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कांग्रेस व भाजपा प्रत्याशी घोषित सपा का है इंतजार

कानपुर नगर,  हरिओम गुप्ता - जैसे जैसे लोकसभा चुनाव की तारीख निकट आती जा रही है वैसे वैसे कानपुर में राजनीति गलियारो की धमा-चैकडी बढती जा रही है। लोकसभा चुनाव को लेकर सभी दल सक्रीय हो चुके है और नुक्कडों पर सभाये होने लगी है जिसमें लोग चुनावी उठा-पटक की चर्चा कर रहे है। चुनावी समर में जहां कांग्रेस ने अपने पुराने चेहरे पर भरोसा किया है वहीं भाजपा ने लंबे इंतजार के बाद नगर से अपना प्रत्याशी धोषित किया है लेकिन इस बीच अभी भी सपा की तरफ सबकी निगाहे जमी हुई है। अभी तक सपा ने अपना दांव नही खोला है।
              मौसम की गर्मी के साथ शहर में चुनावी सरगर्मी भी बढती जा रही है। जहां कांग्रेस ने पहले ही अपना लोकसभा प्रत्याशी मैदान में उतार दिया वहीं अब भाजपा ने भी पुराने चेहरे पर ही भरोसा जताते हुए सत्यदेव पचैरी को लोकसभा चुनाव प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा है लेकिन अभी भी समाजवादी पार्टी ने अपना कार्ड नही खोला है जो सबके लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है। राजनैतिक पंडितों की माने तो श्रीप्रकाश के रूप में कांग्रेस ने अपना मजबूत दावेंदार पेश किया है और भाजपा भी शायद इसी का इंतजार कर रही थी। नगर की सीट पर ब्राम्हणो का खासा प्रभाव रहा है शायद इस बात को भी भाजपा समझ रही थी और श्रीप्रकाश जैसे बडे कद के नेता के सामने उतना ही शक्तिशाली प्रत्याशी उतारने के कोई जल्दी नही करना चाहती थी और अब भाजपा ने कानपुर में पूर्व सांसद मुरली मनोहर जोशी के स्थान पर प्रदेश सरकार के खादी ग्रामोधोग मंत्री सत्यदेव पचैरी को टिकट दिया है वहीं अकबरपुर लेाकसभा से देवेंद्र सिंह भोले एक बार फिर भाजपा का चेहरा बने है। सत्यदेव पचैरी कानपुर में एक जाना-पहचाना चेहरा है और वह मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी के सामने एक मजबूत प्रत्याशी भी है। 1991 में पहली बार विधायक बने सत्यदेव पचैरी लगातार राजनीति की सीढियों पर कामयाबी से चढते गये है और अब कानपुर नगर की सीट पर सीधा मुकाबला श्रीप्रकाश और सत्यदेव पचैरी का माना जा रहा है। हलांकि अभी सपा ने अपना पत्ता नही खोला है। जानकारो की माने तो पचैरी इस चुनाव में सही प्रत्याशी साबित होंगे और वर्तमान में वह सभी समीकरणों में फिट भी बैठ रहे है। बाम्ह्रण बाहुल माने जाने वाली इस सीट पर श्रीप्रकाश के अपोजित सत्यदेव पचैरी को मैदान में लाने को राजनैतिक दृष्टिकोण से सही माना जा रहा है। दूसरी तरफ अभी भी सपा का प्रत्यार्शी क्लीयर न होने के कारण सपा खेमे में भी असंतोष दिखायी दे रहा है, जहां सभी अपने-अपने पैतरे अपना रहे है तो वहीं दावेंदारो को यह भी डर है कि आला कमान द्वारा क्या घोषणा की जायेगी। गठबंधन के बाद सपा और बसपा की हुई सीटो के बटवारो में कानपुर लोकसभा की सीट सपा के खाते में आयी है और सपा इस सीट को कानपुर में कभी नही जीत सकी है। पूर्व में कयास लगाये गये थे कि इस सीट के लिए किसे प्रत्याशी बनाया जा सकता है और कई दावेंदार आला तक पहुंच भी रहे थे। माना जा रहा है कि सपा और बसपा मिलकर भाजपा को टक्कर दे सकती है लेकिन कांग्रेस भी इस चुनाव में अपनी खासी उपस्थिति दर्ज करायेगी। कुछ सपा नेताओं ने खुली दावेंदारी भी की है लेकिन आलाकमान इस बार किसी उधोग घराने से जुडे युवा चेहरे को इस समर में उतार सकता है और इसके संकेत भी पूर्व में मिल चुके है फिलहाल सपा अपने प्रत्याशी की कब घोषण करती है यह देखने का विषय है लेकिन अभी पार्टी के आला अपने पदाधिकारियों, बडे नेताओं को एक जुट होकर चुनाव में सहयोग करने के लिए रजामंद करने में जुटे है।  

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