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मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

रामनाम की मणि से जीवन में प्रकाष - युवराज स्वामी

चित्रकूट, ललित किशोर त्रिपाठी । श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट बडी गुफा जानकीकुण्ड चित्रकूट में परमपूज्य रणछोडदास जी महाराज एवं भगवान कामतानाथ के सानिघ्य में रामचरित मानस का ज्ञान रूपी यज्ञ हो रहा है। कथा के आठवें  दिन कथावाचक युवराज स्वामी महाराज श्री बद्रीप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने बताया कि रामनाम की मणि जिसके जीवन में है उसी का जीवन प्रकाषवान रहता है। जिसके जीवन में रामनाम की मणि नहीं है उसके जीवन में कभी प्रकाष नहीं रह सकता। यदि रामराज चाहते हैं तो अपने विचारों में राम का चरित्र लाइये। मानस कथा हमारे जीवन का आदर्ष है उन आदर्षो पर चल कर ही रामराज पाया जा सकता है। सम्पूर्ण मानव जाति को हृदय से लगाना ही रामराज है। जिस प्रकार भगवान ने निशादराज केवट को गले लगाकर गंगा तट से रामराज की षुरुआत की। महाराज जी ने बताया कि यदि आप में त्याग करने का सामर्थ है तो संसार आप पर सब कुछ निछावर कर सकता है। हृदय में सच्चा प्रेम होगा तो भगवान आपके हृदय रूपी नाव में अवष्य बैठेगे। आज महाराज जी ने भगवान राम के वनवास का प्रसंग सुनाते चित्रकूट की महिमा का गुणगान सुनाया। उन्होने बताया कि चित्रकूट से बडा तीर्थस्थल और कोई नहीं है जहां भगवान ने वनवास के साढे बारह वर्श व्यतीत किये। चित्रकूट ऐंसा पावन तीर्थस्थल है जहां भगवान अपने साकेतधाम को छोडकर लीला बिहार करने आये। यहां का कण-कण हमारे जीवन के लिये कल्याणकारी है क्यों कि यहां का हर एक कण राम के चरणरज से धन्य है। ''चित्रकूट परमधाम जहां बसत श्रीराम'' । प्रवचन के पूर्व बधाई गीतों के साथ दोपहर 12 बजे भगवान राम का जन्मोत्सव बडे ही धूमधाम से हशोल्लास के साथ मनाया गया। इस षुभअवसर पर महाराज जी ने कहा कि हम तो चाहते हैं कि वर्श के 365 दिन भगवान का जन्म हो, प्रतिदिन उनके जन्मोत्सव मनाने का अवसर मिले। मन में भगवान के प्रति प्रेम का भाव होना चाहिये उस भाव में भगवान का बैठाने की कोषिष करिये। जन्मोत्सव के षुभ अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष विषदभाई मफतलाल, श्रीमती बिलोनी बेन मफतलाल, श्रीमती रूपल मफतलाल, ट्रस्ट के ट्रस्टी डा0 बी0 के0 जैन, श्रीमती ऊशा जैन, डा0 इलेष जैन, ट्रस्टी डा0 व्ही0एस0 जोबनपुत्रा, श्री एन0 बी0 लोहानी, श्री गोवर्धन भाई उपाध्याय, श्री मनोज पाण्डया, भारतीबेन, रमाबेन सहित हजारों की संख्या में भक्तों ने भगवान के जन्मोत्सव का आनंद उठाया। 

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