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अक्षय तृतीया पर्व: हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी भगवान परशुराम की जयंती

फतेहपुर, शमशाद खान । ब्राम्हण चेतना सेवा संस्थान (ब्राह्मण चेतना मंच) के तत्वाधान में भगवान परशुराम जयन्ती धूमधाम से मनायी गयी। समाज के लोगों ने पूजन कर भगवान परशुराम के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। तत्पश्चात प्रसिद्ध कीर्तन पार्टी द्वारा भजन-कीर्तन कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। जिसको सुनकर उपस्थित जनसमुदाय मंत्र-मुग्ध हो गया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम-सौहार्द बढ़ता है और एकजुटता भी बढ़ती है। इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहना चाहिए। बग्घी पर सवार परशुराम की भूमिका में जाने-माने विद्वान कानपुर के राम बाबू द्विवेदी आकर्षण का केन्द्र रहे। जो बग्घी सुगंधित पुष्पों के बीच लोगों को आशीर्वाद देते रहे। परशुराम की भूमिका निभाने वाले पं0 राम बाबू द्विवेदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि सजातीय बंधु सदाचारी के साथ-साथ शाकाहारी बनें। उन्होने कहा कि सजातीय बंधु सभी वर्ग के गरीब, असहाय व वंचितों की मदद कर न्याय दिलाने का काम करें। उन्होने कहा कि ब्राम्हण वही है जो दूसरों के काम आये। 
शहर के कलक्टरगंज स्थित कमल किशोर तिवारी के हाता में ब्राम्हण चेतना सेवा संगठन (ब्राम्हण चेतना मंच) के तत्वाधान में भगवान परशुराम जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सुबह से ही समाज के लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। निर्धारित समय पर मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भगवान परशुराम का पूजन-अर्चन किया। तत्पश्चात आचार्यों ने वेद मंत्रों के साथ विधिवत पूजा-अर्चना करवायी। उपस्थित जनसमुदाय ने भगवान परशुराम के जोशीले जयकारे लगाये जिससे समूचा वातावरण गुंजायमान हो गया। पूजा-अर्चना के बाद भगवान परशुराम के जोशीले नारों के बीच शोभायात्रा निकाली गयी। जिसमें कीर्तन पार्टी द्वारा भजन-कीर्तन कार्यक्रम प्रस्तुत करते हुए माहौल को भक्तिमय बना दिया जिससे उपस्थित जन मंत्र-मुग्ध हो गये और थिरकते हुए शोभायात्रा की अगवानी की। इस मौके पर शोभायात्रा का समाज के लोगो द्वारा जगह-जगह स्वागत एवं पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। तत्पश्चात् भगवान परशुराम का उद्बोधन हुआ। उद्बोधन के दौरान उन्होने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन अत्यंत कठिन था। उन्होने कहा कि माता एवं पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उन्होने परशु का प्रयोग किया। उन्होने कहा कि लोगों के बीच चर्चा में अक्सर सुना जाता है कि उन्होने धरती से इक्कीस बार क्षत्रियों का संहार किया, किन्तु यह सत्य नही है। उन्होने कहा कि भगवान परशुराम ने समाज में वैमन्स्यता फैलाने वाले पापियों का संहार कर धरती को 21 बार पाप से मुक्त कराया था। कार्यक्रम के समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सर्व समाज के लोगो ने भगवान परशुराम का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। जयन्ती के मौके पर 51 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार भी आयोजित किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष प्रेम शंकर द्विवेदी, डा0 राजेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, प्रदीप गर्ग, अजय अवस्थी, संध्या त्रिपाठी, संतोष कुमारी शुक्ला, मनोरमा शुक्ला, संजय तिवारी उर्फ पप्पू, अमित तिवारी, शिव प्रकाश उर्फ पुत्तू मिश्रा एडवोकेट, राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला, अर्चना त्रिपाठी, वीके शुक्ला, अरूणेश पाण्डेय, महेश द्विवेदी, अविनाश तिवारी, एसके दीक्षित, पप्पू मिश्रा, राजेश मिश्रा, अमर मिश्रा, शिवचन्द्र शुक्ला, सुनिधि तिवारी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

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