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रविवार, 12 मई 2019

मतगणना से पहले प्रत्याशियों की जीत हार की सज रही बिसात

फतेहपुर, शमशाद खान । लोकसभा चुनाव के मतदान के बाद अभी मतगणना शेष है और प्रत्याशी व उनके समर्थकों के मध्य जीत हार का गुणा भाग लगा रहे हैं। लोकसभा चुनाव में जहाँ सपा, बसपा रालोद गठबन्धन, भाजपा व कांग्रेस समेत 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। जिनके भाग्य का फैसला ईवीएम में बन्द हो चुका है। सपा बसपा रालोद से पूर्व विधायक सुखदेव प्रसाद वर्मा उम्मीदवार है। जबकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से निवर्तमान सांसद व केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति एक बार फिर से प्रत्याशी बनाई गई हैं। जबकि कांग्रेस पार्टी से पूर्व सांसद राकेश सचान चुनाव मैदान में है। राकेश सचान घाटमपुर से दो बार विधायक व समाजवादी पार्टी के टिकट से 2009 में जनपद से सांसद रह चुके है। जबकि गठबन्धन उम्मीदवार सुखदेव प्रसाद वर्मा बसपा के टिकट पर बिन्दकी विधानसभा से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। वही साध्वी निरंजन ज्योति 2014 में सांसद बनने से पहले हमीरपुर विधानसभा से विधायक थीं। तीनो ही दलों के प्रत्याशीयों को राजनीति का दिग्गज खिलाड़ी माना जाता है। ऐसे में सभी दलों के प्रत्याशियो के जीत के अपने दावे है। वही समर्थकों द्वारा भी अपने अपने प्रत्याशियो के पक्ष में आंकडो के साथ जीत का माहौल तैयार किया जा रहा है। सभी प्रत्याशी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त भी दिखाई दे रहे है। वही आंकडो की बाजीगरी के बीच प्रत्याशियों द्वारा भितरघात करने वाले जयचन्दों की भी तलाश की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के दम पर व केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के किये गए कार्यो के नाम पर जनता द्वारा अपने आपको चुने जाने के प्रति आश्वस्त दिखाई दे रही है। जबकि गठबन्धन प्रत्याशी सुखदेव प्रसाद वर्मा बहुजन समाज पार्टी की सरकार के दौरान मुख्यमंत्री मायावती द्वारा सर्व समाज के लिये कराये गए कार्यो, जातिगत समीकरणों के साथ समाजवादी पार्टी के बोटबैंक के सहारे अपनी जीत पक्की मानकर चल रहे है। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी राकेश सचान कांग्रेस पार्टी द्वारा पूर्व में मतदाताओ से जनसम्पर्क, गरीबो के लिए लांच की गयी 72 हजार रुपये वार्षिक न्याय योजना, मनरेगा के दिनों की अवधि, किसानों की कार्जमाफी समेत कई योजनाओं के नाम पर लोगो का अपनी ओर जुड़ाव को अपनी जीत का आधार मान रहे है। वहीं जीत के दावों के बीच में प्रत्याशियो द्वारा वोटरों द्वारा किये गए निर्णयो से अंदर से भयभीत भी दिखाई दे रहे है। कहीं न कहीं प्रत्याशियो में भितरघात का भय भी दिखाई दे रहा है। भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति जहाँ स्वजातीय मतदाताओ के साथ स्वर्ण ब्राह्मण-क्षत्रिय मतदाताओ समेत बैकवर्ड वोटो का एकमुश्त न मिलना कही न कहीं साध्वी को चिंता में डाल रहा है। जबकि कांग्रेस पार्टी प्रत्याशी राकेश सचान के साथ दिन रात प्रचार के बाद भी कुर्मी समाज, सवर्ण, बैकवर्ड व मुस्लिम मतदाताओ का झुकाव कांग्रेस की ओर नही करवा सके। वही गठबन्धन उम्मीदवार सुखदेव प्रसाद वर्मा द्वारा चुनाव के समय ही दोनों दलों के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा किये जाने से कार्यकर्ताओ में नाराजगी बनी हुई थी। ऐन मौके पर बसपा उम्मीदवार द्वारा कार्यकर्ताओ को चुनाव में बुलाया तो गया लेकिन तमाम कार्यकर्ता फिर भी छूट गये। वही कांग्रेस पार्टी द्वारा स्वजातीय प्रत्याशी उतारे जाने से कुर्मी समाज का भी एकमुश्त वोट सुखदेव प्रसाद वर्मा को न मिलना भी बसपा प्रत्याशी के लिये चिंता का विषय है। वही मुस्लिम मतो को भी कांग्रेस पार्टी में कुछ न कुछ अंश मिला है। बसपा व सपा का गठबन्धन होने व भाजपा के पांच वर्ष के कार्यकाल के बाद इस बार माहौल बदले होने की बात कही जा रही है। वहीं प्रत्याशियों द्वारा भितरघात करने वाले कार्यकर्ताओ के साथ समर्थकों को चिन्हित किये जाने का दौर जारी है। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियो के भाग्य का निर्णय तो 23 मई को आयेगा। तब तक प्रत्याशी के दिलो की बढ़ी हुई धड़कनों के बीच समर्थकों द्वारा जीत हार का गुणा भाग लगाया जा रहा है।

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