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गंगा जल में हानिकारक तत्वों की होगी जांच

कानपुर नगर,  हरिओम गुप्ता - गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की लगातार कोशिश की जा रही है। पूर्व में भी गंगा जल की समय समय पर सैंपलिंग होती रही है, और सैंपलिंग के दौरान आयी रिपोर्ट में क्रोमियम तािा आर्सेनिक जैसे खतरनाक तत्व मानक से ज्यादा मिले थे, इसके साथ ही जल में जिंक की मात्र भी अधिक पाई गयी थी। वर्तमान में कुंभ के चलते कानपुर में टेनरियों का संचालन बंद चल रहा है, ऐसे में वोट द्वारा परीक्षण कर यह देखा जायेगा कि जल में प्रदूषण कि क्या स्थिति है और फिर रिपोर्ट तैयार की जायेगी। गंगा जल में परीक्षण में दौरान पीएच वैल्यू, डीओ, बीओडी, नाइट्रेट, क्रोमियम, आर्सेनिक, जिंक, कैडमियम आदि की स्थिति देखकर रिपोर्ट तैयार की जायेगी।
             गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाये रखने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और वर्तमान में कुंभ के कारण शहर की टेनरियां बंद चल रही है ऐसे में दावा किया जा रहा है कि गंगा जल में प्रदूषण कम हुआ है, पूर्व में किए गऐ परीक्षण में कुछ हानिकारक तत्व मानके से ज्यादा मिले थे, इस कारण जल की जांच करने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविधालय के प्रोफेसरो की एक टीम गंगाजल का परीक्षण करेगी और परीक्षण के लिए नाव पर ही लैब भी बनायी जायेगी। जल का नमूना लेकर तत्काल जांच करी जायेगी, जिसके उपरान्त रिपोर्ट तैयारी होगी। इस सम्बन्ध में बताया जाता है कि 18 फरवरी के बाद गंगा बैराज से लेकर वाजिदपुर तक की जायेगी जो 9 अलग-अलग स्थानों पर होगी। बायोसांइस एड बायोटेक्नालाॅजी विभाग के प्रोफेसरों ने इसकी तैयारी भी कर ली है। वहीं बताया गया कि बीते दिनो जांच में सामने अया था कि गंगा के पानी में नाइट्रेट की मात्रा अधिक है जो तब होता है, जब कहीं न कहीं गंगा में सीवर का पानी मिल रहा हो। फिलहाल विभागों का दावा है कि कुंभ में जाने वाला पानी पूरी तरह साफ है और इसी बात के लिए गंगा जल का परीक्षण कर पता लगाया जायेगा कि जल में कितने हानिकारक तत्व मौजूद है और किस स्तर पर।

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