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जातीय विद्वेष, घृणा, कुंठा आधारित सामाजिक राजनैतिक जीवन कौन जीना चाहेगा ??

लखनऊ, अरविन्द विद्रोही - अशिक्षित, जाहिल, कुंठित व्यक्ति  जलन- विद्वेष -कुंठा को आत्मसात किये हुए अपने जीवन को उसी भाव मे जीता रहता है । कोई भी परिवार, संगठन नियम कायदे कानून से ही संचालित होता है । जब जब नियम कायदे कानून की उपेक्षा की जाती है परिवार, संगठन बिखरता ही है ।

डॉ लोहिया के सत्ता और संगठन के सिद्धांत को पढ़ना, समझना जरूरी है । सिर्फ यही नही बल्कि समाजवादी साहित्य, भारतीय राजनैतिक सभी राजनैतिक चिंतकों के विचारों का पठन पाठन आवश्यक है लेकिन क्या आज इसकी आवश्यकता सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ता महसूस करते हैं ?

कोई भी सामाजिक राजनैतिक संगठन जातीय आधार पर संचालित नही किया जा सकता है । जातीय आधार पर जातीय संगठन संचालित होते हैं ।जब तक जातीय संगठन का ध्येय जाति की तरक्की रहता है तब तक संगठन को समाज और राजनीति में महत्व प्राप्त होता है परंतु जब कोई भी संगठन या व्यक्ति जातीय विद्वेष - घृणा-कुंठा आधारित कार्य करने लगता है उसको सिर्फ और सिर्फ उपेक्षा -तिरस्कार ही मिलता है ।

डॉ लोहिया युगदृष्टा थे । उन्होंने विस्तार से संगठन कार्यों पर अपना विचार रखा था ,भगत सिंह समेत तमाम क्रांतिकारियों ने समाजवादी मूल्यों युक्त आजाद भारत की प्राप्ति के लिए संगठन कार्य के बिंदुओं को उल्लेखित किया था ।

संगठन में शक्ति होती है लेकिन संग़ठन का उद्देश्य भी पवित्र और जनउपयोगी होना चाहिए । घृणा ,विद्वेष ,जलन,कुंठा ग्रस्त व्यक्तियों का संग़ठन सिर्फ समाज मे वैमनस्यता पैदा करने का कुत्सित कार्य कर सकता है ।इसलिए प्रत्येक व्यक्ति एवं संगठन को व्यक्ति - समूह ,जाती ,संग़ठन की तरक्की के मार्ग पर चलना चाहिए न कि दूसरे व्यक्ति-समूह,जाति ,संग़ठन को कमजोर करने के कार्य मे संलग्न होना चाहिए ।

किसी भी लकीर को मिटाने के स्थान पर उससे बड़ी लकीर खींचने का हौसला होना चाहिए ,कोशिश करनी चाहिए कि हमारी प्रशंसा हो न कि भर्त्सना ।।

राजनैतिक मित्रों - मित्राणियों --- आप लोग अपने अपने राजनैतिक दल और नेतृत्व पर विश्वास रखिये । अपने दल के नेतृत्व ,संग़ठन के नेताओं ,पदाधिकारियों ,जिम्मेदार लोगों के बारे में तथ्यहीन बातों का प्रतिरोध करिये ।अगर अपने दल के किसी व्यक्ति से कोई शिकायत है तो जिला अध्यक्ष ,दल के जनप्रतिनिधि ,प्रदेश पदाधिकारियों ,प्रदेश अध्यक्ष सहित प्रदेश कमेटी के नेताओ तथा राष्ट्रीय नेतृत्व से शिकायत करिये । सामाजिक - सार्वजनिक मंच पर अपने ही दल संग़ठन के नेताओं के विरुद्ध बयानबाजी क्या यह सिद्ध नही करती कि जो लोग इस तरह की बयानबाजी करते उनको अपने ही नेतृत्व पर भरोसा नही है ?

भागमभाग और तनाव भरी जिंदगी में क्यों और जहर घोला जा रहा है यह मेरे समझ से परे है । खैर , कुछ एक प्रिय व्यक्तियों जिनमें एक अग्रज भी हैं ,कुछ अनुज  और बहन सरीखी एक मित्राणि भी है के निर्देश रूपी अनुरोध पर राजनैतिक विषय पर यह लिखत लिखा हूँ ।

राजनैतिक संगठन नेतृत्व अपने संग़ठन के जिम्मेदारों की सलाह से संचालित करता है न कि किसी जातीय समूह की इच्छा से

अंत मे अगर आप फ़िल्म और फिल्मी संसार मे तनिक भी रुचि रखते हैं तो मनोरंजन हेतु www.p4peoplearts.com  अवश्य चटका लगा कर पढ़ें । ----- अरविन्द विद्रोही

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