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किसानों व जमीन की सुरक्षा की खातिर शोधार्थी ने बनाई सस्ती जैविक खाद

फतेहपुर, शमशाद खान । महंगी खादों के प्रयोग से जमीन की खत्म हो रही उपजाऊ शक्ति से चिन्तत भोपाल स्थित बरकत उल्ला यूनीवर्सिटी के शोधार्थी छात्र ने किसानों व जमीन की सुरक्षा की खातिर सस्ती आर्गेनिक खाद बनायी है। जिसके प्रयोग से बेहतर उत्पादन की राह आसान हो गयी है। यह शोधार्थी छात्र शहर क्षेत्र के चैक बाजार का मूल निवासी है। शोधार्थी की इस कामयाबी ने जिले का नाम रोशन कर दिया। छात्र ने इस कामयाबी का श्रेय अपने बड़े भाई को दिया है। 
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए चैक बाजार निवासी स्व0 लक्ष्मी शकर के पुत्र डा0 गोविन्द गुप्ता ने बताया कि वह भोपाल स्थित बरकतउल्ला यूनीवर्सिटी के शोधार्थी छात्र हैं। वर्तमान रसायनिक खादों के प्रयोग से जमीन की उपजाऊ शक्ति खत्म होती जा रही है। साथ ही विभिन्न प्रकार के रोगों से भी आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसलिए उन्होने किसानों व जमीन की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जैविक खाद बनायी है। लाभदायक जीवाणुओं पर शोध कर ऐसी खाद बनायी है जो छोटे किसानों के लिए कम खर्च में उपलब्ध हो सकेगी। वर्तमान में जो खाद बाजार में उपलब्ध है वह महंगी होने के साथ ही फसलों की उत्पादकता में उतनी कारगर नहीं है। जितनी कि नये शोध में बनने वाली खाद उपयोगी होगी। इस पर उन्हें विश्वविद्यालय ने 26 दिसम्बर को माइक्रो बायोलाजी विषय में डाक्टरेट की अधिसूचना जारी की। छात्र का शोध कार्य लगातार प्रयोग हो रहे रसायनिक खादों के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए जैविक खादों को बढ़ावा देने पर आधारित है। इस शोध को अभी केवल गेहूं की फसल हेतु किया गया है। जल्द ही अन्य फसलों के लिए भी शोध किये जायेंगे। होसमाबाद के विभिन्न गांवों से गेहूं के फसल की मिट्टी से लाभदायक जीवाणुओं को प्राप्त किया। उन्हें प्रयोगशाला में संवर्धन करके प्रबल सूक्ष्म जीवाणुओं को प्रयोगशाला में व विभाग की जमीन के अलग-अलग भाग पर रसायनिक एवं बाजार में मिलने वाले जैविक खादों के प्रयोग किया। इससे प्रबल सूक्ष्म जीवाणु तैयार किये। इस जैविक खाद से निर्मित भाग में अन्य भाग की तुलना में कई अधिक घने आकार के गेहूं के पौधे प्राप्त हुए। इस कामयाबी के लिए उन्होने गुरूजनों व परिवार के लोगों का आशीर्वाद व खुद की लगन ने उनको इस मुकाम पर पहुंचाया। उन्होने कहा कि उनका हौसला विशेष रूप से उनके बड़े भाई गुड्डू मोदनवाल ने बढ़ाकर इस मुकाम पर पहुंचाया है। 

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