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सपा-बसपा गठबन्धन की गांठ दिखायी दे रही ढीली

कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता -  चुनावी समर में राजनैतिक दल सारे दांवपेंच अपनाते है और इसी के चलते इस बार लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबन्ध किया है। लेकिन कानपुर में इस गठबन्धन प्रत्याशी में सिर्फ एक ही पार्टी की दखल ज्यादा दिखायी दे रही है, जबकि दूसरी पार्टी के कुछ पदाधिकारी ही कार्यक्रम में दिखायी देते है जबकि कार्यकर्ताओं के नाम पर भीड नही एकत्र होती है। राजनैतिज्ञो की माने तो सपा-बसपा का आलाओं में भले ही गठबन्धन हुआ हो लेकिन सच यह है कि दोनो पार्टियों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में आपसी ताल-मेल अभी तक देखने को नही मिला है विषेश रूप से बसपा में क्योंकि पूर्व में हुई सम्मलेन में ही इस गठबन्धन की गांठ ढीली दिखायी पडी थी और उसके बाद लागातार यही दृश्य सामने आ रहा है।
          सपा-बसपा गठबन्धन से नगर लोकसभा सीट प्रत्याशी रामकुमार निषाद भले ही गठबन्धन का चेहरा हो लेकिन सच यह है कि वह सपा से उम्मीदवार है और यही बात इस गठबन्धन को ढीला कर रही है। प्रत्याशी घोषित होने के बाद आयोजित कार्यक्रमों में सपाईयों की तो भीड नजर आती है लेकिन उसमें बासपाई मुठ्ठी भर भी नही होते है। शुरूआत में गठबन्धन के दौरान हुए सम्मेलन में ही यह गांठ ढीली होती नजर आयी थी जहां सपा कार्यकर्ताओं की तो अच्छी भीड थी लेकिन उतनी संख्या में बसपाई नही थे, हलांकि बसपाई एकजुटता का दांवा कर रहे है। वहीं सपाईयों को कहते भी सुना गया कि यदि बसपा का कंडीडेट होता तो बसपाई दिखायी देते। फिलहाल गठबन्धन में एक पक्ष ही सक्रीय नजर आ रहा है। बीते कई कार्यक्रमो में सपा प्रत्याशी के साथ केवल बसपा के नगर अध्यक्ष ही नजर आये जबकि सपा के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता भारी संख्या में मौजूद रहे वहीं बसपा का एक भी कार्यकर्ता नजर नही आया। राजनीति के जानकारो की माने तो अंदरखाने में बसपा के कार्यकर्ता इस गठबन्धन को पचा नही पा रहे है। भले ही बसपा मुखिया मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी में गठबन्धन के लिए आपसी शिकवे भुलाकर एकदूसरे का साथ देने का ऐलान किया हो लेकिन हकीकत कुछ और ही बंया कर रही है, दोनो दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे को पचा नही पा रहे है। कई कार्यक्रमों में इस बात को प्रत्याशी ने भी महसूस किया और स्थति को संभालने की कोशिश भी की लेकिन यह शत प्रतिशत कहा जा सकता है कि फिलहाल कानपुर में सपा-बसपा गठबन्धन का सही नजारा अभी तक देखने को नही मिला है। इस गठबन्धन का क्या अंजाम होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है वह कानपुर सीट के लिए ठीक नही है।

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