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शनिवार, 11 मई 2019

शनिवार को भी सूर्य देवता ने उगली आग, लोग रहे बेहाल

फतेहपुर, शमशाद खान । गर्मी की बढ़ती तपिश के साथ-साथ तालाबों, कुओं एवं हैण्डपम्पों का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे गिर रहा है। जिससे ग्रामीणों एवं पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट गहराना शुरू हो गया है। तेज गर्म हवाओं के थपेड़ों की वजह से मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। भीषण गर्मी का प्रकोप अप्रैल माह की शुरूआत में ही नजर आने लगा था। जो मई माह की शुरूआत के साथ और बढ़ गया। भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार जारी है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूल से वापस घर जाने वाले नौनिहालों को उठानी पड़ रही है। तेज धूप के बीच मासूम बच्चे घर पहुॅचते है जिससे उसकी भी तबियत बिगड़ सी जाती है। तेज गर्मी में पानी ही एकमात्र सहारा है, लेकिन ग्रामीणांचलों के ज्यादातर हैण्डपम्पों के खराब होने व शहर में सार्वजनिक नलों की कमी के कारण आने-जाने वाले राहगीरों को गला तर करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। 
बताते चलें कि धूप के बढ़ने के साथ ही बीमारियों ने भी अपने पांव पसारने शुरू कर दिये है। हालत यह है कि गर्मी की चिलचिलाती तेज धूप और गर्म हवाओं के तेज थपेड़ों का अवाम पर बुरा असर पड़ रहा है। मौसम की मार से मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। इस समय बुखार, खसरा, उल्टी-दस्त के साथ-साथ चेचक का प्रकोप भी जारी है। शरीर में पानी की कमी की वजह से अन्य बीमारियां भी सिर उभार रही है। पेट के मरीजों की संख्या मंे भी इजाफा हो रहा है। संक्रामक बीमारियों से भी जनता परेशान है। चर्म रोग ने भी सिर उभारना शुरू कर दिया है। गर्मी के प्रकोप से डायरिया के मरीजों में सबसे अधिक इजाफा हुआ है। गर्मी में चिलचिलाती धूप दिक्कत का सबब बन गयी है। लापरवाही में लू का शिकार होने की आशंका है। गर्मी में उल्टी, दस्त, बुखार और सिर दर्द के मरीजों की संख्या मंे इजाफा होता जा रहा है। जिला अस्पताल से लेकर निजी नर्सिंग होमों तक ऐसे मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। जिला चिकित्सालय में इन मर्जों से प्रभावित मरीजों का तांता लगा हुआ है। उधर पड़ रही भीषण गर्मी में जलस्तर नीचे जाने की वजह से ग्रामीणांचलों के ज्यादातर हैण्डपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया है। ग्रामीणों के सामने इस समय पेयजल संकट सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। लोगों का कहना है कि गांव में स्थापित कुएं पहले ही जवाब दे चुके थे, अब हैण्डपम्पों का एकमात्र सहारा है और वह भी अब सिर्फ हवा दे रहे है। प्रधानों की लापरवाही के चलते मई माह बीतने को है और ऐसे में अभी तक तालाबों से धूल उड़ रही है। जिससे इंसान तो इंसान पशु-पक्षी भी पानी की एक-एक बूॅद के लिए तरस रहे है।

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