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पल-पल बदल रहे मौसम से बढ़ी मरीजों की संख्या

फतेहपुर, शमशाद खान । इन दिनों पल-पल बदल रहे मौसम के कारण घर-घर संक्रामक बीमारियों ने पैर पसार रखे हैं। जिला चिकित्सालय समेत निजी चिकित्सालयों में भी मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। सुबह होते ही सदर अस्पताल के रजिस्ट्रेशन कक्ष के बाहर मरीजों की लम्बी लाइनें देखी जा सकती हैं। इसके साथ ही ओपीडी के सभी कक्षों में भी मरीज लाइन में लगे रहते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि इस मौसम में सावधानी बरतने की बेहद जरूरत है। खान-पान सहित पहवाने पर व्यक्ति को विशेष ध्यान रखना चाहिए। 
मार्च माह की शुरूआत से ही तेज धूप ने असर दिखाना शुरू कर दिया था। इससे लोगों को प्रतीत हो रहा था कि अब सर्दी गायब हो गयी है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीच-बीच भी मौसम करवट बदलता रहा और सुबह-शाम लोगों को हल्की ठण्ड का एहसास दिलाता रहा। दिन में निकलने वाली तेज धूप के चलते अधिकतर लोगों ने गर्म कपड़ों को उतार दिया था। शाम होते ही लोगों को ठण्ड का एहसास भी होता है। जिसके चलते संक्रामक बीमारियों ने घर-घर पांव पसार रखे हैं। सर्दी, खासी, वायरल फीवर के मरीज सबसे अधिक देखे जा रहे हैं। जिला चिकित्सालय समेत निजी चिकित्सालयों में सुबह से ही मरीजों की लम्बी-लम्बी लाइनें लगी रहती हैं। जिला चिकित्सालय की ओपीडी में इलाज कराने के लिए लोग बाकायदा लाइनें लगाये हुए हैं। इस बाबत जब मरीजों से बात की गयी तो बताया कि वह कई दिनो से जुकाम, खासी, बुखार से पीड़ित हैं। कई चिकित्सकों को भी दिखाया लेकिन कोई आराम नहीं मिला। उधर इस बाबत जब चिकित्सकों से बात की गयी तो चिकित्सकों का कहना रहा कि इस मौसम में सबसे अधिक बच्चे व बूढ़े प्रभावित होते हैं। बच्चों एवं बूढ़ों के खान-पान एवं पहनावे में विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। चिकित्सकों ने कहा कि बच्चों को अभी हाफ कपड़े न पहनायें। सर्दी से बचाने के लिए गर्म अन्दर गर्म कपड़े अवश्य पहनायें। मच्छरों के प्रकोप से भी बच्चों व बूढ़ों को बचाने का काम करें। इस समय वायरल फीवर की संभावनाएं अधिक होती हैं। इसलिए बाहरी खाद्य सामग्री का इस्तेमाल कम करें। घर का पका खाना ही खायें। बासी खाने से भी बचें। इसके साथ-साथ अपने आस-पास गंदा पानी एकत्र न होने दें। कबाड़ के सामान में भरे पानी को हटा दें और उसे अपने आस-पास न रखें। चिकित्सकों ने कहा कि इस मौसम में सावधानी ही बीमारियों से बचाव है। 

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