश भाग गए उद्योगपतियो पर कार्रवाई न करने, पाकिस्तान के नेशनल डे पर प्रधानमंत्री इमरान खान को बधाई देने, राफेल समेत अन्य मुद्दों पर घरते हुए लोक लुभावन योजनाओं का खुलासा कर वोट हासिल करना चाह रही है। सपा-बसपा गठबन्धन बेरोजगारी, मंहगाई, धार्मिक ध्रवीकरण को रोकने, विकास न होने, सरकार की नाकामियां व वादाखिलाफी को आधार बनाते हुए लोकसभा चुनाव में प्रदेश में सबसे बड़े दल के रूप में उभरना चाह रही है। 17 वीं लोकसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। सड़क, बिजली, पानी, नहरों की सफाई, उनमें पानी न आना, सरकारी ट्यूबवेल की दुर्दशा, अवैध खनन, यमुना नदी के कटान के कारण कालिंदी में समा चुके किसानों के खेत जैसे मुद्दे इस चुनाव से गायब है। स्थानीय प्रत्याशी होने की कभी मांग करने वाले भाजपा व कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम पर शांत है। हलाकि बसपा ने सुखदेव प्रसाद वर्मा व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी द्वारा महेश चंद्र साहू जैसे स्थानीय प्रत्याशियों को टिकट दिया है। जनपद में कांग्रेस भाजपा और गठबन्धन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। ऐसे में अपने अपने वोटबैंक पर दावा करने वाले नेता अभी तक जनता के मूड पर एकतरफा भरोसा नही कर पा रहे है। उन्हें वोट बैंक के छिटकने व राजनैतिक भूमि के दरकने का भय सता रहा है। लोकसभा चुनाव में राजनीति का ऊँट किस करवट बैठेगा और इस बार सांसद बन कौन दिल्ली पहुँचता है यह तो आने वाला समय ही तय करेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Advertisement

Advertisement

लोकप्रिय पोस्ट