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शनिवार, 11 मई 2019

रोजा नमाज के साथ अपने माल की पूरी जकात निकाले मालदार - कारी फरीद

फतेहपुर, शमशाद खान । रमजान का महीना अमीर व गरीब सभी को एक साथ मिलकर भाईचारे के बीच ईद की खुशियां मनाने का पैगाम देता है। इस पाक माह में मुस्लिम समाज के लोग जकात, खैरात, सदकाफितर जैसी रकमांे से अपने गरीब व लाचार भाईयों की सहायता कर उनको बराबर जीने का हक देते हैं। इसलिए मालदार रोजा नमाज के साथ-साथ अपने माल की सही जकात जरूर निकालें। जकात न निकालने वालों पर मैदान-ए-महशर में रोजा उनके मुंह पर मार दिया जायेगा। 
यह बात काजी-ए-शहर मौलाना कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कही। उन्होने कहा कि रोजा व नमाज के साथ-साथ मालदार लोगों को चाहिए कि वह अपने माल की पूरी जकात जरूर निकालें क्योंकि आपके द्वारा निकाली गयी जकात से यतीम, बेसहारा, गरीब व बेवाओं की भी ईद होती है। उन्होने कहा कि यदि रोजदार अपने माल की जकात नहीं निकालता तो मैदान-ए-महशर में उसका रोजा उसके मुंह पर मार दिया जायेगा। लिहाजा अगर आप मालिके नेसाब (मालदार) हैं तो जकात की अदायगी में ताखीर न करें और अपनी महबूब कमाई का चालीसवां हिस्सा यानी ढाई फीसद जकात निकालना फर्ज है। उन्होने कहा कि अल्लाह तआला ने जकात का हुक्म देकर अपने बंदों की खिदमत व मदद करने का मौका अता किया है। हम सभी को इस पर अमल करना चाहिए। लिहाजा मुस्लिम समाज के लोगों को चाहिए कि माहे रमजानुल मुबारक में ज्यादा से ज्यादा गरीबों, यतीमों और मिस्कीनों की मदद करें। लेकिन सबसे पहले अपने रिश्तेदारों में मजबूर व लाचार मुस्तहेक तलाश करें और उनकी मदद करके ज्यादा सवाब के हकदार बनें। फिर गरीब, यतीम, मिस्कीन, दीनीएदारे वगैरा में अपनी जकात दें। काजी-ए-शहर ने कहा कि रमजान के दूसरे अशरे में यदि गरीबों का हक दे दिया जाये तो वह भी अपने ईद की खुशियों की तैयारी कर सकेंगे। कहीं ऐसा न हो कि लालच के मारे जकात अदा न करें और गुनेहगार हों और जकात इस तरह से दें कि एक हाथ से दे तो दूसरे हाथ को पता भी न चल सके। श्री कादरी ने मुस्लिम समाज के रोजदार से अपील किया कि अफ्तार के वक्त वह अल्लाह तआला से मुल्क की सलामती व अपनी तरक्की के लिए दुआ करें क्योंकि अफ्तार के वक्त की मांगी गयी दुआ को अल्लाह तआला कुबूल फरमाता है। 

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