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पीडित को मिला न्याय, कोर्ट के आदेश में दर्ज हुआ मुकदमा

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता -  आऐ दिन पत्नि के मायके वाले आकर पीडित पति तथा सास के साथ मार-पीट करते थे और सम्पत्ति बहू के नाम करने का दबाव बनाते थे। पूर्व में समाचारपत्रो में लुटेरी दुल्हन के नाम से समाचार भी प्रकाशित हुआ था। मदद की गुहार पर विधनू पुलिस सुनती नही थी। मायके वाले धमकाते थे कि तुम्हे और तुम्हारे रिश्तेदारो को गंभीर धराओं में फंसा देगे। जब जुल्म हद पार कर गया तो पीडित सास एसएसपी की चैखट पर पहुंची और इंसाफ तथा न्याय की गुहार लगायी, जिसपर एसएसपी द्वारा जांच के आदेश दिये गये लेकिन मामला थाना स्तर पर आकर रूक गया। न्याय और मदद का जब कोई दूसरा सराहा नही बचा तो पीडित न्यायालय की शरण में पहुंच गया। अधिवक्ता ने भी कोई कसर नही छोडी और ऐसीएमएम-3 न्यायालय से अंततः पीडित को न्याय मिला और प्रताडित करने वालों पर विभन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिऐ गये।
          थाना बिधनू क्षेत्र के ग्राम कठारा निवासी स्व0 अशोक कुमार गुप्ता का पुत्र राम जी गुप्ता अपनी विधवा माता के साथ रहता है और गुजर-बसर के लिए छोटी सी परचून की दुकान करता है। उसकी शादी 2017 में बाबू पुरवा निवासी रामपाल ओमर की पुत्री कोमल गुप्ता के साथ हुई थी। पत्नि का आचरण शुरू से ठीक नही था और परिवार में कहल होने लगी थी वहीं वह मकान तथा अन्य सम्पत्ति अपने नाम करने की जिदद करती थी। वहीं पत्नी की अविवाहित बडी बहन काजल आये दिन पत्नी को लेने घर पहुंच जाती थी और पत्नी बिनाजानकारी दिये उसके साथ चली जाती थी, मना करने पर झगडे पर उतारू हो जाती थी यह काफी दिनो तक चलता रहा।  16 नवम्बर 2018 को पत्नी के मायके वालो में पत्नी के भाई, साला प्रदीप, साली काजल, मामा रामप्रसाद दुकान पहुचे गये और मारा-पीटा उन लोगो ने जबरन गल्ले से दस हजार रू0 निकाल लिय। गांवे के लोगो के आने पर धमकी दी साथ थी पीडित रामजी पर ज्वलनशील पर्दाथ डाल लिया जिससे पीडित झुलस गया और घालय अवस्था में बिधनपू पुलिस उसे थाने तो लेगय लेकिन इलाज नही कराया साथ ही डरा धमकाकर छोड दिया, जिसके बाद पीडित ने हैलट में जाकर स्वयं ही अपना इलाज करवाया।  पीडित लाचार था। थाना बिधनू से जब कोई सुनवाई नही हुई तो पीडित की मां एसएसपी की चैखट पर पहुंची जहां एसएसपी द्वारा जांच के आदेश दिए गये, लेकिन थाना स्तर पर जांच लापरवाही की भेंट चढ गयी। दोषीजनो पर पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नही की गयी। अंत में न्याय की आस खो चुका पीडित पति ने न्यायालय की शरण में पहुंचने का मन बना लिया, जिसमें उसके अधिवक्ता रमेश कुमार गुप्ता ने पूरा साथ दिया और मामला न्यायालय एसीएमएम-3 में जा पहुंचा। पूरे मामले में पीडित रामजी गुप्ता के अधिवक्ता रमेश कुमार गुप्ता ने कहा कि पीडित उनके मिला तथा मामले को समझकर एक वाद एसीएमएम-3 न्यायालय में दाखिल किया गया। पीडित द्वारा दिऐ गये साक्ष्यो के आधार पर मा0 न्यायालय द्वारा कार्यवाही करते हुए इस सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज करने के आदेश पारित किये।

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