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बुधवार, 22 मई 2019

आठ वर्षीय सानिया ने पहला रोज रख सब्र का दिया संदेश

फतेहपुर, शमशाद खान । रमजान हर किसी को नेकी की तरफ बुलाता है। इतना ही नहीं रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज हैं। चाहे वह महिला हो या पुरूष। रमजान के रोजे शरई मजबूरी के बिना छोड़ने पर गुनाह होता है। रमजान का पाक महीना शुरू होते ही जहां बड़ों में उत्सुकता देखी जाती है। वहीं बच्चे भी किसी से कम नहीं है। शहर के मुराइनटोला निवासी आठ वर्षीय बालिका सानिया ने पहला रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। उसके इस हौसले की पूरे मुहल्ले सहित रिश्तेदारों में चर्चा रही और उकी तरह-तरह के उपहार देकर हौसला अफजाई की।
रमजान माह का मकसद है कि रोजा रखकर जहां बुराईयों से बचा जा सके वहीं अल्लाह के करीब पहुंचा जा सके। रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज किये गये हैं। मसलन वह बीमार न हो और रोजा रखने की हालत में न हो। शहर के मुराइनटोला में आठ वर्षीय सानिया ने अपने परिवार के सदस्यों को रोजा रखते हुए देखकर मन में भी रोजा रखकर अल्लाह की इबादत का ख्याल आया। उसने मां-बाप की इजाजत से अपना पहला रोजा रखा। भीषण गर्मी और शिद्दत के दिनों में रखे गये इस रोजे की अहमियत ही कुछ और है। अल्लाह तआला को जहां गर्मी का रोजा अधिक पसंद हैं वहीं जवानी की इबादत बेहद प्यारी है। सानिया ने रोजा रखकर पूरा दिन अल्लाह की इबादत की। उसके इस हौसले को देखकर पूरे मुहल्ले के साथ-साथ रिश्तेदारों ने उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। सानिया ने बताया कि उसकी मां व अन्य घर वाले भी रोजा रखते हैं। उनको देखकर ही उसके मन में भी रोजा रखने की नियत आयी। उसने बताया कि रोजा रखने से सवाब मिलता है और गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता है।

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